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जानिए कौन है हांगकांग का वो लड़का जिसने चीन को ललकारा, बोला- हम किसी से डरते नहीं

News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 11:41 PM IST
जानिए कौन है हांगकांग का वो लड़का जिसने चीन को ललकारा, बोला- हम किसी से डरते नहीं
जोशुआ वांग चीन के दमनकारी कदमों के खिलाफ हांगकांग के प्रमुख चेहरे हैं.

चीन (China) एक नया कानून लेकर आ रहा है. इस कानून के जरिए चीन चाहता है कि हांगकांग (Hong Kong) की स्वायत्तता खत्म कर दी जाए. लेकिन हांगकांग के युवा और लोकप्रिय एक्टिविस्ट जोशुआ वांग ने चीन को खुली चुनौती दी है.

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लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों के दमन का चीनी इतिहास पुराना है. लोकतंत्र की वजह से ही ताइवान चीन के निशाने पर है. हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों पर चीन लंबे समय से अत्याचार करता आया है. अब चीन की सरकार कोशिश में है कि हांगकांग की आवाज पूरी तरह से खत्म कर दी जाए. दरअसल चीन अब हांगकांग की सुरक्षा के नाम पर नया कानून लाने वाला है. ये कानून देशद्रोह, अलगाव और तोड़फोड़ रोकने की आड़ लेकर लाया जा रहा है लेकिन इसका वास्तविक मकसद कुछ और है. हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों का कहना है कि चीन इस कानून का सहारा लेकर उनकी आवाज खत्म कर देना चाहता है. चीन के इस कदम के आलोचकों का कहना है कि इससे हांगकांग की सीमाई स्वायत्ता समाप्त हो जाएगी.

लेकिन इस बीच हांगकांग के एक लोकप्रिय युवा एक्टिविस्ट ने चीन को ललकारा है. हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के प्रमुख चेहरे और पूर्व छात्रनेता जोशुआ वांग ने खुले तौर पर कहा है कि हम लोग सड़कों पर प्रदर्शन करते रहेंगे. हांगकांग किसी से डरता नहीं है.

चीन अब हांगकांग की आवाज कुचल देने पर पूरी तरह आमादा है.




23 साल का जोशुआ वांग दुनियाभर में सोशल मीडिया का हीरो है. पतला-दुबला युवा. आंखों पर चश्मा. माथे पर बेपरवाही से आए हुए बाल. एक साधारण सा लगने वाला लड़का. उसे शायद ही कोई नोटिस भी करे. वो हांगकांग में लाखों प्रदर्शनकारियों का लीडर है. चीन की ताकतवर सरकार की आंखों की किरकिरी. लेकिन इस लड़के ने कई बार चीन को झुकाया है. एक जमाना था जब वो 14 साल का था तब वो चीन के खिलाफ असरदार लीडर बनकर उभरा था.



वो जब कुछ बोलता है तो लोग सुनते हैं. उसके एक इशारे पर लाखों हांगकांगवासी किस तरह सड़कों पर आ जाते हैं, ये हम सबने पिछले दिनों देखा है. वो निडर होकर पिछले आठ साल में कई आंदोलनों की अगुवाई कर चुका है. कई बार जेल जा चुका है. उसे डर नहीं लगता. वो चीन की सरकार के खिलाफ ऐसा युवा नेता बनकर उभरा है, जो वाकई चीन को ललकारता है और झुकाता भी है. हाल में भी प्रत्यर्पण के मामले में चीन को फिर प्रदर्शनकारियों के सामने झुकना पड़ा है.

जोसुआ वांग की कहानी 2014 में तब शुरू होती है, जब वो हांगकांग के स्कूल में पढ़ रहा था. उम्र थी 14 साल. तब हांगकांग में चीन की नीतियों को लेकर जो विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, उसमें बड़ी भूमिका युवाओं की थी. स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों की.

