कोलकाता का कम्युनिस्ट डॉक्टर जो केवल 50 रुपए में करता है डायलिसिस

कोलकाता का कम्युनिस्ट डॉक्टर जो केवल 50 रुपए में करता है डायलिसिस
डॉ. फवाद हलीम जो कोलकाता में केवल 50 रुपए में रोगियों का डायलिसिस कर रहे हैं

जिस दौर में हेल्थकेयर लगातार महंगा हो रहा हो और ये शिकायतें आम हों कि प्राइवेट हास्पिटल्स मरीजों से मनमानी फीस वसूलते हैं, उस दौर में कोलकाता का एक डॉक्टर लोगों की डायलिसिस केवल 50 रुपए में कर रहा है. ये हैरानी भरा सुखद आश्चर्य है लेकिन एकदम सच. ये डॉक्टर अपना इकोनॉमिक मॉडल भी बताते हैं कि वो ऐसा कैसे कर पाते हैं

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देशभर में 25 मार्च को लागू हुए लॉकडाउन के बाद जहां दिल से लेकर किडनी की बीमारियों से जुड़े तमाम रोगियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा रहा है. उनकी ढंग से जांच या डायलिसिस नहीं हो पा रही है, वहीं कोलकाता में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का एक नेता और डॉक्टर केवल 50 रुपए में डायलिसिस करके तारीफ बटोर रहा है.

इस डॉक्टर का नाम फवाद हलीम है. वो 49 साल के हैं. जो एक छोटा सा अस्पताल कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में चलाते हैं. उनका ये सेंटर एक एनजीओ कोलकाता स्वास्थ्य संकल्प के तहत चलता है. इसे वो 60 लोगों के जरिए चलाते हैं, जिसमें कुछ उनके मित्र हैं तो कुछ रिश्तेदार.

डॉक्टर फवाद हलीम सीपीएम के टिकट पर बीते साल लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. वो माकपा के सक्रिय नेता हैं. इसके अलावा वो पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्ष रहे अब्दुल हलीम के पुत्र और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटार्यड) जमीरुद्दीन शाह के दामाद हैं.



शुरू में यहां डायलिसिस 500 रुपए में होता था फिर खर्च घटता गया
डॉकेटर हलीम ने गरीब तबके के लोगों के कम खर्च में इलाज के मकसद से 2008 में अपने मित्रों और परिजनों के सहयोग से स्वास्थ्य संकल्प नाम से एक अस्पताल खोला था. वैसे यहां पर मुख्य तौर पर डायलिसिस ही किया जाता है. शुरू में डायलिसिस का खर्च 500 रुपये था. लेकिन धीरे-धीरे उनके अस्पताल ने ये खर्च घटाया. इसे 350 रुपये कर दिया.

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लॉकडाउन शुरू होते ही फीस 50 रुपए कर दी गई
लॉकडाउन शुरू होने से पहले उनका अस्पताल डायलिसिस के मरीजों से यही फीस लेता था. लेकिन 26 मार्च से डॉक्टर हलीम ने महज 50 रुपये लेने का फैसला किया.

कोरोना के लॉकडाउन से पहले डॉ. हलीम का अस्पताल एक डायलिसिस के 350 रुपए लेता था लेकिन फिर उन्होंने फीस 50 रुपए कर दी


क्यों किया गया ये फैसला
डॉक्टर हलीम ने इंटरव्यू में इतने कम खर्च में डायलिसिस की वजह बताते हुए कहा, कोरोना की वजह से हुए लाकडाउन के चलते मरीज और परिजन मु्श्किलों में फंस गए. उनके सामने आर्थिक और दूसरे तरह की दिक्कतें भी बढ़ गईं, इसलिए उन्होंने डायलिसिस का खर्च घटाकर केवल 50 रुपए करने का फैसला किया.

किस तरह से अस्पताल कर पा रहा है ऐसा
डॉक्टर हलीम के अस्पताल में डायलिसिस की 09 मशीनें हैं. वहां पांच शिफ्टों में काम होता है. रोजाना औसतन 30 से 35 मरीज डायलिसिस के लिए यहां पहुंचते हैं.

