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एक-दो नहीं देश को मिले हैं किसान परिवारों से 04 प्रधानमंत्री, जानिए कौन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान परिवार से आने वाले प्रधानमंत्री चरण सिंह हमेशा किसानों के लिए खड़े रहे.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान परिवार से आने वाले प्रधानमंत्री चरण सिंह हमेशा किसानों के लिए खड़े रहे.

इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली के चारों ओर नाराज किसान जुट रहे हैं. जो सरकार के नए कृषि सुधार कानून से नाखुश हैं. उसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं. कृषिप्रधान इस देश में चार प्रधानमंत्री ऐसे हुए हैं, जो गांवों और कृषि परिवार में ही पैदा होकर शीर्ष तक पहुंचे. उनका दिल हमेशा किसानों के लिए धड़का.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 3:10 PM IST
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इन दिनों किसान अपनी मांगों के समर्थन में देश की राजधानी दिल्ली को चारों ओर से घेर रहे हैं. किसानों को शिकायत है कि आमतौर पर भारतीय राजनीति में शीर्ष नेताओं को कृषि और किसानों की असल हालत की कोई जानकारी नहीं है. इसलिए कई बार ऐसे फैसले होते हैं, जो किसानों के हित में नहीं होते. हालांकि आजादी के बाद से देश में चार ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं, जो सीधे-सीधे किसान परिवारों से आए. उनमें से तीन तो ऐसे थे, जो गांव से बेहद गरीब कृषि परिवारों से ताल्लुक रखते थे.

1947 में मिली आजादी के बाद अब 73 साल हो चले हैं. इस दौरान देश में 14 प्रधानमंत्री हुए. इसमें ज्यादातर पीएम उस पृष्ठभूमि से आए, जो आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे या फिर समृद्ध पृष्ठभूमि के थे. दो प्रधानमंत्रियों मोरारजी देसाई और अटल बिहारी वाजपेयी के पिता स्कूल में टीचर थे. लाल बहादुर शास्त्री और मनमोहन सिंह के पिता सरकारी नौकरियों में थे. शास्त्री के पिता मुंसिफ थे तो मनमोहन के पिता क्लर्क.

इसमें चार ऐसे प्रधानमंत्री ऐसे थे, जो विशुद्ध तौर पर किसान परिवारों से आए. चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर और एच डी देव गौडा साधारण या गरीब किसान परिवारों से आए तो पीवी नरसिंह राव आंध्र प्रदेश के संपन्न किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे.



किसान परिवार से आने वाले चरण सिंह
चौधरी चरण सिंह को किसान आज भी अपना मसीहा मानते हैं. उनका कहना है कि जितना काम एक राजनेता के तौर पर उन्होंने किसानों के लिए किया और नीतियां बनवाईं, वो शायद कम नेताओं ने किया हो. चरण सिंह देश के पांचवें प्रधानमंत्री बने. उन्होंने जुलाई 1979 में पद की शपथ ली लेकिन संसद में बहुमत साबित नहीं कर पाए. लेकिन करीब 07 महीने तक शीर्ष पद पर रहे.

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वो पूरी तरह से पश्चिम उत्तर प्रदेश के उस पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते थे, जहां जीविका खेती किसानी से ही चलती थी. चरण सिंह ने वकालत की पढ़ाई की लेकिन उन्हें ऐसे थिंकर प्रधानमंत्री के तौर पर याद किया जाता है, जिसका दिल गांवों, किसानों, कुटीर उद्योगों के लिए धड़कता था.

चरण सिंह ने वकालत की पढ़ाई की लेकिन उन्हें ऐसे थिंकर प्रधानमंत्री के तौर पर याद किया जाता है, जिसका दिल गांवों, किसानों, कुटीर उद्योगों के लिए धड़कता था.


किसान आज भी चौधरी साहब को मानते हैं मसीहा
उन्होंने इसे लेकर बहुत काम किया. कई किताबें लिखीं, जो आज भी मिसाल हैं. लगातार किसानों को उनका हक दिलाने के लिए काम किए. आज भी उत्तर भारत के किसान मानते हैं कि जो काम चौधरी साहब ने उनके लिए किया, वो अब तक किसी ने नहीं किया.

किसानों को उपज दाम मिले, इसके लिए हमेशा काम किया
चौधरी चरण सिंह कहते थे कि देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं खलिहानों से होकर गुजरता है. वो किसानों के नेता माने जाते रहे. ये वही थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन विधेयक की रूपरेखा तैयार की और लागू कर गरीबों को हक दिलाया. उन्होंने हमेशा साबित करने की कोशिश की कि बगैर किसानों को खुशहाल किए विकास नहीं हो सकता. किसानों की खुशहाली के लिए खेती पर बल दिया था. किसानों को उपज का उचित दाम मिले, इसके लिए भी वो गंभीर थे.

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चंद्रशेखर तो नंगे पैरों से ही खेतों में चले जाते थे
चंद्रशेखर 1990 में देश के नौवें प्रधानमंत्री बने. वो बलिया के गरीब किसान परिवार में पैदा हुए. उन्हें खेती-किसानी के बारे में बहुत बारीकी से सबकुछ पता था, जिंदगी में आखिर तक उन्होंने गांवों और खेतों से नाता बनाए रखा. संसद में लगातार किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए आवाज उठाई.

चंद्रशेखर 1990 में देश के नौवें प्रधानमंत्री बने. वो बलिया के गरीब किसान परिवार में पैदा हुए. उन्हें खेती-किसानी के बारे में बहुत बारीकी से सबकुछ पता था


वो ताजिंदगी वही खाते थे एक साधारण व्यक्ति गांव में खाता होगा. प्रधानमंत्री होने के दौरान वो जब भी बलिया जाते थे, ऐसे कमरे में ठहरते थे, जिसकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती.अक्सर खेतों की ओर नंगे पैरों से कूच कर जाते थे.

देव गौडा कर्नाटक के कृषि परिवार से 
देश के 12वें प्रधानमंत्री हरदनहल्ली देवेगौड़ा देव गौडा कर्नाटक के मध्यम वर्गीय कृषि परिवार से ताल्लुक रखते हैं. यही वजह है कि वो भी हमेशा संसद में कृषि और किसानों के पक्ष में खड़े रहे हैं.

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वो सरकार से कृषि और किसानों के लिए एक स्थायी आयोग बनाने की मांग करते रहे हैं. जब संसद में सरकार कृषि सुधारों से जुडे़ तीन बिल पास कर रही थी, तब भी उन्होंने इसे जल्दबाजी में पास करने पर सवाल उठाया था. वो किसानों को स्पेशल पैकेज देने की मांग करते हैं.

जब संसद में सरकार कृषि सुधारों से जुडे़ तीन बिल पास कर रही थी, तब भी एचडी देवे गौडा ने इसे जल्दबाजी में पास करने पर सवाल उठाया था. वो किसानों को स्पेशल पैकेज देने की मांग करते हैं.


पीवी नरसिंह गांवों में पले-बढे़
देश में आर्थिक सुधारों को लाने वाले प्रधानमत्री नरसिंह राव की पैदाइश गांव में हुई. वो एक कृषि परिवार से ताल्लुक रखते थे. हालांकि उनके परिवार को बडे़ किसान परिवारों में गिना जाता था. ग्रामीण इकोनॉमी, कृषि पर राव की मजबूत पकड़ थी. उन्हें भारतीय राजनीति में कृषि एक्सपर्ट नेता के तौर पर भी जाना जाता था.
वो भी ये मानते थे कि देश का विकास तभी होगा जबकि ग्रामीण भारत खुशहाल होगा, वहां विकास के कार्यक्रम बेहतर तरीके से लागू हो पाएंगे. राव ने बाद में अपनी काफी जमीन गरीबों को दान में भी दी.
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