08 अगस्त 1942 : आजादी के आंदोलन में आज की तारीख क्यों सबसे अहम थी

इस दिन के बाद से अगले पांच सालों तक अंग्रेज सरकार को जरा भी चैन नहीं मिल सका. देश में लगातार जिस तरह आंदोलन चल रहा था, उसने अंग्रेजों की पकड़ पूरी तरह ढीली ही नहीं की बल्कि उन्हें भी महसूस करा दिया कि अब वो भारत में रह नहीं पाएंगे

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 2:52 PM IST
08 अगस्त 1942 : आजादी के आंदोलन में आज की तारीख क्यों सबसे अहम थी
गांधी जी द्वारा अंग्रेजों भारत छोड़ों आंदोलन की घोषणा करते ही पूरे भारत में एक नया जोश आ गया
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Updated: August 8, 2019, 2:52 PM IST
08 अगस्त 1942 में देश में जो अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, उसका असर इतना ज्यादा जबदस्त हुआ कि उसके पांच साल बाद अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना ही पड़ा. भारत के आजादी आंदोलन में आज की तारीख सबसे अहम थी.

ब्रिटेन दूसरे विश्व युद्ध में बुरी तरह उलझा हुआ था. भारतीय नेताओं ने आजादी आंदोलन को तेज करने के लिए इस समय को सबसे माकूल पाया. 08 अगस्त 1942 में मुंबई में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक अंग्रेजों भारत छोड़ो का राष्ट्रीय मांग प्रस्तावित हुआ. अंग्रेजों से तुरंत भारत को स्वतंत्र देश घोषित करने की मांग की गई.  तय हुआ कि अगले दिन से पूरे देश में सबसे बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा.

इसी दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जापान में अपनी आजाद हिन्द फौज को 'दिल्ली चलो' का नारा दिया. हालांकि उस समय नेताजी जर्मनी में थे. मलाया, सिंगापुर और वर्मा में जापानी फौजों और हवाई आक्रमण ने ब्रिटिश फौजों के पैर करीब करीब उखाड़ ही दिये. ऐसे में सुभाष चंद्र बोस ने भी तय किया कि अब उनकी फौज भारत की ओर बढ़ेगी.

उसके बाद हरकत में आई अंग्रेज सरकार 

कांग्रेस के प्रस्ताव में कहा गया कि अंग्रेजों को अब भारत में राज करने का कोई हक नहीं. ये देश भारतवासियों का है, लिहाजा अंग्रेज यहां से चले जाएं और देश चलाने का जिम्मा भारतीयों पर छोड़ दें. लेकिन जिस रात ये प्रस्ताव मुंबई में पारित हुआ और तय हुआ कि सुबह से गांधीजी की अगुवाई में देशभर में ये आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा. उसके बाद अंग्रेज सरकार की हलचल भी शुरू हो गई.

अंग्रेज सरकार ने गांधीजी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया लेकिन आंदोलन का असर हर ओर देखा जा रहा था


बड़े नेताओं की गिरफ्तारी 
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9 अगस्त को भोर में ही 'ऑपरेशन जीरो ऑवर' के तहत गांधी, सरोजिनी नायडू और सरदार पटेल समेत कांग्रेस के सभी महत्त्वपूर्ण नेता गिरफ्तार कर लिए गये. इस आंदोलन में सैकड़ों लोग मारे गए, हजारों घायल हुए और जेल गए. भारत छोड़ो आंदोलन में पूरे देश ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, नौजवान कॉलेज छोड़कर आंदोलन में कूद पड़े और जेल का रुख किया. सभी को ये महसूस होने लगा कि अब आजादी दूर नहीं है.

जेल में गांधीजी का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा. वहीं जापान की भारत की ओर बढ़त जारी थी. करीब डेढ़ साल जेल में रखने के बाद वायसराय वेवेल ने गांधीजी को रिहा करने का आदेश दिया लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस का आंदोलन जारी रहा.

इस आंदोलन का असर केवल एक दो शहरों या राज्यों तक नहीं था बल्कि पूरे भारत में छोटे छोटे कस्बों तक देखने को मिला था, इसी बात ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया


नेताजी ने भी कर दी युद्ध की घोषणा 
वहीं सुभाष ने वर्ष 1943 में जर्मनी से ऐतिहासिक पनडुब्बी यात्रा शुरू की. इस यात्रा में बहुत जोखिम थे. समुद्र में उन्हें तीन महीने यात्रा करनी पड़ी. जैसे ही वो जापान पहुंचे, वहां उन्होंने आजाद हिंद फौज की कमान अपने हाथ में ले ली. फिर आजाद हिंद सरकार कर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी.

पांच साल बाद मिल गई आजादी 
इस आंदोलन से भारत को सीधे स्वतंत्रता भले ना मिल पाई हो लेकिन इसका भारी असर जरूर पड़ा. इस देशव्यापी आंदोलन के बाद अंग्रेज सरकार को इतना अंदाजा जरूर हो गया था कि भारत में उनके दिन अब लद गए. पांच साल बाद 1947 में आखिरकार भारत को आजाद कर दिया गया

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First published: August 8, 2019, 2:25 PM IST
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