ऑस्ट्रेलिया में मिला 10 करोड़ साल पुराना उल्कापिंड क्रेटर, जानें इसकी खासियत

ऑस्ट्रेलिया में मिला 10 करोड़ साल पुराना उल्कापिंड क्रेटर, जानें इसकी खासियत
पश्चिम ऑस्ट्रेलिया (Western Austrlaia) में इस बार दूसरा उल्कापिंड (meteorite) क्रेटर (Crater) खोजा गया है. (तस्वीर: Pixabay)

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया (Western Australia) में एक 10 करोड़ साल पुराना उल्कापिंड (Meteorite) क्रेटर (Crater) मिला है जो अब तक के सबसे बड़े उल्कापिंड क्रेटरों में से एक है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 1:05 PM IST
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पृथ्वी (Earth) से उल्कापिंड (Meteorite) टकराने का बहुत पुराना इतिहास है.  कहा जाता है कि एक समय था जब पृथ्वी पर जीवन आने से पहले ही उल्कापिंडों की पृथ्वी पर बारिश सी हुआ करती थी. वहीं एक मतानुसार पृथ्वी पर जीवन उल्कापिंडों से ही आया था. हाल ही में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया (Western Australia) में एक 10 करोड़ साल पुराना उल्कापिंड क्रेटर (Crater) पाया गया है.

कैसे पता चला इस क्रेटर का
इस क्रेटर के बारे में तब पता चला जब एक उत्खनन (Mining) करने वाली कंपनी सोना (Gold) खोजने के लिए खुदाई कर रही थी. विशेषज्ञों ने इस क्रेटर को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्वे (Electromagnetic Survey) के दौरान खोजा था. यह क्रेटर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में कालगूरली बोउल्डर के उत्तरी पश्चिमी इलाके के ओरा बांडा शहर की गोल्डफील्ड खदानों क पास स्थित है.

कितना बड़ा है ये क्रेटर
इस क्रेटर का व्यास 5 किलोमीटर है. इस क्रेटर के बारे में अनुमान लगाया गया है कि यह दुनिया के मशहूर वोल्फ क्रीक क्रेटर से 5 गुना बड़ा है जो किंबरले में स्थित है. 5 किलोमीटर चौड़े इस क्रेटर को दुनिया के सबसे विशाल उल्कापिंड क्रेटरों में से एक माना जा रहा है.



सपाट जमीन के नीचे मिला यह क्रेटर
जियोलॉजिस्ट और जियोफिजिसिस्ट डॉ जेसन मेयर्स ने का कि यह एक शानदार खोज थी जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कहा, “यह खोज उस इलाके में हुई हैं जहां का भूभाग बहुत सपाट है. आप नहीं जान पाते कि वह वहां था क्योंकि क्रेटर इतने लंबे समय में पूरी तरह से भर गया था.”

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माना जाता है कि उल्कापिंड (Meteorite) के जरिए जीवन (Life) पृथ्वी पर आया था इसका पता उनसे बने क्रेटर्स (Craters) से पता चल सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


और भी मिल सकते हैं इस तरह के क्रेटर्स
मेयर्स का मानना है कि उनकी इस सफलता के बाद उम्मीद है कि इस तरह की और खोजें हो सकेंगी. उन्होंने कहा, “हो सकता है कि वहां ऐसे ही कुछ और भी क्रेटर हों. हमारे ग्रह पर जितना हम सोचते हैं शायद उससे कही ज्यादा क्षुद्रग्रह टकराए हों. अगर हमने इस तरह के और पहचान लिए , तो भूभाग बदल जाएगा और हमें खुद से सवाल करने होंगे कि इनकी आने की दर क्या थी और ऐसा क्यों हो रहा है.”

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यह मदद मिलेगी ऐसी खोजों से
मेयर्स का मानना है कि इस तरह की और खोजों से वैज्ञानिकों को यह अनुमान लगाने में ज्यादा मदद मिल सकेगी कि अगली बार पृथ्वी से कोई उल्कापिंड कब टकराएगा. उन्होंने कहा, “यदि हम इसका भूगर्भीय इतिहास को समझ सकें तो हमा इस बाद का अनुमान लगा सकते हैं कि इस तरह की अगली घटना कब होगी या अगली बार क्षुद्रग्रह को पृथ्वी से कब टकराएगा.”

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आमतौर पर क्रेटर (Crater) सपाट मैदानों (Planes) पर नहीं होते, लेकिन यहां ऐसा ही हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


दुनिया का सबसे पुराना क्रेटर भी
इससे पहले इसी साल वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे पराने उल्कापिंड क्रेटर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ही खोजा था. इस क्रेटर का नाम याराबुबा क्रेटर है. माना जा रहा है कि यह 2.23 अरब साल पुराना था.

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इस तरह क्रेटर्स बहुत ही अहम जानकारी रखते हैं. इनसे पता चलता है कि उस समय जब ये पृथ्वी से टकराए थे, तब ये किस तरह के पदार्थ पृथ्वी पर लाए थे. बहुत सी उल्कापिंड के अध्ययन से यह पता चला है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरूआत करने वाले खनिज और पदार्थ जैसे कि अमीनो एसिड्स उल्कापिंडों से ही पृथ्वी पर आए थे. इसी आधार पर कई वैज्ञानिक यह मानते हैं पृथ्वी जीवन की शुरुआत करने का श्रेय इसी तरह के उल्कापिंडों के पृथ्वी के टकराने की घटनाओं को जाता है.
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