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जानिए कैसे 12 अरब साल पुराने संकेत से पता लगी डार्क युग की रोचक कहानी

ब्रह्माण्ड की एक सार्वभौमिक घड़ी बनाने की कोशिश की गई है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ब्रह्माण्ड की एक सार्वभौमिक घड़ी बनाने की कोशिश की गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने 12 अरब साल पुराना एक दुर्लभ रेडियो संकेत (Radio singnal) पकड़ा है, जो ब्रह्माण्ड (Universe) के डार्क युग (Dark Age) के कई रहस्य खोल सकता है.

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नई दिल्ली: आज आकाश में हमें जो तारे दिखाई देते हैं उनमें से बहुत से करोड़ो साल बाद हमें दिखाई दे रहे हैं क्योंकि उनकी रोशनी हम तक पहुंचने में इतना ही समय लगा है. एक समय था जब आकाश में कोई तारा नहीं दिखाई देता. तब कोई तारा नहीं था. लकिन वैज्ञानिकों की एक इंटरनेशनल टीम ने उन संकेतों को पकड़ने, छांटने और अध्ययन करने का दावा किया है जो उसी समय के हैं जब बिना तारों का युग (Starless Era) ब्रह्माण्ड (Universe) में खत्म ही हुआ था.

13 अरब साल पुरानी बात है यह
बिना तारों का यह दौर ब्रह्माण्ड में करीब 13 अरब साल पहले खत्म हुआ था. इस टीम में वॉशिंगटन, कुर्टुन, मेलबर्न, ब्राउन और यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक शामिल थे. एस्ट्रोफिजिकल जर्नल  प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने रेडियो उत्सर्जन (Radio Emmision) के आंकड़ों को 10 गुना ज्यादा शुद्ध करने में सफलता पाई है जो मर्चीसन वाइडफील्ड ऐरे टेलीस्कोप से जमा किए गए थे. फिलहाल शोधकर्ता इन आंकड़ों से जानाकरियां हासिल करने में लगे हैं.

क्यों खास है वह युग
इस अध्ययन से वैज्ञानिकों को उस दौर के बारे में तो कई जानकारी तो मिलेगी ही, उन्हें आज के ब्रह्माण्ड के बारे में भी कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है. इस दल के सदस्य प्रोफेसर मिगेल मोरालेस ने कहा, “हमें लगता है कि उस दौर में ब्रह्माण्ड के कई गुणों का तारों के निर्माण पर असर हुआ था और उसी के आधार पर हमारे आज के ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ था. उस काल में जिस तरह से पदार्थ का वितरण हुआ था, शायद उसी ने आज के हमारे ब्रह्माण्ड में पदार्थ के वितरण में भूमिका निभाई होगी.

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एक समय ऐसा भी था कि अंतरिक्ष में एक भी तारा नहीं था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे बना यह डार्क युग
इस डार्क युग से पहले ब्रह्माण्ड गर्म और सघन था इलेक्ट्रॉन और फोटोन एक दूसरे से जकड़े रहा करते थे जिसकी वजह से ब्रह्माण्ड अपारदर्शी हो गया था. लेकिन जब ब्रह्माण्ड लगभग 10 लाख साल का हो गया होगा, इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन के बीत अंतरक्रियाएं बहुत कम हो गई होंगीं. ब्रह्माण्ड के फैलने से उसकी पारदर्शिता बढ़ती चली गई और वह काला होता गया जिससे डार्क युग की शुरुआत हुई.

न्यूट्रल हाइड्रोडन की भूमिका
यह बिना तारों का युग कुछ करोड़ साल तक चला जिसके दौरन न्यूट्रल हाइड्रोडन यानि बिना किसी आवेश वाला हाइड्रोजन ब्रह्माण्ड में हावी हो गया. मिगेल का कहना है, “ इस दौर के बारे में हमारे पास किसी तरह के प्रकाश के संकेत नहीं हैं क्योंकि उस काल में कोई प्रकाश था ही नहीं.  लेकिन हमें न्यूट्रल हाइड्रोजन से खास तरह के संकेत मिले हैं. हमने कभी इन संकेतों का नहीं नापा लेकिन हम जानते हैं कि वे हैं. लेकिन इन संकेतों को पकड़ना आसान नहीं हैं क्योंकि जब वे पैदा हुए हैं तब से हमारा ब्रह्माण्ड बहुत व्यस्त जगह बन गया है और तारों, गैलेक्सी और यहां तक कि हमारी तकनीक तक ने इन संकेतों को खराब कर दिया है.

क्या हैं न्यूट्रल हाइड्रोडन के ये संकेत
न्यूट्रल हाइड्रोजन के ये संकेत वास्तव में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियो उत्सर्जन हैं और इनकी वेवलेथ 21 सेंटीमीटर है. तब से ब्रह्माण्ड के फैलने के कारण ये संकेत दो मीटर तक खिंच गए हैं. मिगेल का मानना है कि इन संकेतों से डार्क युग और उसकी घटनाओं के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है.

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इन संकेतों से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के बारे में भी जानकारी मिल सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे हुआ इस युग का अंत
जब ब्रह्माण्ड एक अरब साल का हुआ था, तब हाइड्रोजन परमाणु एक जगह जमा होने लगे थे और उससे एक तारा बना  जिससे डार्क युग का अंत हुआ. इसी तारे से निकली रोशनी से डार्क युग का अंत हुआ और नए युग की शुरुआत हुई जिसे एपोक ऑफ रीआयोनाइजेशन (Epoch of Reionization) कहा जाता है जहां प्लाज्मा बनन शुरू हुए जो आज हमारे अंतरिक्ष में हावी हैं.

इस दौर के बारे में जानने से हमें ब्रह्माण्ड के कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए वैज्ञानिकों को न्यूट्रल हाइड्रोजन के संकेतों को दूसरे संकेतों से अलग करना होगा जिनमें से कई संकेत हमारी मानवीय गतिविधियों के कारण पैदा हुए हैं. मिगेल और उनके साथियों के पास तीन हजार घंटों के आंकड़े हैं जिनमें से उन्हें संकेत छांटने का काम करना है.

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