तब इंदिरा गांधी ने रातभर जगकर आर्मस्ट्रांग के चांद पर उतरने का इंतजार किया था

आज ही के दिन 42 साल पहले नील आर्मस्ट्रांग के पड़े थे पहले कदम.

First Human Step on Moon : 20 जुलाई 1969 की रात जब नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहली बार कदम रखा तो पूरी दुनिया उत्तेजना और रोमांच से भर गई. खुद तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रातभर जगकर आर्मस्ट्रांग के चांद पर उतने का इंतजार किया था.

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    20 जुलाई 1969 को अमेरिका के नील आर्मस्ट्रांग ने अपोलो-11 के जरिए चांद पर पहला कदम रखा था. उनके साथ एल्विन एल्ड्रिन भी थे. इस मिशन की सफलता के बाद आर्मस्ट्रांग ने एल्ड्रिन के साथ दुनिया के तमाम देशों का दौरा किया. वो भारत आए. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिले. उन्होंने इस मुलाकात में एक ऐसा काम किया था, जिससे इंदिरा ना उनकी कायल हो गईं बल्कि उन्होंने उनका जमकर तारीफ भी की.

    दरअसल 20 जुलाई 1969 की रात इंदिरा सुबह 4.30 बजे तक जागती रहीं ताकि वो आर्मस्ट्रांग को चांद पर उतरते हुए देख सकें. जब आर्मस्ट्रांग दिल्ली आए तो इंदिरा गांधी और उनके सहयोगियों ने उनकी मुलाकात हुई. ये मुलाकात काफी रोचक थी.

    तब आर्मस्ट्रांग खुद आए थे दिल्ली 
    पूर्व विदेशमंत्री नटवर सिंह ने अपनी किताब में इसका जिक्र किया है. जब आर्मस्ट्रांग दिल्ली आए तो उस मुलाकात के दौरान नटवर भी वहां मौजूद थे. इंदिरा गांधी के इशारे पर उन्होंने आर्मस्ट्रांग को बताया, मिस्टर आर्मस्ट्रांग, आपकी यह जानने में दिलचस्पी होगी कि प्रधानमंत्री सुबह 4.30 बजे तक जागती रही थीं, क्योंकि वह चंद्रमा पर आपके उतरने के क्षण से चूकना नहीं चाहती थीं.

    जब नील आर्मस्ट्रांग दिल्ली में इंदिरा गांधी से मिले तो उनकी विनम्रता से वो प्रभावित हो गईं और उनकी तारीफ किये बगैर नहीं रह सकीं


    हैरान कर देने वाला था जवाब
    इस पर नील आर्मस्ट्रांग ने जो जवाब दिया, वो ना केवल इंदिरा बल्कि वहां सभी लोगों को हैरान करने वाला था. आर्मस्ट्रांग ने बहुत विनम्रता से कहा, मैडम प्रधानमंत्री, आपको हुई असुविधा के लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं. अगली बार, मैं सुनिश्चित करूंगा कि जब हम चंद्रमा पर उतरें तो आपको इतना न जागना पड़े.

    दिल्ली में चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग का स्वागत


    इंदिरा ने फिर की जमकर आर्मस्ट्रांग की प्रशंसा
    आर्मस्ट्रांग की यह विनम्रता देख इंदिरा गाँधी जी चकित हो गयी . अपनी कोई भी गलती न होने के बावजूद इतने बड़े शख्स ने माफ़ी मांगी यह देख वह हैरान हो गयी. फिर इंदिरा गांधी ने खुद आगे आकर नील आर्मस्ट्रांग के इस व्यवहार की प्रशंसा की, जिसे पूरे विश्व में सराहना मिली.

    नील आर्मस्ट्रांग ने भी इंदिरा गांधी के साथ इस मुलाकात को हमेशा याद रखा. हालांकि वो दोबारा चांद के मिशन पर नहीं गए. ये भी कहा जाता है कि जब आर्मस्ट्रांग पहली बार चांद पर जा रहे थे तो वो काफी डरे हुए भी थे, उन्हें लग रहा था कि वो बचकर वापस आ भी पाएंगे या नहीं. लेकिन जब वो सकुशल वापस लौटे तो दुनियाभर में हीरो बन गए.

    नील 200 से ज्‍यादा तरह के विमान उड़ा सकते थे. नील ने 16 साल की उम्र में अपने ड्राइविंग लाइसेंस से पहले ही पायलट लाइसेंस हासिल कर लिया था. वह नासा के पहले नागरिक अंतरिक्ष यात्री थे, जिसने 1966 में जेमिनी 8 में कमांड पायलट की भूमिका अदा की.

    आर्मस्ट्रांग ने 1971 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा छोड़ दिया था. फिर उन्होंने छात्रों को अंतरिक्ष इंजीनियरिंग के बारे में पढ़ानी शुरू की. वह दिल की बीमारी से जूझ रहे थे. जिसके लिए उन्होंने ऑपरेशन भी करवाया था. हालांकि बाद में उनकी हालत और बिगड़ती गई. 25 अगस्त 2012 को उन्होंने दम तोड़ दिया.

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