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5-Points Explainer : जानिए ये हरी हाइड्रोजन क्या है? और इसे हरी झंडी क्यों दी जा रही है?

5-Points Explainer : जानिए ये हरी हाइड्रोजन क्या है? और इसे हरी झंडी क्यों दी जा रही है?

प्रतीकात्मक तस्वीर: (shutterstock)

प्रतीकात्मक तस्वीर: (shutterstock)

5-Points Explainer : ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) एक ऐसा ईंधन होता है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) शून्य होता है. मतलब उसे कितना भी जलाएं, उससे प्रदूषण नहीं होगा. भारत इस स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के उत्पादन के लिए राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (National Hydrogen Mission) के लिए भी तैयार है.

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नई दिल्ली. केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा था कि वह लोगों को यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि बगैर जहरीली गैसों को छोडे भी वाहनों को ग्रीन यानी हरी हाइड्रोजन (Green Hydrogen) से चलाना संभव है. यहां तक कि भारत इस स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के उत्पादन के लिए राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (National Hydrogen Mission) के लिए भी तैयार है. जानते 5 प्वाइंट एक्सप्लेनर (5-Points Explainer) में इसी के बारे में..

1.हाइड्रोजन क्या है और कैसे कितनी मददगार?
हाइड्रोजन (Hydrogen) सितारों का ईंधन होता है, इसमें बहुत ऊर्जा पाई जाती है. ब्रह्मांड में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. लेकिन धरती पर यह जटिल अणुओं जैसे पानी या हाइड्रोकार्बन के तौर पर पाया जाता है. हाइड्रोजन (Hydrogen) किसी जीवाश्म ईंधन या नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Renewable Energy Source), जैसे सूरज की रोशनी और हवा की तरह ऊर्जा का स्रोत नहीं होता है. बल्कि यह ऊर्जा का वाहक होता है. यानी इस्तेमाल के लिए इसका उत्पादन किया जा सकता है, इसे अलग किया जा सकता है या संग्रहित किया जा सकता है. इसका कैसे भी इस्तेमाल किया जा सकता है, इसके जलने पर पानी ही बनता है. विश्व ऊर्जा परिषद (World Energy Council) का कहना है कि एक किलो हाइड्रोजन (Hydrogen) के जलने से जो उर्जा मिलती है, वह एक किलो गैसोलिन के जलने वाली ऊर्जा से तीन गुना ज्यादा होती है. इसके बाद पानी बनता है. फिर हाइड्रोजन फ्यूल सेल है जो एक तरह के इलेक्ट्रोकेमिकल सेल होते हैं जो हाइड्रोजन और पानी की केमिकल ऊर्जा को बिजली में बदलते हैं. इससे भी जो अपशिष्ट बचता है वह पानी होता है. एक फ्यूल सेल तब तक उर्जा का उत्पादन कर सकता है, जब तक उसे हाइड्रोजन और पानी की आपूर्ति मिल रही है.

2.हाइड्रोजन तेरे कितने रंग?
हाइड्रोजन (Hydrogen) को अलग करने के कई तरीके होते हैं, इन तरीकों की वजह से ही इसका रंग अलग-अलग हो जाता है. विश्व उर्जा परिषद (World Energy Council) के मुताबिक 96% हाइड्रोजन (Hydrogen) का उत्पादन जीवाश्म ईंधन से किया जाता है. इस दौरान निकलने वाला हाइड्रोजन धूसर या ग्रे हाइड्रोजन कहलाता है. हालांकि यह प्रक्रिया इतनी महंगी नहीं होती, जितनी दूसरी होती है. लेकिन इसमें बहुत अधिक मात्रा में कार्बन डायऑक्साइड निकलती है. इसीलिए जब कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (सीसीएस) प्रक्रिया से कार्बन डायऑक्साइड को निकलने से रोक दिया जाता है तो यह हाइड्रोजन ग्रे से ब्लू यानी नीला हाइड्रोजन हो जाता है. लेकिन यह प्रक्रिया काफी मंहगी है.

इसके अलावा एक और रंग है हाइड्रोजन (Hydrogen) का, फिरोज़ा. इसके उत्पादन में मीथेन पायरोलिसिस की प्रक्रिया के जरिए गैस का उत्पादन किया जाता है. जिसमें ठोस कार्बन पैदा होता है. लेकिन इस तरह का उत्पादन अभी प्रयोग के स्तर पर ही है. इसी तरह गुलाबी हाइड्रोजन पानी की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से पैदा होता है. बस फर्क इतना है कि इसमें परमाण्विक ऊर्जा का इस्तेमाल होता है. इसी तरह जब सौरऊर्जा का इस्तेमाल करके हाइड्रोजन (Hydrogen) बनाया जाता है तो उसे पीली हाइड्रोजन कहा जाता है.

3. ग्रीन हाइड्रोजन क्या है, कैसे फायदेमंद?
ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) वह है जिसके लिए सरकार काम कर रही है. यह किसी भी तरह की अक्षय ऊर्जा से प्राप्त हो सकती है, ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) अक्षय ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए प्राप्त किया जा सकता है. हालांकि इसकी प्रक्रिया बहुत मंहगी है और इसे अभी तक व्यापारिक स्तर पर शुरू नहीं किया गया है. ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) एक ऐसा ईंधन होता है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) शून्य होता है. मतलब उसे कितना भी जलाएं, उससे प्रदूषण नहीं होगा.

4. ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सरकार क्या कर रही है?
अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनएचएम (National Hydrogen Mission) की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) का वैश्विक हब बनाना है. इसी साल अप्रैल में एक कार्यक्रम में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा था कि कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) को रोकने के लिए ही नीति निर्माताओं को हाइड्रोजन फ्यूल ने आकर्षित किया है. हालांकि एनएचएम में अभी काफी विस्तार होना बाकी है. मंत्रालय ने बताया है कि इसे लेकर कई पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसके तहत दिल्ली में 50 बसों में सीएनजी (CNG) के साथ हाइड्रोजन मिला कर चलाया जा रहा है. इसे आगे पूरे देश में लागू करने की योजना है.

5. हाइड्रोजन ऊर्जा के इस्तेमाल में चुनौती भी है अभी
ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के उत्पादन के लिए तकनीकी विकास करने में काफी लागत आएगी. लेकिन नवीकरणीय उर्जा और फ्यूल सेल के दामों में गिरावट ने इस क्षेत्र में निवेश के लिए उत्साह को बढ़ाया है. रिपोर्ट बताती हैं कि कि इस साल केंद्र ने शोध और विकास के लिए 2021 से 2024 के बीच 800 करोड़ रूपए लागत की एक पायलट परियोजना को मंजूरी दी है. साथ ही अब इसमें निजी कंपनियों को भी निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. फिलहाल इसकी 14 परयोजनाएं चल रही हैं.

Tags: Hydrogen

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