पाकिस्तान को आज लगा था बड़ा झटका, बांग्लादेश ने घोषित किया था खुद को आजाद

बांग्लादेश में 23 मार्च को हर साल आजादी दिवस मनाया जाता है, जब उन्होंने पाकिस्तान से अलग होने की घोषणा की थी

23 मार्च 1971 वो दिन था जबकि पूर्वी पाकिस्तान में बड़ा आंदोलन उठ खड़ा हुआ और अवामी लीग के लोकप्रिय नेता शेख मुजीबुर्रहमान ने बांग्लादेश को आजाद घोषित किया. जानिए फिर उसके बाद क्या हुआ

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    इस दिन पाकिस्तान को बहुत बड़ा झटका लगा था. पाकिस्तान के दूसरे हिस्से, जिसे अब हम बांग्लादेश कहते हैं, उसने खुद को 23 मार्च 1971 के दिन आजाद घोषित कर दिया. इससे पाकिस्तान सकते में आ गया. उसे अंदाज भी नहीं था कि ऐसा हो सकता है, हालांकि तब पाकिस्तान को और बड़ा झटका लगा था जबकि कुछ महीनों बाद भारत की मदद से वाकई पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए और बांग्लादेश एक नया देश बना, जिसे तुरंत अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी मिल गई.

    1947 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के साथ ही ब्रिटिश इंडिया ने देश का बंटवारा करके भारत और पाकिस्तान को अलग कर दिया था. आजादी के बाद मुस्लिम बहुल आबादी वाले इलाके को मिलाकर पाकिस्तान बना.

    पाकिस्तान के दो हिस्से थे. एक भारत के पश्चिमी हिस्से में पश्चिम पाकिस्तान जो राजनीतिक रूप से ज्यादा शक्तिशाली था, जिसे अब हम पाकिस्तान के तौर पर जानते हैं. दूसरा हिस्सा भारत के पूर्वी हिस्से में जो पूर्वी पाकिस्तान कहलाया.ये अब बांग्लादेश बन चुका है.

    पूर्वी पाकिस्तान को उर्दू को राजभाषा बनाना रास नहीं आया
    पश्चिमी पाकिस्तान में सिंध, पठान, बलोच और उर्दू भाषी मुहाजिर रहते थे जबकि पूर्वी पाकिस्तान की आबादी बांग्ला बोलने वाली थी. देश के राजकाज में पूर्वी पाकिस्तान की ज्यादा नहीं चलती थी. ये बात वहां के लोगों को नहीं भाती थी. जब उर्दू को राजभाषा घोषित कर दिया गया तो बांग्लाभाषियों का असंतोष और बढ़ गया.

    शेख मुजीब भारी मतों से जीते लेकिन...
    इसी दौरान पूर्वी पाकिस्तान के नेता शेख मुजीब-उर-रहमान ने अवामी लीग का गठन किया. 1970 के चुनावों में उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की. लेकिन संसद में बहुमत हासिल करने के बाद भी उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की बजाय सशक्त पश्चिमी पाकिस्तान के सैनिक शासकों ने जेल में डाल दिया.

    अवामी लीग के लोकप्रिय नेता शेख मुजीबुर्रहमान ने 23 मार्च के दिन घोषित किया कि अब हम पाकिस्तान से अलग और आजाद हैं


    तय हो गया कि अब पाकिस्तान टूटेगा
    इसी घटना ने पाकिस्तान में वो बीज बोया कि उसका दो टुकड़ों में टूटना तय हो गया. रिहा होने के बाद  25 मार्च की देर रात राष्ट्रपिता की लोकप्रियता हासिल कर चुके शेख मुजीब-उर-रहमान ने बांग्लादेश को आजाद घोषित कर दिया.

    पाकिस्तानी सेना ने जमकर खूनखराबा किया
    इसके बाद तो पाकिस्तान के सैनिक शासकों ने उनके आंदोलन को कुचलना शुरू कर दिया.  26 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. बहुत खूनखराबा हुआ. लाखों लोग भारत आने लगे. अगले नौ महीने तक  पूर्वी पाकिस्तान में गृहयुद्ध होता रहा.  आखिरकार भारतीय सेना को इसमें कूदना पड़ा.

    आखिर बन ही गया बांग्लादेश 
    भारतीय सेना दिसंबर में इस हिस्से में पहुंची और उसने पाकिस्तान की सेना को बुरी तरह हराया. बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी भी भारतीय सैनिकों के साथ जमकर लड़ी. पाकिस्तानी सेना ने आखिरकार 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. लिहाजा हर 23 मार्च को बांग्लादेश आजादी दिवस के रूप में मनाता है.

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