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Know Your Army Heroes: रॉकेट लांचर से पाक के आखिरी बंकर को ध्‍वस्‍त कर लांस नायक राम ने ली आखिरी सांस और फिर...

Know Your Army Heroes: रॉकेट लांचर से पाक के आखिरी बंकर को ध्‍वस्‍त कर लांस नायक राम ने ली आखिरी सांस और फिर...

Know Your Army Heroes: बांग्‍लादेश बार्डर पर कुछ सैनिकों के दलदल में फंस जाने की वजह से कमांड ने लांस नायक राम उग्रह पांडेय को वापस आने के लिए कहा था. लांस नायक राम उग्रह ने कमांड को आश्‍वस्‍त किया था कि मौजूदा संख्‍या बल के साथ वह दुश्‍मन को नेस्‍तनाबूद करने में सक्षम हैं. लांस नायक राम उग्रह ने कमांड से किया वादा पूरा किया. दुश्‍मन के तीन बंकरों को ध्‍वस्‍त कर देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दे दिया.  

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नई दिल्‍ली. भारत-पाकिस्‍तान के बीच अभी तक 1971 का युद्ध का आधिकारिक आगाज नहीं हुआ था. पाकिस्‍तानी सेना की तरफ से बांग्‍लादेश (तत्‍कालीन पूर्वी पाकिस्‍तान) की सीमा पर उकसावे की कार्रवाई लगातार जारी थी. पाकिस्‍तानी सेना लगातार अपने मजबूत ठिकानों से भारतीय सेना और सीमावर्ती इलाकों को सीधा निशाना बना रही थी. ऐसे में, भारतीय सेना के लिए यह बहुत जरूरी हो गया था कि आग उगल रहे पाकिस्‍तानी बंकर और उसमें मौजूद दुश्‍मन को खामोश कर दिया जाए.

भारतीय सेना की तरफ से यह जिम्‍मेदारी ब्रिगेड ऑफ दि गार्ड की 8वीं बटालियन को सौंपी गई. इसी आठवीं बटालियन की एक कंपनी की कमान लांस नायक राम उग्रह पांडेय के पास थी. लांस नायक रामउग्रह पांडेय पूर्वी मोर्चे पर दुश्मन की चौकी पर हमले के लिए गार्ड्स ब्रिगेड की एक कंपनी के साथ कूच कर गए. चूंकि, उनकी कंपनी की एक टुकड़ी बांग्‍लादेश सीमा पर स्थिति दलदली जमीन पर फंस गईं थी, लिहाजा संख्‍या बल को देखते हुए मुख्‍यालय ने लांस नायक पांडेय को वापसी के आदेश दिए.

लांस नायक पांडेय ने चुना दुश्‍मन से युद्ध का विकल्‍प
दुश्‍मन के बेहद करीब पहुंच चुके लांस नायक राम उग्रह पांडेय के लिए वापसी संभव नहीं थी. लिहाजा, उन्‍होंने मुख्‍यालय से युद्ध के लिए आगे बढ़ने की इजाजत मांगी. लांस नायक पांडेय की जिद के सामने कमांड को झुकना पड़ा और कमांड ने आखिरी फैसला उन पर ही छोड़ दिया. लांस नायक पांडेय ने कमांड से हुई बातचीत के बारे में अपने साथियों को अवगत कराया. लांस नायक पांडेय की तरह उनके साथियों ने भी वापसी से इंकार कर दिया. जिसके बाद, भारतीय सेना के जाबांजों की यह टुकड़ी दुश्‍मन की तरफ बढ़ चली.

देश के लिए सर्वोच्‍च बलिदान दे गए लांस नायक पांडेय
पाकिस्‍तानी सेना और भारतीय जाबांजों के बीच भारी गोलीबारी जारी थी. तभी, लांस नायक पांडेय की निगाहें उन तीन बंकरों पर टिक गईं, जहां से पाकिस्‍तानी दुश्‍मन लगातार गोलियों और गोलों की बरसात हो रही थी. लांस नायक पांडेय रेंगते हुए दुश्मन के दो बंकरों तक पहुंचे और हथगोले से दोनों बंकरों और उसमें मौजूद दुश्‍मन को नेस्‍तनाबूद कर दिया. दो पाकिस्‍तानी बंकरों को नेस्‍तनाबूद करने के बाद उन्‍होंने अपना रुख तीसरे बंकर की तरफ किया. उन्‍होंने पास पड़े राकेट लांचर को उठाया और तीसरे बंकर को भी ध्‍वस्‍त कर दिया. इस बीच, वे गंभीर रूप से घायल हो गए और रणभूमि में ही वीरगति को प्राप्‍त हो गए.

वीरता के लिए महावीर चक्र से किए गए सम्‍मानित
लांस नायक राम उग्रह पांडेय ने अनुकरणीय वीरता और नेतृत्व दिखाया और देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दे दिया. देश के प्रति इस समपर्ण को देखते हुए उन्‍हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्‍मानित किया गया.

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Tags: Heroes of the Indian Army, Indian army, Indian Army Heroes

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