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BSF Day: 1971 के युद्ध के बाद बदली बीएसएफ की तस्‍वीर, रूस और इजरायल के वैपंस से मिली थी फोर्स को नई ताकत

BSF Day: 1971 के युद्ध के बाद बदली बीएसएफ की तस्‍वीर, रूस और इजरायल के वैपंस से मिली थी फोर्स को नई ताकत

1971 के भारत-पाकिस्‍तान युद्ध के बाद बीएसएफ में हथियारों का अपग्रेडेशन शुरू किया गया. योजना के तहत, बीएसएफ के शस्‍त्रागार में ऐसे ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक हथियारों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिनका निशाना अचूक हो और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम हों. पढ़िए बीएसएफ के पहले अपग्रेडशन की पूरी कहानी...  

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नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री की पहल पर अंतरराष्‍ट्रीय सीमाओं की चौकसी के लिए एक समर्पित सुरक्षा बल के गठन की कवायद जनवरी 1965 में शुरू हो गई थी. भारतीय सेना के तत्‍कालीन जनरल जेएन चौधरी, उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कुमारमंगलम और तत्‍कालीन गृह सचिव एलपी सिंह ने महज छह महीने के छोटे से अंतराल में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का ब्‍लू प्रिंट तैयार कर दिया और जुलाई 1965 में वरिष्‍ठ आईपीएस अधिकारी खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी को बीएसएफ का महानिदेशक नियुक्‍त कर दिया गया.

बीएसएफ के पहले महानिदेशक खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी ने इस नई फौज के लिए थल सेना, वायु सेना, नौ सेना, राज्‍य पुलिस और अकादमिक संगठनों से सर्वश्रेष्‍ठ अधिकारियों का चयन किया. सर्वश्रेष्‍ठ जवानों के चयन के लिए गांव-गांव जाकर उपयुक्‍त नौजवानों की खोज की गई. इस कवायद को पूरा करने में महज चार महीने का समय लगा और  1 दिसंबर 1965 को बीएसएफ आधिकारिक रूप से अस्तित्‍व में आ गया. अब बीएसएफ के पास सर्वश्रेष्‍ठ जवानों के साथ हुनरमंद अधिकारी भी थे, लेकिन एक समस्‍या पूर्व की तरह अभी भी मुंह बाए खड़ी हुई थी.

दरअसल, यह समस्‍या इस नई फौज के पास उपलब्‍ध हथियारों को लेकर थी. चूंकि, बीएसएफ में राज्य सशस्त्र पुलिस की कई बटालियनों का विलय भी किया गया था, लिहाजा इन बटालियन के साथ बीएसएफ को उनके पुराने हथियार भी विरासत में मिले थे. बीएसएफ के प्रारंभिक शस्त्रागार में जवानों के व्यक्तिगत हथियारों के रूप में .303 राइफल, नंबर 4 एमकेआई राइफल और नंबर 1 एमके-द्वितीय राइफल को शामिल किया गया था. सेक्शन और प्लाटून के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्बाइन मशीन 9 मिमी स्टेन एमके -2 को शामिल किया गया था.

कमांडरों के लिए ब्राउजिंग एफएन 9 एमएम पिस्टल उपलब्‍ध थी. अनुभाग हथियार गन मशीन .303 ब्रेन और ओएमएल 2 मोर्टार को प्लाटून हथियार के रूप में शामिल किया गया था. बटालियन स्तर पर जवानों के लिए जीएम 7.92 मिमी (एचएमजी) सीजेड और मोर्टार उपलब्‍ध था. 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्‍तान ने जिन अत्‍याधुनिक हथियारों का उपयोग किया था, उसके सामने बीएसएफ के हथियार महज एक खिलौने की तरह थे. ऐसी स्थिति में, बीएसएफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने शस्‍त्रागार में नए अत्‍याधुनिक हथियारों को शामिल करने की थी.

