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Antarctica में 9 करोड़ साल पहले था ‘Rain Forest’, जानिए उसकी कुछ दिलचस्प बातें

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: April 5, 2020, 5:23 PM IST
Antarctica में 9 करोड़ साल पहले था ‘Rain Forest’, जानिए उसकी कुछ दिलचस्प बातें
अंटार्कटिका में बर्फ के नीचे वर्षा वन के अवशेष मिले हैं.

वैज्ञानिकों को अंटार्कटिका (Antarctica) में बर्फ के नीचे 9 करोड़ साल पुराने वर्षा वन (Rain Forest) के अवशेष मिले हैं. इस उस समय के पर्यावरण के बारे में अहम जानकारियां भी मिली है और पृथ्वी में हुए अब तक अहम बदलाव के बारे में भी पता चला है.

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नई दिल्ली: कहते हैं कि हमारी पृथ्वी (Earth) आज भी ऐसे बहुत से रहस्यों से भरी पड़ी है जिन्हें मनुष्य अभी तक खोज नहीं सका है. मनुष्य ने प्रकृति की इस चुनौती को हमेशा स्वीकार किया है और हमेशा ही पृथ्वी के रहस्यों को खोजने में लगा रहता है. इंसान की ताजा उपलब्धियों में एक नया इजाफा हुआ है. उसने अंटार्कटिका (Antarctica) में  9 करोड़ साल पुराने एक जंगल की खोज करने में सफलता पाई है.

अंटार्कटिका के नीचे मिले प्रमाण
करीब 9 करोड़ साल पहले पश्चिमी अंटार्कटिका पर शीतोष्ण वर्षा वन (Temperate Rain Forest) था. लाइव साइंस में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि अंटार्कटिका कभी एक वर्षा वन था. वैज्ञानिकों को अंटार्टिका के नीचे 9 करोड़ साल पुराने अवशेष मिले हैं जिनसे यह साबित हो रहा है.

कैसे मिले अवशेष



साल 2017 में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम को  पश्चिमी अंटार्कटिका के पाइन आईलैंड ग्रेशियर के पास समुंद्र तल पर बर्फ के नीचे अवसाद मिले जिसमें वर्षा वन के अवेशेष थे. जर्मनी के शोधकर्ता जियोलॉजिस्ट जॉन क्लैजेस ने बतया कि जैसे ही टीम ने इसे देखा वे समझ गए कि  उन्होंने कुछ असामान्य पा लिया है. इसमें एक सतह अलग ही रंग की थी जो 9 करोड़ साल पुरानी थी.



antarctica
ग्लोबल वार्मिंग के कारण एंटार्कटिका के ग्लेशियर पिघलने लगे हैं.


क्या मिला जांच में
जब लैब में इसकी कम्प्यूटर टोमोग्राफी स्कैनर से जांच की गई. तब उसकी डिजिटल इमेज से पता लगा कि इसकी पूरी मिट्टी में जड़ों का एक घना जाल है.  इस मिटी में पुरातन काल के पराग, बीज और फूल वाले पौधों के अवशेष मिले जा क्रिटेशियस काल के हैं. जो आज से 14 करोड़ साल पहले से लेकर 6 करोड़ साल पहले तक का युग माना जाता है.

सघन वन थे तब वहां
इन परागों और बीजों के अध्ययन करने के बाद पेलियोकोलॉजिस्ट शोधकर्ता उलरिच साल्जमैन ने बताया कि 90 मिलियन साल पहले पश्चिमी अंटार्कटिका में संघन और समृद्ध शीतोष्ण वर्षावन रहे थे. इस तरह के वन आज न्यूजीलैंड में पाए जाते हैं.

कितनी अगल थी आज से तब कि दुनिया
उस दौरान दुनिया काफी अलग थी. क्रिटेशियस काल में डायनासोर पृथ्वी पर विचरण करते थे और समुद्र का स्तर आज के स्तर से करीब 197 मीटर ऊंचा हुआ करता था. उस समय ट्रॉपिक्स में समुद्र की सतह का तापमान 35 डिग्री के आसपास हुआ करता था. इसी माहौल में अंटार्कटिका में वर्षावन का वातावरण पनपा.

इस समय दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में कोरोना वायरस फैला हुआ है.


कैसी थी वहां की जलवायु
 तब वहां मृदु जलवायु थी, वार्षिक औसत तापमान12 डिग्री सेलसियस था जैसा कि अमेरिका के सिएटल में होता है. गर्मी में औसत तापमान 19 डिग्री तक होता था और नदियों पानी के जलाशयों में 20 डिग्री का तापमान रहता था. वहां की बरसात इंग्लैंड के वेल्स की तरह होती थी.

उम्मीद से ज्यादा औसत तापमान था तब पृथ्वी का
अंटार्कटिका में चार महीनों तक सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती ऐसे में तब वहां औसत तापमान इतना ज्यादा कैसे होता था, इस पर शोधकर्ताओं का तर्क है कि उस समय वायुमंडल में कार्बन डाइ ऑक्साइड की  मात्रा बहुत ज्यादा थी जिस वजह से पृथ्वी का ही तापमान ज्यादा था. अवशेषों का अध्ययन बताता है कि तब वायुमंडल में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा, वैज्ञानिकों के अनुमान से ज्यादा थी.

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दुनिया में ज्यादातर शोधकार्य इस समय कोरोना वायरस पर ही चल रहा है.


यह अहम बात भी पता चलती है शोध से
इन अध्ययनों से एक बात और पता चलती है. कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीन हाउस गैस तापमान कितना ज्यादा बढ़ाने में सक्षम हैं. इतना कि आज का बर्फीला अंटार्कटिका एक समय में वर्षावन था. शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि आज वहां की बर्फ की चादर हमारे लिए कितनी अहम है.

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First published: April 5, 2020, 5:23 PM IST
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