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क्यों सुर्खियों में आई 16 साल की ये लड़की, ओबामा-ट्रंप तक इसके सामने फेल

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Updated: September 20, 2019, 4:17 PM IST
क्यों सुर्खियों में आई 16 साल की ये लड़की, ओबामा-ट्रंप तक इसके सामने फेल
ग्रैता तुनबैर जलवायु संकट पर पूरी दुनिया में कैंपेन चला रही हैं.

स्वीडन (Sweden) की 16 साल की लड़की ग्रैता तुनबैर (Greta Thunberg) जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के अपने काम को लेकर पूरी दुनिया में मशहूर हैं. सिर्फ 16 साल की उम्र उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है...

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  • Last Updated: September 20, 2019, 4:17 PM IST
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सिर्फ 16 साल की एक लड़की दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन (Climate change) की आवाज बन चुकी है. जब दुनियाभर के बड़े और जिम्मेदार लोग जलवायु परिवर्तन के खतरों से बेपरवाह बने हुए हैं, ये 16 साल की लड़की स्कूल छोड़कर बड़े लोगों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास दिलाने निकल पड़ी. स्वीडन (Sweden) की 16 साल की लड़की ग्रैता तुनबैर (Greta Thunberg) आज जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनियाभर में काम कर रही है. अमेरिका से लेकर लंदन और फ्रांस में उसने लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करने का काम किया है.

ग्रैता तुनबैर का स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट या फ्यूचर फॉर फ्राइडे कैंपेन पूरी दुनिया में मशहूर है. पिछले साल अगस्त महीने से उन्होंने इस कैंपेन की शुरुआत की थी. ग्रैता ने अपने इस कैंपेन की शुरुआत करते हुए शुक्रवार के दिन स्कूल जाना छोड़ दिया. वो हर शुक्रवार को स्कूल छोड़कर स्टॉकहोम में स्वीडन की संसद के बाहर तख्ती लेकर प्रदर्शन करतीं हैं. वो अपने सांसदों और वहां आने जाने वाले लोगों से दुनिया बचाने की अपील करती हैं.

16 साल की एक लड़की का स्कूल छोड़कर दुनिया बचाने की मुहिम पर निकल पड़ना, पूरी दुनिया में मशहूर हुआ. आज ग्रैता तुनबैर का ये आंदोलन दुनियाभर के कई देशों में चल रहा है. कई देशों के बच्चे शुक्रवार के दिन स्कूल जाना छोड़कर लोगों को क्लाइमेंट चेंज के प्रति जागरुक करने की मुहिम में लग गए हैं. ग्रैता तुनबैर जलवायु परिवर्तन पर दुनियाभर के लोगों के लिए एक आयकॉन बन गई हैं.

a 16 years old girl greta thunberg who is famous in world for work in climate change
ग्रैता तुनबैर के कैंपेन से दुनियाभर के बच्चे जुड़े हैं


ग्रैता तुनबैर की मुहिम से जुड़े हैं दुनियाभर के बच्चे

नवंबर 2018 के स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट के उनके कैंपेन में 24 देशों के करीब 17 हजार छात्रों ने हिस्सा लिया. इसके बाद ग्रैता क्लाइमेंट चेंज पर बड़ी-बड़ी स्पीच देने लगीं. मार्च 2019 तक उनके कैंपेन से 135 देशों के 20 लाख बच्चे जुड़ गए. इस साल अगस्त तक उनके कैंपेन में हिस्सा लेने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 36 लाख हो गई. 20 से 27 सितंबर के बीच ग्रैता तुनबैर के कैंपेन से लाखों छात्र जुड़ने वाले हैं.

ग्रैता तुनबैर का जन्म स्वीडन में जनवरी 2003 में हुआ है. उनकी मां ओपेरा सिंगर और पिता एक्टर हैं. पहली बार सिर्फ 8 साल की उम्र में 2011 में उन्होंने क्लाइमेट चेंज के बारे में सुना. 11 साल की उम्र तक वो जलवायु परिवर्तन के संकट को समझना शुरू कर दिया था.
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ग्रैता तुनबैर पूरी दुनिया में मशहूर हो चुकी हैं


वो जलवायु संकट की वजह से पूरी दुनिया में आ रहे बदलाव से वो इतना चिंतित हो उठी कि वो डिप्रेशन में चली गईं. डिप्रेशन से बाहर निकलने के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर काम करने की सोची. उनका मानना है कि जब बड़े लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ सकते तो फिर बच्चों को ही सामने आना पड़ेगा.