जोशुआ वांग सामान्य युवकों जैसा है लेकिन जब वो बोलता है तो लोगों पर असर डालता है और योजनाकार तो गजब का है


छात्रों का मजबूत संगठन खड़ा किया
बाद में हालात ऐसे हुए कि जोशुआ ने नेता बनकर उभरता चला गया. उसने अपने बूते जो पहला प्रदर्शन प्लान किया, वो इतना जबरदस्त रहा कि वो खुद हैरत में पड़ गया. इसी दौरान उसने छात्रों का एक संगठन स्कॉलरिज्म खड़ा किया. जो खासा ताकतवर हो गया. फिर उसने प्रो-डेमोक्रेसी पार्टी डेमिस्टोस खड़ी की, मौजूदा समय में वो इसका महासचिव है. हालांकि जोसुआ के सियासत की शुरुआत क्लास बॉयकाट के साथ हुई थी.

लोग तब हैरान रह जाते थे जब 14 साल के जोसुआ को माइक पर बोलते देखते थे. वो कहता था, "ये लड़ाई हमारी है, इसे अगली पीढ़ी के लिए नहीं छोड़ सकते. ये लड़ाई हमारे जेनरेशन की है." हांगकांग में पांच साल पहले हुए व्यापक प्रदर्शनों के साथ अंब्रेला मूवमेंट की शुरुआत को भी वांग से जोड़ा जाता है.

चीन के तियानमन संहार के बाद पहली बार हांगकांग में पिछले कुछ सालों में लगातार बड़े प्रदर्शन हुए. चीन चाहकर भी उससे निपट नहीं पाया. हांगकांग में हालिया प्रदर्शनों में लगातार दस लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर आ जाते थे, वो भी तब जबकि चीन की सरकार ने इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी थी.

नोबल पुरस्कार के लिए नोमिनेट हुआ
दुनियाभर की नामी पत्रिकाएं और चैनल जोशुआ पर बड़ी बड़ी रिपोर्ट लिख चुके हैं. टाइम ने उसे "सबसे असरदार युवा" बताया तो फार्चुन मैगजीन ने "वर्ल्ड ग्रेटेस्ट लीडर". 2017 में उसका नाम नोबल पुरस्कार के लिए नामिनेट हुआ. जोशुआ स्मार्टफोन का एडिक्ट है. चीन जब-जब इंटनेट बंद करता है जोशुआ और उनके साथी एप के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में रहते हैं. ये ऐसा एप जिसे चलाने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होती.

डिस्लेक्सिया से था पीड़ित
जोशुआ बचपन में डिस्लेक्सिया बीमारी से पीड़ित था. स्कूल में बोर्ड पर लिखा उसे तरीके से नजर नहीं आता था. पढाई तरीके से दिमाग में नहीं घुस पातीं. धीरे धीरे उसने इस बीमारी पर काबू पाया. आप यकीन करेंगे वर्ष 2014 में 17 साल की उम्र में ही जोशुआ ने हांगकांग में चुनाव सुधारों पर पूरा डॉफ्ट तैयार कर डाला था. अब जोशुआ चीन की आंखों में खटकने वाला युवा नेता है. चीन मानता है कि जोशुआ हांगकांग में डेमोक्रेसी की योजना बनाने में जुटा है. आने वाले समय में वो फिर कोई बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा.

चीन ने खूब डराया-धमकाया
चीन ने अपने तरीके से जोसुआ को डराया, धमकाया, दबाव डाला. यातनाएं दी. ये युवा गजब का हिम्मती निकला. टस से मस नहीं हुआ. दुनियाभर में कम उदाहरण हैं जब इस उम्र में किसी युवा ने लीडरशिप की ऐसी संभावनाएं दिखाई हों. जब ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन को सौंपा तो जोशुआ महज एक साल का था.

जोशुआ मामूली निम्न मध्यवर्गीय पृष्ठभूमि से है. पिता आईटी के रिटायर्ड प्रोफेशन रहे हैं. सही काम के लिए लड़ने और डटने की प्रवृत्ति पिता से मिली, जो सर्वहारा और गरीब लोगों के लिए काम करते थे.

उस प्रदर्शन ने जोशुआ को मंच दिया
जोशुआ वांग को कोई शायद ही जानता अगर वो उस प्रदर्शन में शामिल नहीं होता, जब सैकड़ों लोग हांगकांग में डेमोक्रेसी की मांग के लिए छोटा-मोटा प्रदर्शन कर रहे थे. सरकार के प्रतिनिधियों ने उनसे मिलने से मना कर दिया.

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First published: May 22, 2020, 11:32 PM IST
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