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    हमारी गैलेक्सी में एक-दो नहीं बल्कि 30 करोड़ हो सकते हैं बसने योग्य ग्रह

    बाह्यग्रहों (Exoplanet) की संख्या का अनुमान लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने केप्लर(Kepler) और गीगा (Giga) अभियान के आंकड़ों का अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)
    बाह्यग्रहों (Exoplanet) की संख्या का अनुमान लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने केप्लर(Kepler) और गीगा (Giga) अभियान के आंकड़ों का अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

    केप्लर स्पेस टेलीस्कोप (Kepler space telescope) के आंकड़ों को मिला कर शोधकर्ताओं ने पाया है कि हमारी गैलेक्सी (Gakaxy) में 30 करोड़ ऐसे ग्रह (Planets) होंगे जहां जीवन की अनुकूलता मुमकिन हो सकती है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 4:54 PM IST
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    हमारे खगोलविद लंबे समय से बाह्यग्रहों (Exoplanet) का अध्ययन कर उनमें जीवन के संकेतों (Signs of life) की खोज कर रहे हैं. इस दिशा में बाह्यग्रहों की खोज करना ही एक कठिन कार्य करना रहा है. नासा (NASA) के केप्लर अभियान (Kepler mission) में प्रमुख उद्देश्य ही सूर्य के जैसे तारों के पथरीले ग्रहों की खोज कर उनमें जीवन के संकेतों की खोज करना रहा है. अब खगोलविदों ने केप्लर के आंकड़ों को मिला कर ऐसे ग्रहों की गणना की है.

    कितनी है यह संख्या
    वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारी गैलेक्सी के केप्लर के सारे आंकड़ों को मिलाने पर पाया है कि हमारी गैलेक्सी में आवासयोग्य (Habitable) यानी जीवन की अनुकूलता के योग्य ग्रहों की संख्या करोड़ों में है.  इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अनुमान लगया है कि ऐसे ग्रहों की संख्या करीब 30 करोड़ तक हो सकती है.

    एक खास इक्वेशन से गणना
    SETI इंस्टीट्यूट के बाह्यग्रह शोधकर्ता, केप्लर साइंस ऑफिस के निदेशक और इस लेख के सहलेखक जेफ कॉगलिन ने बताया, ‘इस सवाल के जवाब की तलाश में कि क्या हम ब्रह्माण्ड में अकेले हैं, हम एक कदम और पास में आ गए हैं. यह संचार योग्य सभ्यताओं की संख्या का आंकलन करने में उपयोग में आने वाली डार्क समीकरण (Darke Equation) के लिए अहम काम है.



    क्या है यह समीकरण
    डार्क इक्वेशन एकप्राययिकता वाद (probabilistic argument) है जिसका उपयोग हमारी मिल्की वे गैलेक्सी  में सक्रिय, संचार करने वाली पृथ्वी से बाहर मौजूद सभ्यताओं की संख्या का आंकलन करती है. इसे प्रायः एस्ट्राबायोलॉजी के लिए रोडमैप की तरह माना जाता है और उसने SETI इंस्टीट्यूट के कई शोधों का मार्गदर्शन किया है.

    पृथ्वी के आकार के ग्रह पर ध्यान
    मापन के लिए वैज्ञानिकों ने उन बाह्यग्रहों को खोजा जो पृथ्वी के ही आकार के थे और उनके पथरीले ग्रह होने की काफी संभावना थी. इसके अलावा उन्होंने सूर्य के जैसे तारों पर भी नजर रखी जिनकी उम्र हमारे सूर्य के जैसी और तापमान उसी के या उसके आसपास की तरह था. इसके अलावा जीवन के अनुकूल होने के लिए यह भी देखा गया क्या इस ग्रह पर तरल पानी का समर्थन करने वाले  हालात हैं या नहीं. वैज्ञानिकों ने कैप्लर और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के गीगा मिशन के आंकड़ों  का अध्ययन किया. गीगा मिशन यह पता लगाने के लिए है कि ग्रहों के तारे कितनी ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं.

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    ऐसे ग्रहों के अंतर का अध्ययन जरूरी
    इस अध्ययन की सह लेखिका मिशेल कुनिमोटो ने हाल ही में ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी से बाह्यग्रहों की दिखने की दर पर डॉक्टरेट की है और कैम्ब्रिज में मसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की TESS टीम से जुड़ी हैं. उनका कहना है कि समान तरह के ग्रह कितने अलग हैं यह जानना आने वाले बाह्यग्रह की खोज करने वाले अभियानों के लिए बहुत अहम है.

    आगामी शोधों के लिए मददगार होगा यह
    कुनिमोटो का कहना है किसूर्य जैसे तारों के जीवन की अनुकूलता के योग्य छोटे ग्रहों के लिए किए गए सर्वे के नतीजे इस तरह के अध्ययन पर निर्भर करेंगे जिनसे उनकी सफलता की संभावना बढ़ जाएगी. अभी इस बारे में और ज्यादा शोध करने की जरूरत है जिससे ग्रहों के वायुमंडल में तरल पानी के समर्थन करने वाले हालातों को समझा जा सके.

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    इस विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने सूर्य जैसे तारे के ग्रह में तरल पानी होने के लिए वायुमंडल के प्रभाव का एक संकीर्ण अनुमान लगाया है. इन ग्रहों की में एक साथ पृथ्वी जैसे हालात मिलना एक बहुत ही बड़ा संयोग मिलता है. अभी तक वैज्ञानिकों को कई ऐसे ग्रह मिले हैं जहां बिलकुल वैसे ही हालात हैं जो पृथ्वी पर तीन या अरब साल पहले हुआ करते थे. लेकिन उनके तारे की इतनी उम्र बाकी नहीं थी.
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