बर्फबारी से बिजली पैदा करेगा यह उपकरण, कई और खूबियों से भरा है ये

बर्फबारी से बिजली पैदा करेगा यह उपकरण, कई और खूबियों से भरा है ये
इस तकनीक में शोधकर्ताओं का उपकरण बर्फ के आवेशों से बिजली पैदा करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शोधकर्ताओं (Researchers) ने एक ऐसा उपकरण (Device) बनाया है जो हिमपात (Snowfall) से आवेशित (Charged) होकर बिजली (Electicity) पैदा कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 22, 2020, 9:54 PM IST
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इंसान के पास बिजली (Electricity)  पैदा करने के बहुत सारे साधन हैं, लेकिन फिर वह बिजली बनाने के नए साधनों (Sources) पर खोज करता रहता है. इसकी वजह न केवल बिजली और ऊर्जा (Energy) की बढ़ती मांग है, बल्कि अक्षय ऊर्जा (Renewable energy) के स्रोतों के आसान और व्यापक तौर पर उपयोग में लाए जा सकने वाले तरीके की आवश्यकता भी है. ताजा शोध में अब वैज्ञानिकों ने अपने तरह का पहला 3 डि प्रिंट उपकरण (3D printed Device) बनाया है जो हिमपात (Snowfall) से बिजली पैदा कर सकता है.

क्या खासियत है इस उपकरण की
यह उपकरण अमेरिका में लॉसएंजेलिस की कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी (UCLA) के शोधकर्ताओं ने डिजाइन किया है. यह उपकरण बहुत ही सस्ता, छोटा, पतला और प्लास्टिक की शीट की तरह लचीला है. नैनो एनर्जी जर्नल में प्रकाशित इस शोध के वरिष्ठ लेखक और UCLA  के रिचर्ड कानेर ने बताया, “यह उपकरण दूर दराज के इलाकों में उपयोगी हो सकता है क्योंकि यह खुद ही ऊर्जा पैदा करता है और इसे चलाने के लिए बैटरियों तक की जरूरत नहीं होती है.यह बहुत ही होशियार उपकरण है. यह ये भी बता सकता है कि कितना हिमपात हो रहा है, किस दिशा में हिमपात हो रहा है और उस समय हवा की दिशा और गति क्या है.”

कैसे काम करता है यह
इस उपकरण का नाम बर्फ पर आधारित ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजनरेटर है या इसे स्नो टेंग (Snow TENG) भी कह सकते है. यह स्थिर विद्युतकी (Static Electricity) से आवेश (Charge) पैदा करता है और उससे इलेक्ट्रोन की अदलाबदली से ऊर्जा पैदा करता है. कानेर ने बताया, “स्थिर विद्युतकी (Static Electricity) इलेक्ट्रॉन पकड़ने वाल एक पदार्थ की दूसरे पदार्थ के साथ हुई अंतरक्रिया से पैदा होती है जिसमें इलेक्ट्ऱॉन का आदान प्रदान होता है.”



Snowfall
दूर दराज के इलाकों में यह उपकरण ठंड के मौसम में बहुत उपयोगी होगा. (FILE PHOTO)


बर्फ और सिलिकोन बनाते हैं बिजली
कानेर ने कहा, “आप आवेश को अलग रखते हैं और कुछ नहीं की सी स्थिति से बिजली पैदा कर लेते हैं. यहां पर गिरती बर्फ सकारात्मक आवेश से भरपूर होती है और वही इलेक्ट्रान प्रदान करती है. वहीं दूसरा पदार्थ यहां एक सिलिकोन (Silicone) होता है जो एक सिंथेटिक रबर जैसे पदार्थ होता है. यह सिलिकोन और ऑक्सीजन को परमाणुओं से बना होता है जिसमें कार्बन हाइड्रोजन और दूसरे पदार्थ मिले होते हैं, लेकिन कुल मिला कर यह नकारात्मक आवेश का होता है.
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यूं होता है इलेक्ट्रॉन का आदान प्रदान
जब बर्फ गिरकर सिलिकोन  (Silicone) की सतह से टकाराती है, इससे आवेश पैदा होता जो यह उपकरण पकड़ लेता है जिससे बिजली पैदा हो जाती है. उस्ला (UCLA) के एक शोधकर्ता माहेर अल कादे ने बताया, “बर्फ तो पहले से ही आवेशित होती है तो हमने सोचा कि क्यों न ऐसा पदार्थ लाया जाए जिसका आवेश विपरीत हो और ऐसे में बिजली पैदा हो सकती है. बर्फ इलेक्ट्रॉन देना पसंद करती है. लेकिन उपकरण का कार्यनिष्पादन दूसरे पदार्थ की इलेक्ट्रॉन लेने की क्षमता पर निर्भर करता है. ”

Solar panel
सौर पैनलों के साथ इसको लगाकर और प्रभावी किया जा सकता है. . (Image source: VW/ News18.com)


सही पदार्थ की खोज
शोधकर्ताओं ने बहुत सारे पदार्थों की जांच की जिसेमें एल्यूमीनियम फॉइल और टेफ्लॉन भी शामिल थे, लेकिन शोधकर्ताओं पाया कि केवल सिलिकोन ही ऐसा पदार्थ है जो दूसरे पदार्थों के अलावा ज्यादा आवेश पैदा करता है. शोधकर्ताओं ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया है कि हर बार ठंड के मौसम में पृथ्वी का तीस प्रतिशत हिस्सा बर्फ से ढंक जाता है. इस दौरान सभी सौर पैनल काम करना बंद कर देते हैं. बर्फ के जमने से सौर पैनलों पर सूर्य की किरणें सही तरह से नहीं पहुंच पाती है. जिससे पैनल को प्रभावोत्पादकता पर असर पड़ता है.

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सौर पैनल से जोड़ने पर होगा फायदा
नए उपकरण को सौर पैनलों से जोड़ा जा सकता है. इससे हिमपात के दिनों में भी ऊर्जा का आपूर्ति निर्बाध रहेगी. इस उपकरण का उपयोग स्कीइंग जैसे शीतलीन खेलों में भी हो सकता है. जहां खिलाड़ियों की दौडने, उछलने और अन्य गतिविधियों को सटीकता से मापने की जरूरत होती है. यह नई पीढ़ी के स्वचलित  पहनने योग्य उपकरणों के विकास में मददगार भी हो सकते हैं जहां खिलाड़ियों का प्रदर्शन जांचा जा सकता है. यह उपकरण संकेत भेज सकता है कि क्या कोई व्यक्ति एक जगह से दूसरी जगह जा रहा है, चल रहा है, दौड़ रहा है, कूद रहा है या फिर मार्च कर रहा है.
टीम ने 3डी प्रिटिंग के जरिये यह उपकरण बनायाजिसमें एक सिलिकोन की परत और आवेश पकड़ने के लिए एक इलेक्ट्रोड है.  शोधकर्ताओं को लगता है कि अगर निर्माण और सिलिकोन का उपलब्धता आसान हो तो यह उपकरण बहुत सस्ता हो सकता है.
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