27 साल से चल रहे शोध ने आइंस्टीन को सही साबित किया, जानिए क्या है मामला

27 साल से चल रहे शोध ने आइंस्टीन को सही साबित किया, जानिए क्या है मामला
वैज्ञनिक ब्लैक विलयों को साल 2015 से देख रहे हैं.

27 साल तक एक तारे की चाल (orbit of Star) को देखने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया की ब्लैक होल (Black Hole) के पास तारों की चाल पर अल्बर्ट आइंस्टीन (albert Eienstien) न्यूटन के मुकाबले ज्यादा सही थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2020, 7:08 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली:  विज्ञान की दुनिया (World of Science) भी अजब गजब घटनाओं से भरी पड़ी है. अंतरिक्ष अनुसंधान (Space research) में भी रोमांच की कमी नहीं हैं. हाल ही में शोधकर्ताओं ने एक तारे की चाल का अवलोकन 27 साल तक किया और उनके नतीजों ने उन्हें चौंका दिया. इन नतीजों से मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) को एक बार फिर सही साबित कर दिया.

क्या है वह शोध
इस शोध में वैज्ञानिकों ने 27 साल तक एक तारे की चाल का अवलोकन किया जो एक ब्लैक होल का चक्कर लगा रहा था. यह ब्लैक होल हमारी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित है और 27 साल के अवलोकन के बाद हमारे शोधकर्ता इसकी कक्षा (orbit) के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सके. इस जानकारी ने उन्हें चौंका दिया है.

आइंस्टीन को किया सही साबित
S2  नाम का यह तारा ठीक उसी तरह से अपनी कक्षा में चलता रहा, जैसा कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत या जनरल थ्योरी ऑफ रिटेविटी में कहा था. इस तरह एक बार फिर आइंस्टीन गुरुत्वाकर्षण के बारे में सही साबित हुए. जब कि इस मामले में न्यूटन के सिद्धांत काम न आ सके.



Black wole
यह ब्लैक होल हमारी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित हैं.


1992 से देख रहे थे शोधकर्ता इसे
एस2 हमारी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित अति विशालकाय ब्लैक होल का एक चक्कर 16 सालों में पूरा कर रहा था.  खगोलज्ञ  इस तारे की चाल को अपने शक्तिशाली टेलीस्कोप से साल 1992 से देख रहे थे और इस तारे की कक्षा के बारे में भी पता कर रहे थे.

आसान नहीं था यह सब जानकारी हासिल करना
जर्मनी के मैक्स प्लैंक एक्ट्राटेरेटियल फिजिक्स इंस्टीट्यूट के फ्रैंक ईशनहॉर  ने बताया, “ब्लैक होल और तारे की आपस की स्थिति का मापना ऐसा ही रहा जैसे यहां से चांद पर फुटबॉल मैच देखना. और फिर आपको फुटबॉल का आकार नापना हो वह भी कुछ सेंटीमीटर के भीतर.”

अलग ही रास्ते पर जा रही थी तारे की कक्षा
फ्रैंक और उनके साथियों ने पाया कि तारे की कक्षा उस तरह की नहीं थी जैसा की हम न्यूटन के गुरुत्व के मूल सिद्धांत के मुताबिक उम्मीद करते. बल्कि यह तारा एक ही कक्षा में बार बार सफर करने के बजाय हर बार नया रास्ता अपना रहा था. बिलकुल डेजी चक्र की तरह.

Black hole
ब्लैक होल के बारे में आइंस्टीन की जनाकारी ज्यादा अच्छी मानी जातीहै.


इस तरह से आकार बदला तारे की कक्षा ने
फ्रैंक ने बताया कि आम तौर पर तारे की कक्षा एक दीर्घ वृत (Ellipse) की तरह होती है. लेकिन यदि गुरुत्व बहुत ही ज्यादा हो तो यह दीर्घवृत भी रोसेट की तरह बदलने लगता है. इस तरह का रास्ता आइंस्टीन ने अपने सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत में बताया था. जिसके अनुसार  ब्लैक होल अपने आसपास का स्पेस टाइम को बिगाड़ देगा और अपने आस पास के तारों की कक्षा को भी  खींच लेगा.

ब्लैक होल के बहुत बड़े होने से हुआ यह असर
हमारे सौर मंडल में बुध ग्रह दीर्घवृत (Elliptical) आकार में सूर्य का चक्कर नहीं लगाता है. वह भी रोसेट आकार में चक्कर लगाता है. लेकिन गुरुत्व का तेज असर गैलेक्सी के मध्य में ज्यादा है क्योंकि ब्लैक होल बहुत ज्यादा भारी है और इसलिए यह स्पेस टाइम को ज्यादा प्रभावित कर सकता है. इस शोध से एक बार फिर अल्बर्ट आइंस्टीन सही साबित हुए हैं.

तो क्या पहले आइंस्टीन के सिद्धांतों को गलत माना गया था
आइंस्टीन ने कई सिद्धांत तोदिए लेकिन उनकी दिलचस्पी कभी उन्हें सिद्ध करने में नहीं थी. उनके कई सिद्धांत बाद में साबित हुए थे. इसके अलावा अंतरिक्षीय सिद्धांतों को सिद्ध करना आसान नहीं होता. यह भी पाया गया है कि आइस्टीन और न्यूटन दोनों के गुरुत्व संबंधी सिद्धांत अंतरिक्ष में हर परिस्थिति में लागू नहीं होते. लेकिन इस मामले में आइंस्टीन सही साबित हुए हैं.

यह भी पढ़ें:

नासा की Curiosity Rover टीम भी कर रही है Work From Home, जानिए कैसे

वैज्ञानिकों ने रहस्य सुलझाया, शुरू में ही खत्म क्यों नहीं हो गया ब्रह्माण्ड

NASA ने खोजा पृथ्वी जैसा ग्रह, केप्लर टेलीस्कोप के पुराने आंकड़ों ने की मदद

वैज्ञानिकों ने देखा अब तक का सबसे चमकीला सुपरनोवा, जानिए क्यों खास है यह
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज