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1967 आम चुनाव: इसके बाद 'गूंगी गुड़िया' इंदिरा को कहा जाने लगा भारत का अकेला 'मर्द'

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस का एक पोस्टर
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस का एक पोस्टर

पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, उड़ीसा (अब ओडिशा), मद्रास- इन 8 राज्यों में कांग्रेस बहुमत खो चुकी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 4, 2019, 12:12 PM IST
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1967 का चुनाव जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव था. कांग्रेस के खिलाफ विरोध इतना ज़्यादा था कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी नहीं छोड़ा गया. इंदिरा गांधी के खिलाफ बाहर के अलावा पार्टी के अंदर भी विरोध के स्वर उठ रहे थे. 1967 के चुनावी नतीजों में बहुमत खोने के बाद इंदिरा गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल उठे. लोगों का गुस्सा चुनावी नतीजों में साफ दिखा. कांग्रेस को सीटें तो मिलीं लेकिन पहले के मुकाबले उसे 78 सीटों का नुकसान हुआ. 1962 में कांग्रेस को 361 सीटें मिली थीं, जो घटकर 283 ही रह गईं. पहली बार कांग्रेस ने निचले सदन में अपना बहुमत खोया.

कांग्रेस को मिला तगड़ा झटका
पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, उड़ीसा (अब ओडिशा), मद्रास, इन 8 राज्यों में कांग्रेस बहुमत खो चुकी थी. तत्कालीन मद्रास में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी. बाकी देश भर में मिली-जुली सरकार का दौर शुरू हो गया.

1967 के आम चुनाव इंदिरा गांधी के लिए एक चुनौती थे, क्योंकि उन्हें न सिर्फ सत्ता के शिखर तक पहुंचना था, बल्कि खुद अपनी एक पहचान भी बनानी थी. पार्टी के अंदर ही लगातार कहा जा रहा था कि इंदिरा के शासन में कांग्रेस लगातार नीचे जा रही है. लेकिन इंदिरा से ज़्यादा नुकसान सिंडिकेट के नेताओं को हुआ जो इंदिरा को प्रधानमंत्री की कुर्सी से हटाना चाहते थे.
कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज को खुद चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा. सिंडिकेट कांग्रेस में ही गैर हिंदी भाषी नेताओं का रसूखदार गुट था. लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा गांधी को पीएम बनाने में इस गुट का बड़ा हाथ था, लेकिन बाद में दोनों के बीच दरार आ गई.



जब इंदिरा को कहा गया 'गूंगी गुड़िया'
कांग्रेस चुनाव जीत तो गई लेकिन अब वह पहले की तरह मजबूत पार्टी नहीं थी. चौथे लोकसभा चुनाव से पहले इंदिरा के सामने कई चुनौतियां आ खड़ी हुई थीं. एक तो देश में आर्थिक संकट था, ऊपर से विपक्ष भी उन्हें कमज़ोर समझता था. संसद में कांग्रेस की संख्या घटने के बाद समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने इंदिरा को संसद में कई बार 'गूंगी गुड़िया' कहा.

इतना ही नहीं विपक्ष ने सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त मुहिम छेड़ी हुई थी. इस चुनाव में कांग्रेस को बहुमत तो मिला लेकिन सीटें घट गईं. पहली बार मद्रास में डीएमके ने कांग्रेस का पूरा सूपड़ा ही साफ कर दिया. कांग्रेस को केरल में भी हार का मुंह देखना पड़ा. पश्चिम बंगाल में यूनाइटेड फ्रंट और लेफ्ट फ्रंट के गठबंधन ने कांग्रेस को शिकस्त दी.

1967 के चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस के मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बनना चाहते थे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं, एक समझौता फॉर्मूले के तहत उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया. इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बनीं. इसके बाद तो गूंगी गुड़िया का चित्र और किरदार ही पूरी तरह से बदल गया. गूंगी गुड़िया कैबिनेट और देश की एकमात्र मर्द के तौर पर मशहूर होना शुरू हो चुकी थी. देश की राजनीतिक तस्वीर ही बदल गई. इसके बाद पक्ष हो या विपक्ष सबकी जुबान पर इंदिरा गांधी का नाम चढ़ गया.

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