11 अगस्त 1947 : जिन्ना बने पाकिस्तान के राष्ट्रपति, रेलवे स्टेशनों पर खचाखच भीड़

11 अगस्त 1947 : जिन्ना बने पाकिस्तान के राष्ट्रपति, रेलवे स्टेशनों पर खचाखच भीड़
रेलवे स्टेशनों पर हजारों लोगों की खचाखच भीड़ रेलवे स्टेशनों पर पहुंच रही थी. ताकि वो दूसरे मुल्क में जा सकें.

आजादी से ठीक तीन दिन पहले पाकिस्तान ने अपना पहला राष्ट्रपति चुन लिया था. साथ ही उन्हें मिल गया था अपना नया नेशनल फ्लैग भी. भारत में रेलवे स्टेशनों पर खचाखच भीड़ थी. पाकिस्तान जाने वाले लोगों की हुजूम वहां इकट्ठा था. मणिपुर का विलय भारत में हो गया

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  • Last Updated: August 11, 2020, 10:23 AM IST
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आजादी से ठीक 03 पहले मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान का निर्विरोध राष्ट्रपति चुना गया. जिन्ना ने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू और मुस्लिम सभी के बराबर अधिकार हैं. आप स्वतंत्र हैं कि मंदिर जाइए या मस्जिद. हालांकि कुछ समय बाद ही पाकिस्तान कट्टर मजहबी देश बन गया. आज ही के दिन पाकिस्तान को अपना झंडा मिला.

कराची में संविधान सभा की बैठक में जिन्ना को निर्विरोध राष्ट्रपति चुन लिया गया. इसके बाद जिन्ना ने भाषण दिया कि पाकिस्तान में आप स्वतंत्र हैं. चाहें मंदिर जाएं या मस्जिद. सबके लिए समान नागरिक अधिकार का सिद्धांत है. पाकिस्तान में कुछ दिनों बाद आप देखेंगे कि यहां मुसलमान, मुसलमान नहीं होंगे और हिन्दू, हिन्दू नहीं होंगे-सब एक देश के नागरिक होंगे.

हालांकि उनके इस भाषण से ये सवाल जरूर उठता है कि अगर उनके ख्यालात ऐसे थे तो उनको मजहब के नाम पर अलग देश बनाने की जरूरत क्यों पड़ गयी.



11 अगस्त 1947 को पाकिस्तान संविधान सभा की मीटिंग में मोहम्मद अली जिन्ना निर्विरोध राष्ट्पति चुने गए

बाराबंकी के शख्स ने बनाया पाकिस्तान का झंडा
पाकिस्तान ने आज ही अपने नेशनल फ्लैग को फहराया. इसका डिजाइन अमीरुद्दीन किदवई ने किया था. 14अगस्त को पाकिस्तान के आजादी वाले दिन इसी को फहराया जाना था. किदवई उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में पैदा हुए थे.

इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई की थी. उनका सियासी जीवन खिलाफत आंदोलन में एक एक्टिविस्ट के तौर पर शुरू हुआ था. 1947 में वो यहां से लाहौर चले गए. वहीं उन्होंने वकालत की.

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गांधीजी कलकत्ता में ही रुके
गांधी जी दंगों में जल रहे नोआखली जाने वाले थे. जब सुहरावर्दी को पता चला तो वह कराची से सीधे कलकत्ता पहुंचे. गांधी जी से मिले. उनसे कलकत्ता में ही रुकने का अनुरोध किया. उन्होंने गांधी जी से कहा कि नोआखली में अब शांति हो जाएगी-इसके लिए वह भरपूर कोशिश करेंगे.

श्रीनगर में कश्मीर के प्रधानमंत्री का इस्तीफा
श्रीनगर में रामचंद्र काक ने महाराजा हरि सिंह से मतभेदों के कारण प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनकी जगह मेजर जनरल जनक सिंह को अस्थाई रूप से प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई.

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों की हजारों की भीड़ 
पंजाब में समस्या और जटिल होती जा रही थी. जमकर पलायन हो रहा था और जबदस्त कत्लेआम. देशभर के सभी स्टेशनों पर जमकर भीड़ थी. नई दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा थी. कहीं पैर रखने की भी जगह नहीं थी. इस दौरान कई स्पेशल ट्रेनें चलाईं गईं थीं. केवल भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के बड़े रेलवे स्टेशनों में भी भारत आने वालों की भारी भीड़ हो रही थी.

मणिपुर का विलय 
मणिपुर ने भारत में विलय का फैसला किया. उनके महाराजा बुद्धचंद्र ने विलय पत्र पर साइन किए. हालांकि उनके ही राज्य के बहुत से लोग इसके खिलाफ थे. उन्हें लगता था कि ये विलय स्थायी नहीं होगा.
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