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1971 की जंग के बाद शुरू हुआ हथियारों का अपग्रेडेशन
1971 के भारत-पाकिस्‍तान युद्ध के बाद बीएसएफ में हथियारों का अपग्रेडेशन शुरू किया गया. योजना के तहत, बीएसएफ के शस्‍त्रागार में ऐसे ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक हथियारों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिनका निशाना अचूक हो और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम हों. इसी क्रम में, लंबे समय से पुलिस बलों का हिस्‍सा रही .303 राइफल की जगह जवानों को 7.62एमएम 2ए, 2ए1, 1ए1 और एल1ए1 राइफल उपलब्‍ध कराई गईं. सेल्‍फ लोडिंग, गैस ऑपरेटेड और एयर कूलिंग जैसी खासियत वाली इस राइफल से एक मिनट में 60 राउंड के साथ ग्रेनेड भी फायर किए जा सकते थे.

इंसास और एके-47 बनी बीएसएफ का हिस्‍सा
अंतरराष्‍ट्रीय बार्डर की सुरक्षा के साथ-साथ अब बीएसएफ की भूमिका देश की आंतरिक सुरक्षा में भी बढ़ती जा रही थी. पंजाब, जम्‍मू और कश्‍मीर, उत्‍तर-पूर्व में फैले आतंकवाद से निपटने में बीएसएफ बेहद अहम भूमिका निभा रही थी. इसी समय, बीएसएफ को अधिक ताकतवर बनाने के मकसद से एके-47 और 5.56 एमएम इंसास राइफल को बीएसएफ के शस्‍त्रागार में अहम हिस्‍सेदारी दी गई. इसी के साथ, सीएम स्‍टेन को सब मशीन गन कार्बाइन 9एमएम 1ए1 से रिप्‍लेस कर दिया गया. इसे क्लोज क्वार्टर बैटल (सीक्यूबी) के लिए अचूक हथियार माना गया था.

बीएसएफ के शस्‍त्रागार से बाहर हुए ये हथि‍यार
1976 में ब्रेन को चरणबद्ध तरीके से हटा दिया गया और जीएम 7.62 मिमी आईबी/आईसी को बीएसएफ के कोथ में शामिल किया गया. इस हथियार से प्रति मिनट 500 राउंड फायर किए जा सकते थे. इस हथियार को बीएसएफ में सेक्‍शन कमांडर के सहायक हथियार के तौर पर शामिल किया गया था. वहीं, 1991 में ओएमएल 2″ मोर्टार की जगह 51 एमएम मोर्टार ई-1 को प्लाटून कमांडर के ‘तोपखाने में शामिल किया गया. वहीं, बटालियन स्तर पर, HMG CZ की जगर GM 7.62 मिमी IMAG 2A1 को शामिल किया गया. 81 मिमी मोर्टार E-1 को OML 3 के स्थान पर लाया गया. दोनों सहायक हथियार तकनीकी रूप से कई पहलुओं में काफी बेहतर थे.

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रूस और इजरायल से खरीदे गए बेहतर हथियार
बीएसएफ की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऑर्डिनेंस फैक्‍टरी में 5.56 कैलिबर की 1B1 इंसास असॉल्ट राइफल का निर्माण किया गया. बीएसएफ ने रूस से एके सीरीज राइफल और  2010-11 में इजरायली राइफल 5.56 मिमी X-95 असॉल्ट खरीदी. स्‍नाइपर्स के उपयोग के लिए विशेष राइफलों की खरीद की गई. मशीनगनों की बात करें तो बीएसएफ को हल्की और मध्यम मशीनगनों से लैस किया गया, जिसमें 5.56 एमएम इंसास लाइट मशीन गन (एलएमजी) और एमएजी 7.62 एमएम मध्यम मशीन गन भी शामिल है. यह मशीनगन 1800 मीटर तक मार करने की क्षमता रखती है.

Tags: BSF, Indian army, Know your Army

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