उधारी में नाश्ता करते थे किशोर दा, इस कैंटिन वाले के आज भी हैं 5 रुपए 12 आने के कर्जदार

इंडस्ट्री के मस्तमौला सिंगर किशोर कुमार 13 अक्टूबर 1987 को इस दुनिया को अचानक अलविदा कह गए. लेकिन उनके गानें और उनसे जुड़े किस्से आज भी लोगों को गुदगुदा जाते हैं. फिर चाहे बात फिल्म सेट पर उनकी शैतानियों की हो या फिर कॉलेज कैंटिन में लिए उधार के पैसों की रकम को अपने गाने में शामिल करने की.

  • Pradesh18
  • Last Updated: October 13, 2016, 4:39 PM IST
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किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में रहने वाले बंगाली परिवार में हुआ था. किशोर अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. खंडवा में शुरूआती पढ़ाई करने के बाद किशोर को उनके पिता ने इंदौर पढ़ने के लिए भेज दिया.

प्रशंसकों में किशोर दा के रूप में मशहूर इस सिंगर की कई यादें इंदौर शहर से भी जुड़ी हुई है, जहां उन्होंने कॉलेज में दो साल गुजारे थें. उनकी पुण्यतिथि पर आज प्रदेश18 आपको बताने जा रहा है इंडस्ट्री के मस्तमौला सिंगर कहे जाने वाले किशोर कुमार के बारे में कुछ दिलचस्प बातें.

इंदौर में कॉलेज की पढ़ाई

इंदौर में किशोर कुमार ने अपने कॉलेज की पढ़ाई क्रिश्चियन कॉलेज में की. कहा जाता है किशोर को इस कॉलेज में एडमिशन दिलवाने के लिए किशोर के पिता ने खास चिट्ठी लिखी थी, जिसके बाद ही किशोर को इस कॉलेज में एडमिशन मिल पाया था. ऐसा इसलिए क्योंकि हमेशा शरारतों में लगे रहने वाले मस्तमौला किशोर पढ़ाई के मामले में थोड़े कमजोर थे.

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किशोर कुमार कॉलेज में आने के बाद भी अपनी शरारतों और दोस्तों में ही लगे रहते थे. नतीजन गायकी में सबको पीछे छोड़ देने वाले किशोर को कॉलेज में दो साल बैक लगी थी. उसके बाद तीसरे अटेम्ट में उन्होंने अपने एग्जाम क्लियर किए थे.

कॉलेज की यादों को गानों में सहेजा

किशोर दा ने अपने कॉलेज की कई यादों को अपने गानों में सहेजा है. यहां तक की फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ का गीत ‘पांच रुपए बारह आना’ भी किशोर की कॉलेज की यादों से ही जुड़ा है. दरअसल कॉलेज में पढ़ने के दौरान किशोर पर कैंटीन वाले सूरजमल जयपुरवाला का 5 रुपए 12 आने उधार रह गया था. बस इसी आंकड़े को याद रखते हुए किशोर कुमार ने अपने गाने में भी यही रकम शामिल कर ली.

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फिल्मों में दिखी किशोर की दोस्ती की झलक

वैसे कॉलेज से जुड़ा एक और किस्सा है जो किशोर ने इंडस्ट्री में आने के बाद अपने एक गाने से जोड़ा था. क्रिश्चियन कॉलेज में एक इमली के पेड़ के नीचे किशोर आराम से अपने दोस्त के सर की चंपी किया करते थे. चंपी के दौरान कुछ बोलने पर जिस तरह से शब्द सुनाई देते हैं, उसी को याद करते हुए किशोर ने अपने भाव फिल्म ‘झुमरु’ के टाइटल सॉन्ग में डाले थे.

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दोस्ती के मामले में भी किशोर का जवाब नहीं था. वो तो कॉलेज में अपने दोस्तों के लिए बड़े से बड़े रिस्क तक ले लिया करते थे. एक बार कॉलेज फंक्शन में किशोर ने अपने एक दोस्त के लिए स्टेज के पीछे से गाना गया था और उनका दोस्त स्टेज पर सबके सामने सिर्फ लिपसिंग कर रहा था.

वैसे कुछ लोगों का यह भी कहना है कि फेमस सिंगर बनने के बाद कई स्टेज शो करने वाले किशोर को स्टेज फियर था, इसलिए वो कॉलेज में दोस्तों के लिए स्टेज के पीछे से ही गाना गाया करते थे.

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ऐसा माना जाता है कि किशोर का यह लिपसिंग का आइडिया ही पड़ोसन फिल्म के उस सीन में एक्ट किया गया, जिसमें किशोर फिल्म की हिरोइन सायरा बानों को प्रभावित करने और सुनील दत्त की मदद के लिए गाना गाते हैं और सुनील बस गाने पर लिपसिंग करते रहते हैं.

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