1971: इन आम चुनावों के बाद केंद्र और राज्यों के चुनाव साथ होने बंद हो गए, जानें क्यों?

इंदिरा गांधी (फाइल फोटो)

इंदिरा गांधी (फाइल फोटो)

इन चुनावों में हवाई और सड़क मार्ग दोनों को मिलाकर 33,000 मील की यात्रा की थी.

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इंदिरा गांधी की शक्तिशाली और लोकप्रिय छवि को चुनौती देने वाला इन चुनावों में कोई नहीं था और वे आसानी से 518 में से 352 सीटें जीतने में सफल रही थीं. हालांकि 1971 में उनके प्रमुख विपक्षी दलों ने गठबंधन किया था. एक क्षेत्र, एक उम्मीदवार उनका सिद्धांत था. इसमें शामिल दल थे कांग्रेस (ओ), जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी और एसएसपी. इस गठबंधन का नाम था नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएफ). इस फ्रंट के पास चौथी लोकसभा में 150 सीटें थीं. पढ़ें इस चुनाव की कुछ खास बातें -

# 1971 का पूरा चुनाव इंदिरा गांधी के इर्द-गिर्द घूम रहा था. लेकिन इंदिरा ने इसका फायदा उठाते हुए नारा गढ़ा, वे कहते हैं इंदिरा हटाओ, मैं कहती हूं गरीबी हटाओ. जिसके बाद 5वीं लोकसभा में एनडीएफ मात्र 49 सीटों पर सिमट गया.

# 1971 के आम चुनावों के प्रचार के दौरान इंदिरा गांधी ने 252 नियमित और 57 नुक्कड़ सभाओं को संबोधित किया था. उन्होंने हवाई और सड़क मार्ग दोनों को मिलाकर 33,000 मील की यात्रा की थी. एक अनुमान के अनुसार 2 करोड़ लोग उनकी रैलियों में पहुंचे थे.



# इंदिरा गांधी की नई कांग्रेस (आर) ने तमिलनाडु में डीएमके और केरल में सीपीआई के साथ गठबंधन किया था.
# पार्टी के शीर्ष नेताओं से अलग धड़ा बना चुकी और कम्युनिस्ट पार्टी के बलबूते सरकार में बनी इंदिरा गांधी ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही लोकसभा को भंग कर दिया था, जिसके चलते लोकसभा के चुनाव तय 1972 की बजाए 1971 में ही हुए और इसी के साथ लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों की तारीखें एक साथ पड़ना बंद हो गईं.

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