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अब हवा और बिजली से चल सकेगा जेट इंजन, जानिए क्या होगा फायदा

अब हवा और बिजली से चल सकेगा जेट इंजन, जानिए क्या होगा फायदा

चीनी शोधकर्ताओं ने एक जेट इजन को हवा और बिजली से चलाने में सफलता पाई है.

चीनी शोधकर्ताओं ने एक जेट इजन को हवा और बिजली से चलाने में सफलता पाई है.

चीन के वैज्ञानिकों ने हवा और बिजली का उपयोग कर प्लाज्मा बनाकर जेट इंजन (Jet Engine) चलाने की तकनीक विकसित की है.

नई दिल्ली:  ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) जैसे ज्वलंत मुद्दे दुनिया को प्रदूषण के खिलाफ हमेशा ही चेताते रहे हैं. हम अपने ऊर्जा स्रोतों के बारे में सोचने को मजबूर है. इनमें प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) का विकल्प ढूंढना हमारी आवश्यकता भी बनती जा रही है. वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर शोधों पर जोर बढ़ता जा रहा है जिससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम से कम हो. इसी दिशा में चीन के शोधकर्ताओं ने एक खास जेट इंजन (Jet Engine) बनाया है.

किसने बनाया यह खास इंजन
वुहान यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजिकल साइंस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं की एक टीम ने ऐसा प्रोटोटाइप उपकरण बनाया है जो चेट इंजन को चलाने के लिए माइक्रोवोव एयर प्लाज्मा का उपयोग कर सकता है. टीम के इस इंजन की डिजाइन एआईपी एडवांस जर्नल में सविस्तार प्रकाशित हुई है.

वैकल्पिक इंजन की थी तलाश
वुहान यूविवर्सिटी के प्रोफेसर और शोध के लेखक जुआ तांग का कहना है कि उनकी टीम ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या के समाधान के लिए काम करना चाहते थी. इसके लिए वे चाहते थे कि कार और हवाई जहाजों में के लिए वैसा ही इंजन बनाया जा सके जो जीवाश्म ईंधन वाले इंजनों जितना शक्तिशाली हो. प्रोफोसर तांग ने कहा, “हमारी डिजाइन में जीवाश्म ईंधन की जरूरत नहीं है , इसलिए इससे कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा और ग्रीनहाउस नहीं निकलेगी, और ना ही ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा.”

प्लाज्मा की क्या है भूमिका
प्लाज्मा  किसी पदार्थ की ठोस, तरल और गैसीय अवस्था के अलावा चौथी अवस्था होती है.  इसमें आवेशित आयन होते हैं. प्राकृतिक रूप यह सूर्य की सतह और पृथ्वी पर बिजली चमकने के दौरान पाई जाती है. लेकिन यह पैदा भी की जा सकती है. शोधकर्ताओं ने जेट इंजन में भी प्लाज्मा स्थिति पैदा की. उन्होंने हवा को बहुत ज्यादा दबाया और माइक्रोवेव की मदद से अति दबाव वाले वायु प्रवाह को आवेशित किया.

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जेट इंजन में प्लाज्मा के लिए माइक्रोवेव का उपयोग पहली बार हुआ है.


अब तक के प्रयासों से कैसे अलग था यह प्रयास
यह दुनिया में चल रहे पूर्व प्रयासों से अलग था जहां जेट थ्रस्टर्स का उपयोग प्लाज्मा बनाने के लिए किया जाता था . इन जेट थ्रस्टर्स का उपोयग नासा के डॉन स्पेस प्रोब, जिनॉन प्लाजमा जैसे तकनीक में किया गया है. लेकिन ये तकनीक पृथ्वी के घर्षण से उबर पाने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए हवाई परिवहन के लिए सही नहीं हैं. इसकी जगह शोधकर्ताओं ने केवल हवा और बिजली का उपयोग कर प्लाज्मा जेट थ्रस्टर से उच्च तापमान, उच्च दाब वाला प्लाज्मा बना दिया.

क्या किया प्रयोग
प्रोटोटाइप प्लाज्मा जेट उपकरण एक किलो स्टील की गेंद को 24 मिलीमीटर व्यास वाली क्वार्ट्ज ट्यूब में उठा सकती है. इसमें उच्च दाब वाली हवा एक माइक्रोवेव आवेश चैंबर में प्लाज्मा जेट में बदली. यह दबाव एक व्यवसायिक जेट इंजन वाले हवाई जहाज के समकक्ष है.

अब यह है तैयारी
इस तरह के बड़े थ्रस्टर बनाकर शोधकर्ता वास्तविक जेट इंजन के स्तर पर पहुंचना चाहते हैं और इसी दिशा में काम भी कर रहे हैं. तांग का मानना है कि उनके शोध के नतीजों से पता चलता है कि उनका जेट इंजन परंपरागत जीवाश्म ईंधन वाले जेट इंजन का विकल्प हो सकता है.

बहुत उम्मीद जगा रहा है यह शोध
गौरतलब है कि परिवहन के क्षेत्र में ऐसे कई प्रयास चल रहे हैं जिससे की जीवाश्म ईंधन का विकल्प सफलता पूर्वक काम कर सके. इसके लिए इलेक्ट्रिक कारों पर जोरों से शोध चल रहा है. एक तरफ इंजन की तकनीक पर काम रो रहे हैं तो दूसरी तरफ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर भी शोध जारी है. लेकिन चीन का यह शोध एक सार्थक कदम माना जा सकता है जो आने वाले दिनों में वायु परिवहन में बड़ा बदलाव करेगा.

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Tags: Jet, Research, Science

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