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आईटीबीपी कॉन्‍स्‍टेबल मेडिकल एग्‍जाम में रिजेक्‍शन से बचना है तो जरूर जान लें ये 20 खास बातें

आईटीबीपी कॉन्‍स्‍टेबल मेडिकल एग्‍जाम में रिजेक्‍शन से बचना है तो जरूर जान लें ये 20 खास बातें

ITBP Constable Recruitment 2021: आईटीबीपी में कॉन्‍स्‍टेबल (ड्राइवर) पद के लिए 13 सितंबर से डिटेल मेडिकल एग्जिामिनेशन की प्रक्रिया शुरू होने होने जा रही है.

  • News18Hindi
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नई दिल्‍ली. भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) लंबे समय से लंबित पड़ी कॉन्‍स्‍टेबल (ड्राइवर) पद की भर्ती के लिए डिटेल मेडिकल एग्‍जामिनेशन (डीएमई) शुरू करने जा रहा है. डीएमई के दौरान, आवेदकों के शरीर और सभी अंगो की विस्‍तृत जांच की जाएगी. जांच में मानके के अनुरूप पाए जाने वाले आवदकों की नियुक्ति आईटीबीपी में की जाएगी.

आपको जानकर हैरानी होगी कि डीएमई की प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी न होने की वजह से करीब 30 फीसदी आवेदकों को निराश होना पड़ता है. कई बार यह रिजेक्‍शन रेट 40 से 50 फीसदी तक भी पहुंच जाता है. लिहाजा, यदि आप भी आईटीबीपी के डीएमई का हिस्‍सा बनने जा रहे हैं तो रिजेक्‍शन से बचने के लिए ये 20 खास बातें जरूर जान लें.

यहां आपको बता दें कि आईटीबीपी में 13 सितंबर से 17 सितंबर के बीच कॉन्‍स्‍टेबल (ड्राइवर) पद के लिए डिटेल मेडिकल एग्‍जामिनेशन (डीएमई) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. ये हैं डीएमई में रिजेक्‍शन के 20 कारण:

रिजेक्‍शन से बचने के लिए आर्थराइटिस (गठिया), ट्यूबरकोलॉसिस (टीबी), हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप), सेक्‍शुअली ट्रांसमिटेड डिसीज और सिफलिस संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव जरूरी है.
आईटीबीपी में जवानों की ज्‍यादातर तैनाती हाई एल्टीट्यूड एरिया में रहती है. लिहाजा, बल में भर्ती के लिए स्‍वस्‍थ्‍य हृदय पहली जरूरत है. हृदय या वाल्‍वुलर संबंधी बीमारियां आपके रिजेक्‍शन का कारण बनती है.
अस्थमा, क्रोनिक टॉन्सिलिटिस और एडेनोइड्स जैसी ब्रोन्कियल या लेरिन्जाइटिस बीमारियां आईटीबीपी में आपके रिजेक्‍शन का कारण बन सकती हैं.
बोलने में दिक्‍कत या हकलाने (stammer) वाले आवेदकों को भी डीटेल मेडिकल एग्‍जामिनेशन के दौरान निराशा का सामना करना पड़ सकता है.
नजर कमजोर होना, रंगों के पहचान में दिक्‍कत, भेंगापन सहित आंख की अन्‍य बीमारियां आपके निराशा की वजह बन सकती हैं.
आईटीबीपी में बहरापन या निर्धारित मानकों से कम सुनने की क्षमता भी रिजेक्‍शन का एक कारण बन सकती है.
मध्‍य कान में संक्रमण यानी ओटिटिस मीडिया (Otitis media) की वजह से भी आपका रिजेक्‍शनहो सकता है. इस बीमारी से पीडि़त लोगों को कान में बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन का खतरा बना रहता है.
आईटीबीपी में भर्ती होने के लिए कम से कम 14 डेंटल प्‍वाइंट जरूरी है. दांत कृत्रिम के प्‍वाइंट काउंट नहीं किए जाते हैं.
असामान्य चाल, छाती में संकुचन, जोड़ो में विकृत भी रिजेक्‍शन की वजह बन सकती है.
रीढ़ में किफोसिस, स्कोलियोसिस, लॉर्डोसिस जैसी समस्‍या आईटीबीपी की भर्ती में रिजेक्‍शन का एक कारण बन सकती हैं.
हाथ या पैरों में पॉलीडैक्‍टाइल भी रिजेक्‍शन की एक वजह है. नौजवानों के हाथ या पैर ने छह अंगुली या अंगूठे की स्थिति को पॉलीडैक्‍टाइल कहा जाता है.
हार्निया (Hernia) से पीड़ित नौजवानों को डीएमई में स्‍वीकार नहीं किया जाता है.
फ्लैट फुट, क्लब फुट, प्लांटार वार्ट्स जैसी पैरों की विकृति वाले अभ्‍यर्थियों को डीएमई में स्‍वीकार नहीं किया जाता है.
बड़े हाइड्रोसील स्‍वीकार नहीं हैं, भले ही इलाज योग्‍य हों, छोटे हाइड्रोसील, जिनका ऑपरेशन के बाद बुरा निशान नहीं बचा है, उसे स्‍वीकार किया जा सकता है.
मिर्गी की बीमारी के प्रमाण मिलने पर नौजवान को डीएमई में रिजेक्‍ट किया जा सकता है.
गुदा भगंदर, बवासीर और अन्य एनोरेक्टल रोगों से पीड़ित नौजवानों को डीएमई के दौरान रिजेक्‍ट कर दिया जाता है.
क्यूबिटस वेरस (Cubitus varus) या वाल्गस (Valgus) की स्थि‍त में रिजेक्‍शन का सामना करना पड़ सकता है. क्यूबिटस वेरस में हाथ और कोहनी की स्थिति का आंकलन किया जाता है.
विटिलिगो (vitiligo), कुष्ठ (Leprosy), एसएलई (SLE), एक्जिमा (Eczema) और फंगल इफेंक्‍शन जैसी गंभीर त्‍वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित नौजावनों को डीएमई में रिजेक्‍ट कर दिया जाता है.
एंडोक्राइन डिसऑर्डर की वजह से डायबिटीज, थायराइड, ग्रोथ डिसऑर्डर, सेक्सुअल डिसफंक्शन के साथ हार्मोन संबंधी बीमारी होने का खतरा बना रहता है. लिहाजा, एंडोक्राइन डिसऑर्डर भी रिजेक्‍शन की वजह बनता है.
मानसिक (Mental), तंत्रिका अस्थिरता (Nervous Instability) और बुद्धि में कमी (Defective intelligence) भी रिजेक्‍शन की बड़ी वजह है.

Tags: Army Bharti, Army recruitment, Indian army, Sena Bharti

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