इन 10 जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है देश पर

इंटरनेशनल ट्रैवल बढ़ने की वजह से इन खतरनाक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है.

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Updated: August 14, 2019, 12:34 PM IST
इन 10 जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है देश पर
इंटरनेशनल ट्रैवल बढ़ने की वजह से इन खतरनाक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है (प्रतीकात्मक फोटो)
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Updated: August 14, 2019, 12:34 PM IST
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) की मानें तो देश पर 10 जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है. इसमें इबोला, यलो फीवर और बर्ड फ्लू (H7N9) शामिल हैं. खासकर इंटरनेशनल ट्रैवल बढ़ने की वजह से इन खतरनाक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है.

अफ्रीका में हजारों लोगों के मौत की वजह बनी इबोला बीमारी भारत में भी पैर पसार सकती है. हाल ही में Indian Journal of Medical Research (IJMR) में एक आर्टिकल में भारत पर मंडराते 10 बड़े वाइरल इंफेक्शन का लेखा-जोखा दिया गया. रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि देश का हेल्थकेयर सिस्टम जिस तरह से काम करता है, उसमें संक्रामक बीमारियों के तेजी से फैलने का खतरा दोगुना होता है. ये खतरा और भी ज्यादा इसलिए है क्योंकि यहां एक बड़ी आबादी कुपोषित है और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जागरुकता भी नहीं के बराबर है.

इनका है डर
इबोला (Ebola), मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS-CoV), एवियन/बर्ड फ्लू (H7N9), एवियन फ्लू (H9N2), उसुतु वाइरस (Usutu virus), यलो फीवर वाइरस (yellow fever virus), टाइलोपिया वाइरस (Tilapia novel orthomyxo-like virus), साइक्लोवाइरस (Cyclovirus), बेनारियो वाइरस (Banna Reo virus)और कनीन पेर्वोवाइरस (Canine parvovirus).

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार ICMR के डायरेक्टर जनरल डॉ बलराम भार्गव ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी. चूंकि पिछले कुछ वक्त में इंटरनेशनल ट्रैवल बढ़ा है, लिहाजा इसके साथ-साथ दूसरे देशों में होने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. युगांडा में लगभग 30 हजार भारतीय रह रहे हैं, जहां इबोला पर अलर्ट जारी हुआ है. कांगो में भी कमोबेश यही हाल है. ऐसे में वाइरस से फैलने वाली बीमारी तेजी से सबको चपेट में ले रही है. खासकर इबोला का खतरा ज्यादा है.

जानलेवा हैं ये बीमारियां
10 बीमारियों में एक बीमारी जिसका खतरा सबसे ज्यादा है वो है इबोला. यह अति संक्रामक बीमारियों में शामिल है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, फ्रूट बैट यानी चमगादड़ इबोला वायरस का प्राथमिक स्रोत है. इसमें शरीर से निकलने वाले किसी भी तरह के फ्लूइड जैसे कि पसीना, लार या पेशाब से संक्रमण एक से दूसरे तक पहुंचता है.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार पहले इसे रक्तस्त्रावी बुखार के तौर पर जाना जाता था, जिसमें शरीर के भीतर रक्तस्त्राव होने लगता है. कोशिकाओं से साइटोकाइन प्रोटीन बाहर आने लगता है. कोशिकाएं नसों को छोड़ने लगती हैं और उससे खून आने लगता है. लगभग 80 प्रतिशत मामलों में मरीज की मौत हो जाती है. इसके टीके बनाए जा रहे हैं लेकिन अब तक पूरी सफलता नहीं मिली है. इसके लिए रक्त, इम्यूनोलॉजी और ड्रग थेरेपी की एक श्रृंखला विकसित की जा रही है.

इबोला वायरस का पता पहली बार 1976 में दक्षिण सूडान और कांगो में चला था. उसके बाद ये बीमारी कई बार सामने आ चुकी है. लेकिन जानकारों का कहना है कि इस बार का इबोला संक्रमण सबसे खतरनाक है. साल 1976 में अफ्रीका में पहली बार इबोला संक्रमण का पता चला था. सूडान के मुजिारा और कांगो का इबोलागिनी में एक साथ इबोला संक्रमण फैला था. कांगो की ही इबोला नदी के नाम पर इस वायरस का नाम इबोला पड़ गया. तब से अब तक अफ्रीका में 15 बार इबोला संक्रमण फैल चुका है.

बीमारी के लक्षण
इबोला के संक्रमण से मरीज के जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है. त्वचा पीली पड़ जाती है. बाल झड़ने लगते हैं. तेज रोशनी से आंखों पर असर पड़ता है. पीड़ित मरीज बहुत अधिक रोशनी बर्दाश्त नहीं कर पाता. आंखों से पानी आने लगता है. तेज बुखार आता है. साथ ही कॉलेरा, डायरिया और टायफॉयड जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. संक्रमित मरीज को आइसोलेशन में रखकर इलाज होता है. कोशिश की जाती है कि उसके शरीर में पानी की कमी न हो और ब्लडप्रेशर सामान्य रहे.

मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम हवा से फैलने वाली बीमारी है. यह 26 देशों को अपनी चपेट में ले चुकी है. हालांकि भारत में अबतक इसका एक भी मामला सामने नहीं आया है.

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First published: August 14, 2019, 12:34 PM IST
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