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1967 आम चुनाव: वो आखिरी चुनाव जब लोकसभा और विधानसभा साथ लड़े गए

1967 के चुनाव प्रचार में इंदिरा गांधी
1967 के चुनाव प्रचार में इंदिरा गांधी

इन चुनावों में न सिर्फ कांग्रेस कमजोर पड़ गई थी बल्कि सीपीआई में भी दरार पड़ गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2019, 5:54 AM IST
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1967 के आम चुनावों में पूरे भारत से 25 दलों ने भाग लिया था. इनमें से 7 राष्ट्रीय दल थे. भारत के ये आम चुनाव 27 राज्यों की 520 सीटों पर लड़े गए थे. तब सबसे ज्यादा सीटों वाला राज्य उत्तर प्रदेश (85) और सबसे कम सीटों वाला राज्य नगालैंड (1) था. इन चुनावों की सबसे खास बात यह थी कि ये आखिरी ऐसे चुनाव थे, जिनमें राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव और लोकसभा के आम चुनाव दोनों साथ हुए थे.

इन चुनावों में कुल वोटर 25.2 करोड़ थे. जिनके वोट डालने के लिए 2 लाख, 43 हजार पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे. इन चुनावों में कुल 61.04 परसेंट मतदान हुआ था. 1967 के आम चुनावों में 520 सीटों पर कुल 2,369 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़े थे.

सशक्त लीडरशिप के अभाव में कमजोर हो गई थी कांग्रेस
फरवरी, 1967 में हुए इन चुनावों में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. इसका कारण था कि पिछले चुनावों में कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी उतनी मजबूती से शासन नहीं चला सकी थी. साथ ही कांग्रेस की टॉप लीडरशिप में भी बहुत असंतोष था. इस गैप को भरने के लिए अंदर के ही कई नेता उठ खड़े हुए थे और पार्टी के अंदर ही विद्रोह कर दिया था.
सीपीआई में भी आ गई थी दरार


1962 में कांग्रेस ने 361 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार उसे मात्र 283 सीटें ही मिल सकीं. पिछली बार के 45 परसेंट वोटों के मुकाबले इस बार कांग्रेस को मात्र 41 परसेंट वोट मिले थे. वोट प्रतिशत के मामले में स्वतंत्र पार्टी चौथे नंबर पर थी. उसने पिछले चुनावों में मात्र 18 सीटें जीती थी, इस चुनाव में उसे 42 सीटें मिलीं. वोट प्रतिशत के मामले में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी जनसंघ रही. उसने 35 सीटें जीतीं. CPI के दो भागों में बंटने से पार्टी को बहुत नुकसान हुआ था. वरना इसके दोनों धड़ों की सीटें मिलाकर 44 सीटें और वोट परसेंट दूसरे नंबर पर 9.39 परसेंट होता.

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