वैज्ञानिकों ने ढूंढे धूल के पीछे छिपे हुए Black Hole, जानिए कैसे हुई उनकी खोज

वैज्ञानिकों ने ढूंढे धूल के पीछे छिपे हुए Black Hole, जानिए कैसे हुई उनकी खोज
वैज्ञानिकों को बहुत से ब्लैक होल एक गैलेक्सी या दूसरे तरह के ब्लैकहोल लग रहे थे जो वास्तव में सुपरमासिव ब्लैकहोल पाए गए. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अंतरिक्ष के एक हिस्से में बहुत से ब्लैकहोल (Black Hole) वैज्ञानिकों की पकड़ में नहीं आ रहे थे. उन्हें इस अध्ययन से पता चला कि वे सुपरमासिव ब्लैकहोल (SMBH) हैं.

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हाल के कुछ सालों में हमारे वैज्ञानिकों की अंतरिक्ष के अवलोकन (Spce Exploration) की क्षमता बहुत बढ़ गई है. उन्नत किस्म और क्षमता वाले टेलीस्कोप (Telescope) लगने से हमें न केवल नई जानकारियां मिल रही हैं, बल्कि पुरानी जानकारियों में सुधार देखने को मिल रहे हैं. इसी तरह का एक किस्सा वैज्ञानिकों को कुछ ब्लैकहोल (Black Hole) के साथ देखने को मिला. वैज्ञानिकों ने दो दर्जन से ज्यादा ऐसे छिपे हुए ब्लैकहोल के बारे में फिर से पता लगाया जिन्हें पहले वे कुछ और ही समझ रहे थे.

कैसे ब्लैकहोल हैं ये
ये सभी ब्लैकहोल पहले या तो सुदूर स्थित गैलेक्सी माने जा रहे ते या फिर दूसरे तरह के ब्लैकहोल समझे जा रहे थे. लेकिन लाइवसाइंस के अनुसार जब शोधकर्ताओं ने एक्सरे मैप को ध्यान से देखा तो पाया कि ये तो सुपरमासिव ब्लैकहोल (SMBH) हैं. ये 28 ब्लैकहोल हमारे सूर्य के भार से अरबों गुना भारी हैं.

कैसे छिपे रहते हैं ये ब्लैकहोल
ये सभी ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं जब ये खुद के धूल और दूसरे पदार्थों के पीछे खुद को छिपा लेते हैं. इन धूल और अन्य पदार्थों की वजह से ब्लैकहोल के पास से आने वाली एक्स रे विकरणें रुक जाती हैं. ये किरणें ब्लैकहोल के इवेंट होराइजन (Event Horizon) के पास से आती हैं. इवेंट होराइजन वह सीमा है जिसके बाद से कोई भी पदार्थ, यहां तक की प्रकाश तक बाहर नहीं आ सकता है. इस सीमा के पास से बहुत चमकीली किरणें आती है. लेकिन ये किरणें बाक पदार्थों ने धुंधली कर रखी हैं.



बड़ी संख्य में होना चाहिए ऐसे ब्लैकहोल
ब्लैकहोल के निर्माण के मॉडल से पता चलता है कि ब्रह्माण्ड में बहुत सारे ब्लैक होने चाहिए लेकिन अब तक खगोलविदों ने उनकी पहचान नहीं की है. इस नए शोध में दक्षिणी आकाश के एक हिस्से के अवलोकन के आधार पर  पता चला है कि बहुत से ब्लैकहोल हमारी नजर से छिपे हुए हैं. चंद्रा एक्स रे ऑबजर्वेटरी से जॉन होपकिंस के डॉक्टोरल छात्रा और खगोलविद इरिनी लैम्ब्राइड्स ने एक बयान में  कहा, “ हम कहना चाहेंगे कि हमने इन विशालकाय ब्लैकहोल का पता लगाया है, लेकिन यह पहले से ही वहां थे.“

Black hole
यह ब्लैकहोल उन ब्लैकहोल से काफी अलग है जो अब तक खोजे गए हैं.


कैसे ढूंढा जा सका इन छिपे हुए ब्लैकहोलों को
इन छिपे हुए ब्लैकहोल को देखने के लिए शोधकर्ताओं ने दक्षिणी आकाश के एक हिस्से के चंद्रा डीप फील्ड साउथ (CDF-S) से ली गई इमेज और उसी हिस्से के इंफ्रारेड और ऑप्टिकल अवलोकनों की तुलना की. इस इमेज से अब तक इस तरह के 67 ब्लैकहोल ढूंढे जा चुके थे, लेकिन शोधकर्ताओंने 28 ऐसे पिंड देखे जो एक्स रे में तो धुंधले दिख रहे थे, लेकिन इंफ्रारेड और ऑप्टिकल तरंगों में चमकीले दिखाई दे रहे थे. पता चला कि ये ग्लैक्सियों के केंद्र के सक्रिय ब्लैकहोल हैं जो चंद्रा एक्स रे टेलीस्कोप से धुंधले नजर आ रहे हैं.

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और भी ब्लैकहोल मिलने की उम्मीद
शोधकर्ताओं के अनुसार उनके नमूने के 40 प्रतिशत हिस्से में बाधाएं दिखाई दे रही हैं. जिसका मदलह है कि अध्ययन किए गए 40 प्रतिशत पिंड किसी स्तर के ब्लैकहोल हैं जो पिछले अध्ययनों में छिपे होने के कारण दिखाई नहीं दिए थे. यह अध्ययन जल्दी ही एस्ट्रोफिजिक जर्नल में प्रकाशित होने वाला है.

 क्यों खास है यह पड़ताल
शोधकर्ताओं के मुताबिक यह दो वजहों से बड़ी पड़ताल है. पहला तो यह कि सुपरमासिव ब्लैकहोल का विकास एक जटिल प्रक्रिया है और एस्ट्रोफिजिस्ट इसके बारे में अब भी अच्छे से नहीं जानते. ये पिंड इतने ज्यादा विशालकाय हैं कि यह समझना बहुत मुश्किल है कि इन्होंने इतना सारा भार का पदार्थ केवल कुछ अरब सालों में ही कैसे निगल लिया. बात केवल यही नहीं है कि इतना पदार्थ कहां से आया, लेकिन किसी पदार्थ के ब्लैकहोल में गिरने में समय भी तो लगता है.

Universe
इस अध्ययन से गैलेक्सी के बारे में भी कई जानकारी हासिल हो सकेगी.(प्रतीकात्मक तस्वीर)


नए आंकड़ों से मिलेगी यह मदद
नए आंकड़े हमारे ब्लैकहोल के मॉडल को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं कि वे आखिर इतने विशालाकाय कैसे हो  जाते हैं, कैसे ये ब्लैक होल छिपी हुई स्थिति में पहले के अनुमान से ज्यादा समय तक रहते हैं. इससे विशाल गैलेक्सियों के इतिहास के बारे मे पता चल सकता है.

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इस अध्ययन के अहम माने जाने की दूसरी वजह है एक्स रे अवलोकन से संबंधित है. अब तक इन अवलोकनों से पता चलता है कि यह बहुत से सुदूर पिंडों की पहचान कर लेता है, लेकिन कुछ चमक चंद्रा जैसे आधुनिक एक्स रे टेलीस्कोप के रेंज के भी बाहर हैं. इन टेलीस्कोप के लिए आसानी से न पकड़े जा सकने वाली इन चमकों के बारे में वैज्ञानिकों को स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती. शोधकर्ताओं को उम्मीद है इस तरह के और ब्लैकहोल की खोज से और ज्यादा काम की जानकारी मिलेगी.
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