लाइव टीवी

भारत की हार नहीं, कांबली के आंसुओं और आगजनी के लिए याद आता है ये वर्ल्डकप सेमीफाइनल

News18Hindi
Updated: March 13, 2020, 5:47 PM IST
भारत की हार नहीं, कांबली के आंसुओं और आगजनी के लिए याद आता है ये वर्ल्डकप सेमीफाइनल
वर्ल्‍ड कप 1996 का सेमीफाइनल मैच भारत और श्रीलंका के बीच 13 मार्च को कोलकाता के ईडन गार्डेंस स्‍टेडियम में खेला गया था. इसमें भारत की हार पर बौखलाएं दर्शकों ने खूब हंगामा किया था.

आज का इतिहास: वर्ल्‍ड कप 1996 के सेमीफाइनल मैच में भारतीय कप्‍तान मोहम्‍मद अजहरुद्दीन (Mohammad Azharuddin) ने टॉस जीता. इसके बाद भी उन्‍होंने श्रीलंका (Sri Lanka) के खिलाफ पहले गेंदबाजी का फैसला किया. इस फैसले ने सभी को चौंका दिया था. भारत बुरी तरह मैच हारने के बाद टूर्नामेंट से बाहर हो गया. इसके बाद बौखलाए दर्शकों ने कोलकाता के ईडन गार्डेंस स्‍टेडियम में आगजनी के साथ ही जमकर तोड़फोड़ की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 13, 2020, 5:47 PM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. यूं तो भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) कई बार वर्ल्‍ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचकर हारी और टूर्नामेंट से बाहर हुई है, लेकिन इंडियन क्रिकेट के इतिहास में 13 मार्च 1996 को बदनुमा दाग दे जाने वाले दिन के तौर पर हमेशा याद किया जाता रहेगा. दरअसल, क्रिकेट वर्ल्‍ड कप 1996 (World Cup 1996) में 13 मार्च को भारत और श्रीलंका (India Vs Sri Lanka) के बीच सेमीफाइनल मैच खेला गया था. इससे पहले क्‍वार्टर फाइनल में भारत ने पाकिस्‍तान (Pakistan) को हराया था. भारतीय प्रशंसकों का उत्‍साह भारत-श्रीलंका मैच को लेकर चरम पर था. कोलकाता का ईडन गार्डेंस (Eden Gardens) स्‍टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा था. हर तरफ इंडिया-इंडिया का शोर हो रहा था. भारतीय कप्‍तान मोहम्‍मद अजहरुद्दीन (Mohammad Azharuddin) ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया.

'श्रीलंका की लय तोड़ने को बाद में बैटिंग का लिया फैसला'
अजहर के फैसले ने सभी को चौंका दिया क्‍योंकि कोलकाता की ड्राई पिच पर बड़ा स्‍कोर बनाने का मौका कौन छोड़ना चाहेगा. वहीं, दूसरी पारी में बॉल के खतरनाक तरीके से स्विंग और स्पिन होने के पूरे आसार थे. हालांकि, अजहर ने एक बार अपने इस फैसले पर सफाई दी थी कि श्रीलंकाई टीम वर्ल्ड कप 1996 में लगातार स्कोर चेज करके मैच जीत रही थी. सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) और रोमेश कालुवितर्णा (Romesh Kaluvitharna) की जोड़ी खूब रन बटोर रही थी. उसी वर्ल्ड कप के पिछले मैच में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला (Feroz Shah Kotla) में श्रीलंका ने 271 रनों का पीछा करते हुए भारत को हरा दिया था. बाद में बल्‍लेबाजी करने के फैसले के पीछे श्रीलंका की इसी लय को तोड़ने की योजना थी.

कप्‍तान मोहम्‍मद अजहरुद्दीन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया. सचिन तेंदुलकर की शानदार बैटिंग भी भारत को हार से नहीं बचा पाई थी.




श्रीनाथ ने श्रीलंका को एक के बाद एक तीन झटके दिए


श्रीलंकाई खिलाड़ी सनथ जयसूर्या और कालुवितर्णा ओपनिंग करने आए. भारत की ओर से गेंदबाजी कमान संभाल रहे जवागल श्रीनाथ (Javagal Srinath) ने दोनों प्‍लेयर्स को सस्ते में चलता कर दिया. इसके बाद गुरुसिन्हा के रूप में तीसरा विकेट भी श्रीनाथ के खाते में गया. सभी को लगा कि अब श्रीलंकाई टीम बड़ा स्‍कोर खड़ा नहीं कर पाएगी. इसके बाद अरविंद डी सिल्वा ने 66 और रोशन महानमा ने 58 रन की अहम पारियां खेलीं. इसके बाद जब लग रहा था कि अर्जुन रणतुंगा बड़ा स्‍कोर करेंगे तो सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने उन्‍हें 35 रन के निजी स्‍कोर पर एलबीडब्‍ल्‍यू आउट कर दिया. इसके बाद एचपी तिलकरत्‍ने को 32 रन के निजी स्‍कोर पर वेंकटेश प्रसाद ने तेंदुलकर के हाथों कैच कराकर पवेलियन लौटा दिया. इसके बाद चमिंडा वास ने श्रीलंका का स्कोर 8 विकेट पर 251 रन तक पहुंचा दिया. भारत को जीत के लिए 252 रन चाहिए थे.

एक छोर पर टिके रहे सचिन, दूसरे पर गिरते रहे विकेट
फाइनल में पहुंचने के लिए भारत को श्रीलंका के खिलाफ जीत दर्ज करना जरूरी थी. मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर और नवजोत सिंह सिद्धू ओपनिंग करने आए. सिद्धू 3 रन पर चलते बने, लेकिन सचिन एक छोर पर टिके रहे. इसके बाद संजय मांजरेकर आए. वह भी 25 रन बनाकर आउट हो गए. अब भारत को जीत दिलाने की जिम्मेदारी अजहर और सचिन पर थी. उस दिन लग रहा था कि किस्मत भारत के साथ नहीं थी. रिस्‍ट मास्‍टर अजहर जीरो पर आउट हो गए. सचिन भी 65 रन पर आउट हो गए. एक समय भारतीय टीम 1 विकेट पर 98 रन बनाकर खेल रही थी. इसके बाद विकेटों की झड़ी लग गई और स्‍कोर 8 विकेट पर 120 रन हो गया. भारत की पारी के अभी 34 ओवर ही पूरे हुए थे और 2 विकेट बाकी थे. सचिन के जोड़ीदार रहे विनोद कांबली (Vinod Kambli) 10 रन बनाकर डटे हुए थे. इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ कि मैच बीच में रोकना पड़ गया. इसकी वजह थी दर्शकों का हुड़दंग.

वर्ल्‍ड कप 1996 के सेमीफाइनल मैच को भारत की हार से ज्‍यादा विनोद कांबली के रोने और दर्शकों के हंगामे के लिए याद किया जाता है.


दर्शकों ने स्‍टेडियम में की आगजनी, फेंके जूते-चप्‍पल
दर्शकों की भीड़ हिंसक हो गई. स्टेडियम में आग लगा दी गई. बोतलें, जूते-चप्पल ही नहीं दर्शकों के जो भी हाथ में आया मैदान में फेंक दिया. मैच रैफरी क्लाइव लॉयड ने मैच रोक दिया और श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया. विनोद कांबली रोते हुए मैदान से आए. बाद में नवजोत सिंह सिद्धू और टीम मैनेजर अजीत वाडेकर ने कहा कि अजहर का फील्डिंग का निर्णय सही नहीं था. साल 2000 में मैच फिक्सिंग के आरोप में अजहरुद्दीन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया. कांबली ने 2011 में आरोप लगाया कि अजहर ने 1996 का मैच भी फिक्स कर रखा था. इस मैच ने मेरा करियर खत्म कर दिया. हालांकि, 2012 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अजहर को फिक्सिंग के केस से बरी कर दिया. वर्ल्‍ड कप 1996 के सेमीफाइनल को भारत की हार से ज्‍यादा कांबली की रोती हुई तस्‍वीरों, ईडन गार्डेंस में आगजनी और मैदान पर दर्शकों की ओर से फेंकी गईं बोतलों, चप्‍पलों, जूतों के लिए याद किया जाएगा.

ये भी पढ़ें:

क्‍या इंफेक्‍शन से उबर चुका मरीज भी फैला सकता है कोरोना वायरस?

आज का इतिहास: क्रांतिकारी ऊधम सिंह ने जनरल डायर को गोली मारकर लिया जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए क्रिकेट से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 13, 2020, 5:17 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading