जानिए कितना खास है भारत में पाया गया 1.3 करोड़ साल पुराना जीवाश्म

जानिए कितना खास है भारत में पाया गया 1.3 करोड़ साल पुराना जीवाश्म
उत्तर भारत में चार साल पहले पाया गया 1.3 करोड़ साल पुराना जीवाश्म (Fossil) गिब्बन (Gibbon) वानर की एक पूर्वज (Ancestor) प्रजाति का है. (तस्वीर: Pixabay)

भारत (India) में उत्तराखंड (Uttarakhand) के रामनगर (Ramnagar) इलाके में 1.3 करोड़ पुराना जीवाश्म (Fossil) पाया गया था जो कि वानरों (Ape) का सबसे पुराना ज्ञात जीवाश्म है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 5:08 PM IST
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जीवाश्म (Fossil) दुनिया में हर जगह पाए जाते हैं, लेकिन कहीं कम तो कहीं ज्यादा. भारत में जीवाश्म तो मिलते हैं लेकिन बहुत ही कम. पांच साल पहले एक जीवाश्म (Fossil) भारत (India) में मिला था जिसका अध्ययन करने से पता चला है कि यह आधुनिक वानर (Ape) का सबसे पुराना ज्ञात पूर्वज (Ancestor) है.

किस प्रजाति का है ये जीवाश्म
जीवाश्म विज्ञानी क्रिस्टोफर गिलबर्ट और उनकी टीम का खोजा गया यह जीवाश्म 1.3 करोड़ साल पुराना है. यह जीवाश्म आधुनिक गिब्बन की अब तक अज्ञात पूर्वज प्रजाति का है जिसका नाम कापी रैमनागैरेन्सिस (Kapi ramnagarensis) है.

जीवाश्म रिकॉर्ड के गैप की भरपाई
इस खोज को न्यू मिडिल मियोसीन एप (प्राइमेट: हाइलोबेटिडाए) फ्रॉम रामनगर नाम से प्रीसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी जर्नल में प्रकाशित किया गया है. माना जा रहा है कि यह जीवाश्म होमोनाइड जीवाश्मों के रिकॉर्ड में एक बड़े खाली स्थान की पूर्ति कर रहा है.



कैसे मिला यह जीवाश्म
गिल्बर्ट और उनकी टीम जब उत्तरी भारत में कुछ प्राइमेट जीवाश्मों की खोज कर रहे थे तब उन्होंने धूल में से कुछ बहुत ही छोटा और चमकीली सी चीज बाहर निकली देखी. उन्होंने बताया, “हम तुरंत समझ गए थे कि यह एक प्राइमेट का दांत हैं. लेकिन वह इस इलाके में इससे पहले पाए गए किसी भी प्राइमेट के दांत से मेल नहीं खा रहा था.”

Fossil
वैज्ञानिकों को जीवाश्म (Fossil) आसानी से नहीं मिलते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


नहीं मेल खाया किसी का रिकॉर्ड
अपने अवलोकन में दांत के आकार को देखते हुए, टीम ने पहले सोचा कि यह गिब्बन के पूर्वज का जीवाश्म होना चाहिए. लेकिन कुछ संदेहों ने इस तथ्य की ओर इशारा किया कि इस बहुत कम पाए जाने वाले वानर का जीवाश्म रिकॉर्ड ही नहीं हैं. यह जीवाश्म साल 2015 में पाया गया था. यह दांत एक अलग ही प्रजाति के वानर का है इसकी पुष्टि के लिए गिलबर्ट की टीम ने उसकी तुलना आज के जीवित और विलुप्त हो चुके वानरों प्रजातियों से की.

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एक विशेष खोज है यह
इस शोध का हिस्सा रहीं ऐलेजेंड्रा ओर्टिज ने बताया, “जो हमने पाया वह निश्चित तौर पर यही संकेत कर रहा था कि यह 1.3 करोड़ साल पुराने गिब्बन का दांत हैं.“ ओर्टिज कहती हैं कि यह एक विशेष खोज है. इस खोज से प्राणियों के उद्भव के इतिहास के बारे में और ज्यादा जानकारी मिलेगी. यह भारत में जीवाश्म के लिए मश्हूर रामनगर इलाके में करीब 100 साल बाद पाया गया नया जीवाश्म है. इससे आज के गिब्बन के पूर्वजों के अफ्रीका से एशिया में आने के भी अहम प्रमाण मिलते हैं.

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भारत में सबसे किसी वानर (Ape) प्रजाति (Species) का इतना पुराना जीवाश्म (Fossil) मिलना अनोखी बात है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


नए तथ्यों ने बढ़ाया रोमांच
जीवाश्म की खोज कर रही टीम में शामिल क्रिस कैम्पिसानो ने कहा, “मैंने इस इस इलाके का जैवभौगोलिक हिस्सा बहुत ही दिलचस्प पाया है. आज गिब्बन और ओरेंगउटैन दोनों ही दक्षिण पूर्व एशिया के सुमात्रा और बोर्नेओ में पाए जाते हैं और वानरों के सबसे पुराने जीवाश्म अफ्रीका में पाए गए हैं, लेकिन गिब्बन और ओरेंगउटैन के पूर्वजों का एक ही जगह पर उत्तरी भारत में 1.3 करोड़ साल पहले एक साथ पाया जाना बहुत ही रोचक है. दोनों का ही अफ्रीका से एशिया आने का एक ही इतिहास हो सकता है.”

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अब शोधकर्ताओं की टीम इस बात की योजना बना रही है कि रामनगर में वह और शोध जारी रखेगी.  उन्होंने हाल ही में नेशनल साइंस फाउंडेशन से  वानरों के जीवाश्मों की खोज जारी रखने के लिए अनुदान भी मिला है.
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