कर्नाटक में ऐसा क्या हुआ, जिसने उड़ा दी बीजेपी हाईकमान की नींद

पीएम नरेंद्र मोदी और अ​मित शाह के अगुवाई में पिछले तीन सालों से बीजेपी ने केंद्र से लेकर राज्यों तक में कई बड़ी जीत हासिल की है. कहीं से भी असंतोष की झलक नहीं दिखाई दी.

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Updated: April 28, 2017, 2:20 PM IST
कर्नाटक में ऐसा क्या हुआ, जिसने उड़ा दी बीजेपी हाईकमान की नींद
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Updated: April 28, 2017, 2:20 PM IST
पीएम नरेंद्र मोदी और अ​मित शाह की अगुवाई में पिछले तीन सालों से बीजेपी ने केंद्र से लेकर राज्यों तक में कई बड़ी जीत हासिल की है. कहीं से भी असंतोष की झलक नहीं दिखाई दी. लेकिन, राष्ट्रीय और राज्य राजनीति में अपना वर्चस्व स्थापित करने वाली पार्टी के लिए कर्नाटक ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

​दरअसल, कर्नाटक में पार्टी की अंदरूनी लड़ाई सतह पर आ गई है और राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए इसे संभालना मुश्किल हो रहा है. हाल ही में विधानसभा की 2 सीटों के लिए हुए उनपचुनावों में बीजेपी की हार के बाद उस मौके का फायदा उठाते हुए गुरुवार को ईश्वरप्पा ने येदियुरप्‍पा पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए 'बीजेपी बचाओ रैली' का आयोजन किया.

क्यों है अनबन
येदुरप्पा और ईश्वरप्पा की अनबन तब से है जब से येदियुरप्‍पा को प्रदेश इकाई का अध्यक्ष बनाया गया है. येदियुरप्‍पा ने प्रदेश इकाई का गठन करते समय ईश्वरप्पा के सभी खास लोगों को नजरअंदाज कर दिया था. इस बात की शिकायत ईश्वरप्पा ने शीर्ष नेतृत्व से भी की थी लेकिन ईश्वरप्पा का कहना है कि अमित शाह निर्देशों के बावजूद भी येदियुरप्‍पा ने कुछ नहीं किया.

वहीं, इकाई के गठन के समय दो नियुक्तियों ने खासतौर पर असंतोष को और हवा दे दी थी. इनमें से एक थी शिमोगा जिला अध्यक्ष रुद्रे गौड़ा जिन्होंने ईश्वरप्पा को पिछले विधानसभा चुनावों में तीसरे स्थान पर पहुंचाया था. गौड़े को आम चुनाव से ठीक पहले येदुरप्पा से कर्नाटक जनता पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ने का टिकट मिला था.

चापलूसी के आरोप
इसके बाद अगस्त में ईश्वरप्पा ने एससी, एसटी और ओबीसी से जुड़ी नहीं गैर-राजनीतिक पार्टी संगोली रायान्ना बिग्रेड खड़ी कर दी. इस मसले ने तब तूल पकड़ा जब पूर्व उप मुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा के संगठन ने एक बैठक आयोजित की और येदुरप्पा के काम करने के तरीके की आलोचना करते हुए उन्हें तानाशाह बताया. ईश्वरप्पा ने अपने भाषण में कहा था कि येदुरप्पा जिंदाबाद कहने वालों को पार्टी में पद दिए जा रहे हैं. बिल्कुल हैरानी नहीं होगी अगर पार्टी के जीतने पर वो लोग मंत्री बन जाएं.
दूसरी नियुक्त थी एन रवि कुमार की, जिनकी दक्षिणी राज्यों के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव संगठन के प्रभारी बी एल संतोष से कभी नहीं बनी. येदुरप्पा का रवैया आरएसएस से संगठन की जिम्मेदारी निभाने वाले बीएलज संतोष के प्रति भी अच्छा नहीं बताया जाता है. वहीं पूर्व मंत्री सोगाडु शिवनाना ने कहा कि ये वो येदुरप्पा नहीं हैं जिन्हें हम पहले जानते थे. हम इस बारे में राष्ट्रीय नेतृत्व से अपील करेंगे. सोगाडु शिवनाना को येदुरप्पा ने निष्कासित कर दिया था.

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