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1971 war: इंडियन आर्मी ने हवाई जहाज संग साइकिल का भी किया था इस्तेमाल, जानिए वजह  

1971 war: इंडियन आर्मी ने हवाई जहाज संग साइकिल का भी किया था इस्तेमाल, जानिए वजह  

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हवाई जहाज और बड़े हथियारों के साथ ही भारतीय सेना ने साइकिल का भी इस्तेमाल किया था.

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हवाई जहाज और बड़े हथियारों के साथ ही भारतीय सेना ने साइकिल का भी इस्तेमाल किया था.

कैप्टन निर्भय शर्मा ही पाक सेना (Pak Army) को सरेंडर कराने वाला एक लाइन का खत लेकन जनरल नियाजी के पास गए थे. बाद में कैप्टन शर्मा लेफ्टिनेंट जनरल की रैंक तक पहुंचे थे. रिटायर्ड होने के बाद पहले अरुणाचल (Arunachal Pradesh) और फिर मिजोरम के गर्वनर भी रहे. साथ ही यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के मेम्बर भी रहे. और सबसे अहम बात यह कि जनरल शर्मा ने कश्मीर (Kashmir) और नॉथ-ईस्ट में आतंकवाद (Terrorism) के खिलाफ बहुत काम किया. वक्त-वक्त पर उनकी बहादुरी लिए उन्हें पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम और वीएसएम अवार्ड से भी नवाज़ा गया.

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नई दिल्ली. बेशक यह सुनने और पढ़ने में अजीब लगे, लेकिन यह सच है कि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध (1971 War) में हवाई जहाज और बड़े हथियारों के साथ ही भारतीय सेना (Indian Army) ने साइकिल का भी इस्तेमाल किया था. यह साइकिल सेना अपने साथ लेकर गई थी. इस साइकिल की मदद से ही एक खास मैसेज बांग्लादेश (Bangladesh) में दूर बैठे अपने साथियों तक पहुंचाया गया था. यही वजह है कि इस लड़ाई में हथियारों के साथ ही साइिकल (Bicycle) का भी इस्तेमाल कर सेना ने यह लड़ाई जीती थी. गौरतलब रहे कि मुक्ति वाहिनी की मदद के लिए सेना बांग्लादेश में अंदर तक घुस गई थी. और लड़ाई के आखिर में भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) के 93 हजार सैनिकों का सरेंडर कराने में कामयाब हुई थी.

साइकिल पर कैप्टन निर्भय गए थे एक खास मैसेज लेकर

1971 की भारत-पाकिस्तान लड़ाई के एक और हीरो कर्नल रिटायर्ड एसएम कुंजरू बताते हैं, “हमे अचानक से आदेश मिला कि बांग्लादेश में जाकर वहां पहले से लड़ रही भारतीय सेना की मदद करनी है. 11 दिसम्बर की दोपहर 2 पैरा ग्रुप बटालियन के पैरा कमांडो हवाई जहाज से जम्प कर बांग्लादेश के अंदर ढाका से कुछ दूर पहले उतर गए.

दुश्मन के इलाके में इस तरह उतरने से पहले कई तरह की तैयारी करनी पड़ती है और बहुत सारा सामान भी साथ में ले जाना होता है. क्योंकि हम दुश्मन के इलाके में जा रहे हैं, जहां न तो कोई हमारी मदद करने वाला है और न ही वहां हम किसी को पहले से जानते हैं.

1971 War: एक लाइन के खत को पढ़कर पाक सेना किया था सरेंडर, जानिए क्या थे वो शब्द

इसीलिए पैरा कमांडो हथियारों के साथ एक ऐसी छोटी साइकिल भी लेकर जाते हैं, जो ले जाने के दौरान छोटी भी कर ली जाती है और दुश्मन के इलाके में पहुंचते ही असेंबल भी कर लेते हैं. जब हम दुश्मन के इलाके में पहुंच गए तो एक ऐसा मौका आया जब हम लोग वायरलेस भी इस्तेमाल नहीं कर सकते थे.

और एक मैसेज का फॉरवर्ड लाइन पर मौजूद हमारे ही साथियों तक पहुंचना बेहद ज़रूरी थी. तब साइकिल की मदद से कैप्टन निर्भय शर्मा मैसेज लेकर आगे तक गए. यह वो निर्भय शर्मा थे जो पाक सेना के लेफ्टीनेंट जनरल एएके नियाज़ी के नाम सरेंडर करने का खत लेकर गए थे.”

Tags: Bangladesh, Indian army, Pakistan army, War

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