पृथ्वी पर गिरेगा नासा का 56 साल पुराना सैटेलाइट, जानिए कहां गिर सकता है ये

पृथ्वी पर गिरेगा नासा का 56 साल पुराना सैटेलाइट, जानिए कहां गिर सकता है ये
1964 में प्रक्षेपित किया गया यह सैटेलाइट अब पृथ्वी के वायुमंडल में गिरने वाला है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) ने 56 साल पहले एक जोयोफिजिकल सैटेलाइट (Geophysical Satellite) अंतरिक्ष में भेजा था, वह अब पृथ्वी के वायुमंडल में गिरने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 29, 2020, 12:33 PM IST
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अंतरिक्ष (Space)में बहुत सारे सैटेलाइट (Satellite) बेकार घूम रहे हैं. इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो पृथ्वी की निचली कक्षा (Lower orbit of earth) में हैं. काम करने लायक नहीं होने के बाद भी ये सैटेलाइट दशकों तक वहीं घूमते रहते हैं. इनमें कुछ पृथ्वी के वायुमंडल (Atmoshpere) में आकर भी गिर जाते हैं. इसी तरह नासा (NASA) का एक जियोफिसिक्स सैटेलाइट (Geophysical Satellite) अंतरिक्ष में लंबा समय गुजारने के बाद वायुमंडल में गिरने वाला है. नासा का यह सैटेलाइट काम बंद करने के 49 साल बाद इस सप्ताह के अंत में खत्म होने जा रहा है

केवल पांच साल तक जमा किए आंकड़े
नासा ने ऑर्बिटिंग जियोफिजिक्स ऑबजर्वेटरी 1 (OGO-1) अंतरिक्षयान सितंबर 1964 में प्रक्षेपित किया था. इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के मैग्नेटिक वातावरण और पृथ्वी की सूर्य के साथ अंतर्क्रिया का अध्ययन करना था. OGO-1 ने 1969 तक आंकड़े जमा किए थे और उसके बाद साल 1971 में वह डिकमीशन्ड यानि औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया था. इसके बाद से यह पृथ्वी का शांति से चक्कर लगा रहा था. इस दौरान वह दो दिन में अंडाकार कक्षा में पृथ्वी का चक्कर लगा रहा था.

इस सप्ताहांत गिरेगा वायुमंडल में
नए अवलोकनों के आधार पर पता चला है कि पृथ्वी की गुरूत्वाकर्षण शक्ति के आगे यह 487 किलोग्राम के वजन का यह सैटेलाइट हार गया और यह इस सप्ताह के अंत तक पृत्वी के वायुमंडल में आकर गिर सकता है. OGO-1 के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि यह अगली तीन पेरीजी में से एक में पृथ्वी के अंदर प्रवेश करेगा. पेरीजी कक्षा का वह बिंदु होता है जब  उपग्रह अपने ग्रह के सबसे पास में होता है.





कहां गिरने की है संभावना
नासा के गुरूवार को दिए गए बयान के मुताबिक OGO-1 ईस्टर्न डेलाइड समयानुसार (ETD) शनिवार शाम पांच बचकर 10 मिनट पर पृथ्वी के वायुमंडल में  प्रवेश करेगा. इसके दक्षिण प्रशांत महासागर में ताहिति और कूक द्वीपों के बीच गिरने कीस संभावना है. यानि यह भारतीय समयानुसार रविवार सुबह 2 बजकर 40 मिनट पर पृथ्वी के वायुमंडल में आएगा.

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 कितना खतरा है इससे
नासा के बयान में कहा गया कि यह अंतरिक्ष यान वायुमंडल में ही टूट जाएगा और इससे हमारी पृथ्वी को किसी किस्म का कोई खतरा नहीं हैं. यह रिटायर हुए अंतरिक्ष यानों की एक सामान्य प्रक्रिया है. OGO-1 नासा के छह अंतरिक्ष यानों के अभियानों में से पहले अंतरिक्ष यान था इसके अन्य सदस्यों को 1965, 1966, 1967, 1968 और 1969 में प्रेक्षेपित किया है. इनमें से पांच पृथ्वीपर वापस आ चुके  हैं. इनमें से ज्यादा 2011 में आए थे.

Satellite
अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में गिरते रहते हैं यह उनके जीवन की अंतिम प्रक्रिया होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर, नासा)


कैसे पता चला कि गिरने वाला है ये
इस सैटेलाइट के गिरने से संबंधित अवलोकन एरीजोना यूनिवर्सिटी के कैटलीना स्काय सर्वे (CSS) और हवाई यूनिवर्सिटी के एस्टोरॉइड टेरेस्ट्रियल इंपैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम (ATLAS) ने अलग अलग हुए अध्ययनों में किया है. दोनों ने एक छोटी वस्तु का गिरने के रास्ते का पता लगाया है

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शोधकर्ताओं ने जब इस वस्तु के बारे में अच्छे जानने की कोशिश की तब उन्होंने पता चला कि यह कोई क्षुद्रग्रह या उल्का नहीं बल्कि नासा का OGO-1 है. इसकी पुष्टि, CSS के अलावा दक्षिण कैलिफोर्निया में नासा की जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी के सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑबजेक्च (NEO)  स्टडीज, यूरोपियन स्पेस एजेंसी के NEO कोऑर्डिनेशन सेंटर ने भी की है.
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