रेलवे ने शामिल किया कई हजार हॉर्सपवार की क्षमता वाला आधुनिक WAP-7 इलेक्ट्रिक इंजन, जानें खास‍ियत

ट्रेनों के परिचालन में  अनुरक्षित डब्ल्यू ए.पी.-7 विद्युत लोको को शामिल किया है.

ट्रेनों के परिचालन में अनुरक्षित डब्ल्यू ए.पी.-7 विद्युत लोको को शामिल किया है.

Indian Railways: पूर्वोत्तर रेलवे को पहली बार अनुरक्षित WAP-7 विद्युत लोको इंजन मिला है. इस इंजन की विशेषता यह है कि यह सबसे आधुनिक इंजनों में से एक माना जाता है. वहीं पूरी तरह से इलेक्ट्रिक इंजन होने की वजह से इसको चलाने के लिए डीजल की आवश्यकता नहीं पड़ती है. पर्यावरण की दिशा में भी इसको अच्छा माना जाता है और पर्यावरण प्रदूषण भी इसके संचालन से कम होगा.

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नई दिल्ली/गोरखपुर. पूर्वोत्तर रेलवे (North Eastern Railway) को पहली बार अनुरक्षित WAP-7 विद्युत लोको इंजन मिला है. इस इंजन की विशेषता यह है कि यह सबसे आधुनिक इंजनों में से एक माना जाता है. वहीं पूरी तरह से इलेक्ट्रिक इंजन होने की वजह से इसको चलाने के लिए डीजल की आवश्यकता नहीं पड़ती है. पर्यावरण की दिशा में भी इसको अच्छा माना जाता है और पर्यावरण प्रदूषण भी इसके संचालन से कम होगा.

रेलवे कोच की रफ्तार को और तेज करने में इससे मदद मिलेगी. WAP-7 इलेक्ट्रिक इंजन 6000 हॉर्स पावर क्षमता का होता है जो कि 25000 वोल्ट ओवरहेड की सप्लाई से दौड़ता है.

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबन्धक विनय कुमार त्रिपाठी ने इस विद्युत इंजन को विद्युत लोको शेड, गोरखपुर से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया.

उत्कृष्ट एवं आधुनिक तकनीक से बनारस लोकोमोटिव वर्क्स, वाराणसी में निर्मित यह विद्युत इंजन यात्री गाड़ियों के संचालन में उपयोगी है. इस दौरान महाप्रबन्धक त्रिपाठी ने इलेक्ट्रिक लोको शेड, गोरखपुर में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया. वहीं, इलेक्ट्रिक लोको शेड में चल रहे कार्यों की समीक्षा भी की.
रेलवे की माने तो अभी दूसरे रेलवे जोनों में इसका संचालन पहले से ही हो रहा है. लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे के लिए यह बड़ी विशेषता है कि यह WAP-7 इलेक्ट्रिक इंजन उसके अंतर्गत चलने वाली ट्रेनों के लिए पहली बार शामिल किया जा रहा है. अभी तक पूर्वोत्तर रेलवे को छोटी लाइन के रूप में ही जाना जाता रहा है.

लेकिन अब इस तरह से पूर्वोत्तर रेलवे को WAP-7 जैसे इलेक्ट्रिक इंजन रेलवे कोच के साथ जुड़ने से इसका क्षेत्र भी बड़ा हो गया है.

रेलवे प्रवक्ता के मुताबिक 3 फेज इंजन होने की वजह से इसमें रि-जनरेटिव ब्रेकिंग (Regenerative Braking System) भी होता है जिसकी वजह से 15 से 18% एनर्जी एफिशिएंसी होती है. वहीं इस इंजन की खासियत यह भी है कि यह हेड ऑन जनरेशन से चलने वाला होता है जोकि एलएचबी कोचेज के लिए जरूरी माना जाता है.



महाप्रबन्धक त्रिपाठी ने संबंधित रेल अधिकारियों को सभी कार्य तय सीमा में पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा करने का निर्देेश भी दिये.‍

इस अवसर पर मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/निर्माण  आर.के.यादव, प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर ए.के.शुक्ला सहित वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित रहे.
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