'जब दुनिया ही नहीं बचेगी तो स्कूल जाकर क्या करें?'

जलवायु संकट पर मुहिम चलाने की वजह से ग्रैता तुनबैर पूरी दुनिया की मीडिया की नजरों में आ गई. एक बार ग्रैता जब स्वीडन की संसद के बाहर धरना प्रदर्शन कर रही थीं, एनडीटीवी की रिपोर्टर ने उनसे बात की. ग्रैता से जब रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि वो स्कूल जाना छोड़कर यहां क्या कर रही हैं. उन्हें नहीं लगता कि उनकी उम्र की लड़कियों को इस वक्त स्कूल में होना चाहिए?

ग्रैता ने कहा, ‘अगर दुनिया ही नहीं बची, अगर लोग नहीं बचे तो स्कूल जाने का मतलब क्या है?’ ग्रैता कहती हैं कि वो जो कर रही हैं, वो स्कूल से ज्यादा जरूरी है. वो कहती हैं, ‘मैं भविष्य के लिए क्यों पढाई करूं, जब वो बचे ही नहीं. कोई उस भविष्य को बचाने के लिए कुछ कर ही नहीं रहा है. हम बच्चों को ये सब नहीं करना चाहिए, हमें स्कूल में होना चाहिए. लेकिन कोई कुछ कर ही नहीं रहा है तो मैं क्या करूं? मुझे ये सब करना पड़ रहा है.’

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ग्रैता तुनबैर कई देशों की संसद को संबोधित कर चुकी हैं


ग्रैता तुनबैर को भारत के बारे में भी जानकारी है. वो भारत के बारे में कहती हैं कि यहां लोगों को अपना जीवन स्तर ऊंचा करने की दिशा में काम करना चाहिए.

एक साल के भीतर पूरी दुनिया में मशहूर हो गईं ग्रैता तुनबैर

ग्रैता मानती हैं कि जलवायु संकट की वजह से पूरी दुनिया में इमरजेंसी जैसे हालात हैं. वो कहती हैं कि ‘हमें दुनियाभर के पॉलिटिकल लीडर्स का ध्यान इस ओर दिलाना होगा. अगर वो कुछ नहीं करते हैं तो दुनिया नहीं बचेगी. हमें इस दिशा में काम करना होगा.’

जलवायु परिवर्तन पर अपनी मुहिम को लेकर ग्रैता पूरी दुनिया में मशहूर हो चुकी हैं. पिछले एक साल में ग्रैता पर कई लेख छपे हैं. वो कई देशों की यात्रा कर चुकी हैं. कई सभागारों और सेमिनारों में बोल चुकी है. पिछले दिनों वो अमेरिका की यात्रा पर थीं.

ट्रंप से मिलने को राजी नहीं हुई ग्रैता

17 सितंबर को ग्रैता अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में सीनेट से मिली और जलवायु परिवर्तन पर बात की. 18 सितंबर को ग्रैता ने अमरिकी कांग्रेस को संबोधित किया. जलवायु परिवर्तन पर सांसदों को झिड़कते हुए कहा कि आपकी कोशिशें काफी नहीं है. इस दौरान ग्रैता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि ये समय की बर्बादी होगी.

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ग्रैता तुनबैर को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया


हालांकि वो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलीं. ग्रैता से मिलने के बाद बराक ओबामा ने ट्वीट किया, ‘सिर्फ 16 साल की उम्र में ग्रैता हमारी दुनिया के लिए सबसे फिक्रमंद शख्सियत हैं. वो समझती हैं कि जलवायु परिवर्तन के सबसे ज्यादा खतरे उनकी जेनरेशन को भुगतना होगा, इसलिए इस दिशा में वो रियल एक्शन चाहती हैं. ’

ग्रैता पिछले साल दिसंबर में पोलैंड में जलवायु परिवर्तन के संयुक्त राष्ट्र के प्रोग्राम में बोल चुकी हैं. लंदन और फ्रांस की संसद में वो अपनी बात रख चुकी हैं. जलवायु परिवर्तन की इन्हीं कोशिशों की वजह से ग्रैता तुनबैर को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है.

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First published: September 20, 2019, 4:17 PM IST
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