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जन्मदिन विशेषः BHU के फाउंडर की जिंदगी से जुड़ी ये 10 बातें जानते हैं आप?

जन्मदिन विशेषः BHU के फाउंडर की जिंदगी से जुड़ी ये 10 बातें जानते हैं आप?

मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी.

मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी.

मदन मोहन मालवीय के पूर्वज मध्यप्रदेश के मालवा से थे. इसलिए उन्हें 'मालवीय' कहा जाता है.

    बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और हिंदू महासभा के नेता रहे 'महामना' मदन मोहन मालवीय की आज जयंती है. 25 दिसंबर, 1861 को एक संस्कृत पंडित के घर में जन्मे महामना ने 5 की उम्र से ही संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो गई थी. उनके पूर्वज मध्यप्रदेश के मालवा से थे. इसलिए उन्हें 'मालवीय' कहा जाता है.

    जन्मदिन के मौके पर आइये नजर डालते हैं महामना की जिंदगी से जुड़े दिलचस्‍प तथ्‍यों पर...

    - ब्रिटिश हुकूमत के दौरान चौरी-चौरा कांड के 170 भारतीयों को फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन महामना ने अपनी योग्यता और तर्क के दम पर 151 लोगों को फांसी से छुड़ा लिया था.

    - उन्‍होंने तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली और वह दक्षिण-पंथी हिंदू महासभा के पहले नेताओं में से एक थे. स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ के अलावा वे महान शिक्षाविद थे. महात्‍मा गांधी उनकी नेतृत्‍व शैली की जमकर प्रशंसा करते थे. बापू उन्‍हें अपना बड़ा भाई मानते थे.

    पढ़ेंः BHU की स्थापना में मदन मोहन मालवीय से अधिक योगदान एनी बेसेंट का था?

    - मदन मोहन मालवीय को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के संस्‍थापक के तौर पर जाना जाता है. मालवीय ने इस यूनिवर्सिटी की स्‍थापना 1916 में की थी. भारत की आजादी से एक साल पहले उनका निधन हो गया.

    - असहयोग आंदोलन के दौरान उन्‍होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जमकर लोहा लिया. अंग्रेजी सामान का बहिष्‍कार कर उन्‍होंने स्‍वदेशी आंदोलन को बढ़ावा दिया.

    - दलितों के अधिकार और जातिवाद का बंधन तोड़ने के लिए उन्‍होंने लंबा संघर्ष किया. मालवीय की पहल के बाद ही कई हिंदू मंदिरों में दलितों को प्रवेश मिल पाया.

    - 1911 में उन्‍होंने वकालत छोड़ दी और संन्‍यासी की तरह जीना शुरू किया. हालांकि, उनका यह त्‍याग अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने में बाधक नहीं बना. देश को आजादी दिलाने के लिए एनी बेसेंट और अन्‍य राजनेताओं के साथ मिलकर उन्‍होंने लंबा संघर्ष किया.

    पढ़ेंः बनारस में क्यों अंतिम सांसें नहीं लेना चाहते थे मदन मोहन मालवीय?

    - उपनिषद के 'सत्‍यमेव जयते' (सत्‍य की ही जीत होती है) को लोकप्रिय बनाने में उनकी अहम भूमिका रही. बाद में इसे राष्‍ट्रीय आदर्श वाक्‍य का दर्जा मिला.

    - 25 दिसंबर, 1861 इलाहाबाद के एक साधारण परिवार में जन्‍मे मदन मोहन मालवीय के पिता का नाम ब्रजनाथ और माता का नाम भूनादेवी था. उनकी शादी 16 साल की ही उम्र में हो गई थी.

    - मालवीय 1924 से 1946 तक 'हिंदुस्‍तान टाइम्‍स' के अध्‍यक्ष रहे. इस अंग्रेजी अखबार के हिंदी संस्‍करण हिंदुस्‍तान को लॉन्‍च कराने में उनकी अहम भूमिका रही. 'द लीडर' के अलावा उन्‍होंने हिंदी मासिक 'मर्यादा' और हिंदी साप्‍ताहिक 'अभ्‍युदय' समाचार पत्र का संपादन किया.

    Tags: Banaras Hindu University, Madan Mohan Malviya, Varanasi news

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