26/11 मुंबई हमला: उस रात आतंकी कसाब से महज 10 फीट दूर था ये शख्स

कामा और अल्बलेस अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चौकीदार कैलाश घेगडमल बताते हैं कि हमले के दौरान आतंकी कसाब उनसे 10 फीट की दूरी पर था.

भाषा
Updated: November 26, 2018, 8:35 AM IST
26/11 मुंबई हमला: उस रात आतंकी कसाब से महज 10 फीट दूर था ये शख्स
आतंकी अजमल कसाब (फाइल फोटो)
भाषा
Updated: November 26, 2018, 8:35 AM IST
मुंबई में 26 नवंबर, 2008 की काली रात को कामा और अल्बलेस अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चौकीदार कैलाश घेगडमल आज भी वे पल याद करके सिहर उठते हैं जब आतंकवादी कसाब और उसके साथी ने उनसे महज दस फीट की दूरी से दूसरे साथी गार्ड को गोलियों से छलनी कर दिया था.

इन आतंकवादियों ने पास ही बने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस में 52 लोगों को मौत की नींद सुलाने के बाद इस अस्पताल का रुख किया था. कैलाश बताते हैं कि साथी बब्बन वालू ने गोलियों की आवाज सुनने के बाद अस्पताल में लगे दरवाजों को बंद करने का काम तेजी से शुरू कर दिया. लेकिन वालू अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे आतंकियों का निशाना बन गया. इससे वह घबरा कर एक पेड़ के पीछे छुप गए और बामुश्किल दस फीट की दूरी से उन्होंने इंसानी जिंदगियों को मौत बांट रहे कसाब को देखा.

उन्होंने बताया कि इमारत का मुख्य द्वार खुला हुआ था और आतंकियों ने उस तरफ दौड़ लगा दी और वहां डंडा थामे दूसरे गार्ड भानु नारकर पर तड़ातड़ गोलियां बरसा दीं. उन्होंने कहा कि पहले लगा कि यह शायद गैंगवार का नतीजा है लेकिन जब नारकर को उनके सामने कसाब ने मार डाला तो लगा मामला कुछ और है.

ये भी पढ़ें: मुंबई 26/11 अटैक: 'मैंने मौत को देखा है, सिर्फ चाय की वजह से बच गई जान'

अस्पताल परिसर में प्रवेश करने के बाद कसाब और उसके सहयोगी ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. जिससे कर्मचारी, मरीज और उनके रिश्तेदार बहुत डर गए. बाद में कैलाश हिम्मत दिखाते हुए पुलिस टीम को छठी मंजिल तक ले गए, जहां उनकी आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ हुई. जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और वह एवं आईपीएस अधिकारी सदानंद दाते घायल हो गए.

ये भी पढ़ें: #Mumbai 26/11- ‘थोड़ा बिजी हूं, बाद में फोन करता हूं, फिर कभी उनका कॉल आया ही नहीं'

नर्स मीनाक्षी मुसाले और अस्मिता चौधरी ने कहा कि उन्होंने फ्रिज, एक एक्सरे मशीन, दवा ट्रॉली और कुर्सियों का इस्तेमाल दूसरी मंजिल पर दरवाजा बंद करने के लिए किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आतंकवादी वहां घुस न सकें. रात्रि पर्यवेक्षक सुनंदा चव्हाण ने कहा, 'बच्चों और उनकी मां को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य था. हमने बच्चों को घायल होने से बचाने के लिए दीवार के समीप सभी पालने रख दिए.' अस्पताल अधीक्षक अमिता जोशी ने बताया कि अब अस्पताल में सशस्त्र गार्ड हैं और निगरानी के लिए 67 सीसीटीवी लगाए गए हैं.
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर