कौन हैं CCD के मालिक वीजी सिद्धार्थ? आखिर क्यों अचानक गायब हो गए?

सिद्धार्थ को उनके परिचित वर्कोहॉलिक मानते थे. वो कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के दामाद थे. जिसके अंदर गजब की उद्यमशीलता के गुण थे

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 3:33 PM IST
कौन हैं CCD के मालिक वीजी सिद्धार्थ? आखिर क्यों अचानक गायब हो गए?
वीजी सिद्धार्थ
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Updated: July 31, 2019, 3:33 PM IST
सोमवार बेंगलुरु से करीब 350 किलोमीटर दूर मंगलूर की नेत्रवती नदी के पास लापता हुए वीजी सिद्धार्थ देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं. वो ऐसे शख्स थे, जिन्हें फोर्ब्स मैगजीन ने देश में नए तरह के बिजनेस टायकून के रूप में शुमार किया था. वो कर्नाटक में ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो कई पीढ़ियों से बेहद अमीर और रसूख वाला है. वो अपने पीछे एक खत छोड़ गए हैैं, जिसमें उन्होंने लिखा है कि वो खुदकुशी कर रहे हैं, क्योंकि बिजनेस में नाकाम हो गए हैं. हालांकि इस वजह को लोग हैरानी से भी देख रहे हैं.

कैफे कॉफी डे के मालिक और कई कंपनियों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल सिद्धार्थ के बारे में खास बातें...

1- कर्नाटक के चिक्कमंगलुरु में खासे धनी परिवार में पैदा हुए. उनका परिवार खासे बड़े कॉफी प्लांटेशन एस्टेट का मालिक है. ये पारिवारिक कारोबार 140 साल पुराना है.

2- उनके परिवार के पास 350 एकड़ का काफी एस्टेट है. अगर वो चाहते तो आराम से जिंदगी जी सकते थे. लेकिन उन्होंने पारिवारिक बिजनेस के साथ जाने की बजाय महत्वाकांक्षाओं का रास्ता चुना.

सिद्धार्थ कर्नाटक के धनी परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनका परिवार 140 सालों से काफी प्लांटेशन के कारोबार में है


3- सिद्धार्थ मंगलूर यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स थे. करियर की शुरुआत में ही वो शेयर मार्केट के बिजनेस से जुड़ गए थे.1983 से दो साल तक उन्होंने जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड मुंबई में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप काम किया. यहां उनका मुख्य तौर पर उस डिविजन से ताल्लुक रखने वाला था, जो शेयर बाजार के साथ पोर्टफोलिया मैनेजमेंट और सेक्यूरिटीज से जुड़ा हुआ था. तब वो केवल 24 साल के थे.


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4- दो साल बाद वो वापस बेंगलुरु लौटे. उनके पिता ने उन्हें अपनी पसंद का बिजनेस करने के लिए पांच लाख रुपये दिये. शर्त ये थी कि अगर उनका बिजनेस सफल नहीं हुआ तो वो पारिवारिक बिजनेस में लौट आएंगे. उन्होंने इसमें तीन लाख रुपये से एक जमीन खरीदी और दो लाख रुपये अपने सेक्युरिटी के बिजनेस में लगाकर काम शुरू किया. इसमें उन्होंने दो लाख रुपये वो भी जोड़े, जो नौकरी के दौरान बचाए थे.

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5- तब उन्होंने शिवन सेक्युरिटीज शुरू की. वर्ष 2000 में इसका नाम बदलकर वेटूवेल्थ सेक्युरिटीज लिमिटेड कर दिया गया. बाद में इसकी वेंचर कैपिटल डिविजन की शुरुआत ग्लोबल टेक्नॉलॉजी वेंचर के नाम से हुई.

सिद्धार्थ ने 1996 में बेंगलुरु के भीड़भाड़ वाले इलाके में पहला कैफे कॉफी डे खोला, इसके बाद उसका तेजी से विस्तार किया.


6- 1985 तक वो स्टाक मार्केट में फुल टाइम इनवेस्टर हो गए. उन्होंने दस हजार एकड़ के कॉफी फॉर्म खरीदे. जब 90 के दशक में कॉफी के बिजनेस में उदारीकरण की बहार आई, तो उन्होंने प्लांटेशन के जरिए एक साल में ही अपना पैसा दोगुना कर डाला. इसके चलते उन्होंने एक और कंपनी अमलगेमेटेड बीन्स कॉफी ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड बनाई. 1993 में बनी ये कंपनी कॉफी एक्सपोर्ट पर फोकस करने के लिए बनाई गई थी. इस समय उनके कॉफी प्लांटेशन से 3000 टन कॉफी का उत्पादन होने लगा था. वहीं उनकी कॉफी ट्रेडिंग कंपनी 20 हजार टन का व्यापार कर रही थी. दो साल में ही ये कंपनी देश की दूसरी बड़ी काफी निर्यातक कंपनी बन गई.

7- 1996 में सिद्धार्थ ने पहला कैफे कॉफी डे स्टोर बेंगलुरु के भीड़भाड़ वाले इलाके ब्रिगेड रोड पर खोला. जहां एक कॉफी और एक घंटे की इंटरनेट सर्फिंग की कीमत 100 रुपये थी. ये वो दौर था जब बेंगलुरु बदल रहा था और आईटी हब में तब्दील होने के साथ शहर की लाइफस्टाइल बदलने लगी थी. इसके बाद सिद्धार्थ और उनकी टीम ने इसका जबरदस्त विस्तार किया. ये देश की सबसे बड़ी कॉफी रेस्तरा चेन बन गई. साथ ही साथ ये कॉफी डे ग्लोबल और उसकी सब्सिडिरी कॉफी डे एंटरप्राइजेज की भी मालिक थी.

इस समय देश-विदेश में कैफे कॉफी डे के 1700 से ज्यादा कैफे सेंटर हैं


8- आज कैफ कॉफी डे के 1700 कैफे, 48000 के आसपास वेंडिंग मशीनें, 532 कियोस्क और 403 ग्राउंड कॉफी सेलिंग आउटलेट्स हैं.

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9- वीजी सिद्धार्थ के पास अपने 12000 एकड़ कॉफी प्लांटेशन के बागान हैं. 2015 में फोर्ब्स लिस्ट में उनकी नेट वर्थ 1.2 बिलियन यानी 8200 करोड़ आंकी गई थी.

10- ये माना जा रहा था कि कोका-कोला के साथ कैफे कॉफी डे की बड़ी हिस्सेदारी बेचने की बात हो रही थी. कैफे कॉफी डे को उम्मीद थी कि कोका कोला को बड़ी हिस्सेदारी बेचने से उसे 8000 से 10000 करोड़ रुपये तक मिल सकेंगे.

11- सिद्धार्थ के पास कई और कंपनियों के भी शेयर थे. कई कंपनियों में0 वो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में थे, जिसमें जीटीवी, माइंडट्री, लिक्विड क्रिस्टल, वेटूवेल्थ और इत्तियम शामिल हैं. लार्सन एंड टूब्रो ने हाल ही में वीजी सिद्धार्थ के कैफे कॉफी डे और टेक कंपनी माइंडट्री के 20 फीसदी शेयर 3210 करोड़ में खरीदे थे.

12- वी सिद्धार्थ को द इकोनॉमिक टाइम्स ने 2002-03 को एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर घोषित किया था, क्योंकि उन्होंने एक कमोडिटी बिजनेस को सफलता के साथ पैन-इंडियन ब्रांड में तब्दील कर दिया

वीजी सिद्धार्थ का वो लेटर, जो उन्होंने गायब होने से पहले लिखा था


13- वर्ष 2017 में उनके कई आफिसों और परिसरों पर इनकम टैक्स के छापे पड़े. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना था कि उन्हें ऐसे दस्तावेज इन जगहों से मिले, जिससे जाहिर हुआ कि 650 करोड़ के हिसाब-किताब कंपनी जाहिर नहीं किया है. इन छापों और इनके नतीजों ने सिद्धार्थ को परेशान कर दिया. उन पर प्राइवेट शेयरधारकों के दबाव पड़ने लगा. इसी दौरान उन्होंने अपने एक दोस्त से मोटा धन उधार लिया.

14 - एमएम कृष्णा उनके ससुर थे, लिहाजा ये भी हैरानी की बात लगती है कि क्यों उन्होंने अपने ससुर के रसूख का इस्तेमाल नहीं करके कथित तौर पर पत्र लिखकर खुदकुशी का रास्ता चुना. कर्नाटक में कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को लगता है कि कहीं ना कहीं कुछ गड़बड़ है. उन्हें खुदकुशी लेटर में कुछ संदिग्ध बात नजर आती है.

15- सिद्धार्थ के बारे में कहा जाता है कि वो जन्मजात उद्यमशीलता की खासियतों से युक्त थे. हर हालात में अच्छी डील कर लेने का उनमें माद्दा बताया जाता है. वो हमेशा लगे रहने, तुरंत फैसला लेने वाले लोगों में जाने जाते हैं. उनके परिचित उन्हें वर्कोहॉलिक कहते हैं, जो हफ्ते में लगातार 12-14 घंटे काम में जुटा रहता था.

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First published: July 30, 2019, 4:05 PM IST
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