अस्पताल इतने कम खर्च में ये कैसे कर पा रहा है. इसके जवाब में उन्होंने मीडिया से कहा, "हमारे अस्पताल में निजी अस्पतालों जैसी आलीशान सुविधाएं नहीं हैं. न तो एयर कंडीशंड वेटिंग लाउंज है और न ही कोई चमकदार कैंटीन. खर्च घटाने के लिए हमने अस्पताल में लिफ्ट भी नहीं लगाई है. अस्पताल के तकनीशियन बेहद दक्ष हैं. हमारे काम को देखते हुए डायलिसिस मशीन और दूसरी जरूरी दवाओं की सप्लाई करने वाली कंपनियां हमें बाजार से कम दर में तमाम चीजें मुहैया कराती हैं. तीन डॉक्टर मुफ्त सेवाएं दे रहे हैं तो कई लोग आर्थिक सहायता भी देते हैं, इस वजह से डायलिसिस बहुत कम पैसों में होना संभव हो पाया है.

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कोरोना और गैर कोरोना मरीजों में भेदभाव नहीं
दूसरे अस्पतालों की तरह डॉक्टर हलीम के अस्पताल में कोरोना और गैर-कोरोना मरीजों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता. कोविड-19 से संबंधित तमाम प्रोटोकॉल के सख्ती से पालन की वजह से ही अब तक डॉक्टर हलीम के अस्पताल का कोई डाक्टर या तकनीशियन संक्रमित नहीं हुआ है.

जब देश में सरकारी हास्पिटल्स तक एक डायलिसिस के लिए कम से कम 900 रुपए की फीस ले रहे हों ऐसे में 50 रुपए फीस लेना ये दिखाता है कि अगर इसकी इकोनॉमी पर ध्यान दिया जाए तो ऐसे इलाज बहुत कम कीमत पर रोगियों को उपलब्ध हो सकते हैं


वर्ष 2019 में डॉक्टर हलीम ने लड़ा था चुनाव
डॉक्टर हलीम का परिवार राजनीति में रहा है. ये संपन्न परिवार माना जाता है. फवाद ने भी वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव माकपा के टिकट पर डायमंड हार्बर सीट से लड़ा था. वह इस सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से हार गए थे. लेकिन डॉक्टर हलीम अपने इस कदम से ये जरूर दिखा रहे हैं कि अगर अस्पताल और डॉक्टर चाहें तो मरीजों को सस्ता इलाज भी मिल सकता है.

डॉ हलीम वर्ष 2019 में कोलकाता की डायमंड हार्बर सीट से माकपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, उसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था


देश में हर साल बेतहाशा बढ़ रहे हैं किडनी के मरीज
हमारे देश में हर साल तकरीबन 2.5 लाख ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं, जिन्हें किडनी से जुड़ी शिकायतें हैं. ये माना जाता है कि हमारे देश में हर एक लाख में 17 से 20 लोग किडनी के मरीज हैं. उनके लिए डायलिसिस थेरेपी बहुत जरूरी हो जाती है. हालांकि देश में अब डायलिसिस केंद्रों की बहुत कमी है.

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कितनी है सरकारी और प्राइवेट हास्पिटल्स पर फीस
आमतौर पर सरकारी अस्पताल एक डायलिसिस का 900-1200 रुपए चार्ज करते हैं तो प्राइवेट हास्पिटल्स में इसके 1600 रुपए से लेकर 3000 रुपए या इससे ज्यादा हैं. दिल्ली में हर महीने 28000 लोग डायलिसिस कराते हैं तो मुंबई में ऐसे लोगों को तादाद हर माह करीब 40,000 तक है.

कोलकाता में तकरीबन 20,000 लोग हर महीने डायलिसिस कराने पहुंचते हैं. दिल्ली में इसका चार्ज 1600 रुपए के आसपास लिया जाता है. मुंबई में करीब 750 रुपए, कोलकाता में 1200 रुपए तो चेन्नई में 1100 रुपए के आसपास लेकिन बड़े प्राइवेट हास्पिटल्स की चैन इसके लिए कहीं ज्यादा फीस वसूलती है.
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