वैज्ञानिकों ने बनाया खास प्लास्टिक , पर्यावरण को बचाने में ऐसे करेगा मदद

यह नया प्लास्टिक 30 दिनों में ही तीन चौथाई डिग्रेड हो सकता है
यह नया प्लास्टिक 30 दिनों में ही तीन चौथाई डिग्रेड हो सकता है

आम प्लास्टिक (Plastic) के डिग्रेड (Degrade) होने में सैंकड़ों साल तक लग जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का बनाया गया नया प्लास्टिक इस अवधि को कुछ महीनों में बदलने में सक्षम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2020, 12:12 PM IST
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नई दिल्ली: आमतौर पर रोजमर्रा की चीजें जो हम इस्तेमाल कर फेंक देते हैं वे प्राकृतिक तरीकों से दूसरे रूपों में बदल जाती हैं. लेकिन प्लास्टिक (Plastic) ऐसी वस्तु है जिसमें बदलाव सैकड़ों सालों तक नहीं होता. अगर प्लास्टिक किसी गड्ढे में भर दिया जाता है तो उसके डिग्रेड (Degrade) या विखंडित होने में हजार साल तक समय लग जाता है. इसकी वजह से प्लास्टिक हमारे पर्यावरण (Environment) के लिए खतरा बनता जा रहा है. अब वैज्ञानिकों ने ऐसा प्लास्टिक बनाया है जो अल्ट्रावायलेट रेडिएशन (Ultraviolet Radiation) से डिग्रेड हो जाएगा.

खतरनाक हो रहे प्लास्टिक को जल्दी डिग्रेड किया जा सकेगा
 प्लास्टिक हमारे पर्वायरण के लिए खतरनाक हो रहा है. वह जमीन की उर्वरता कम कर देता है. वह, नदी और समुद्रों में जीवन को नुकसान पहुंचाता है. जानवरों के पेट में पहुंच कर उनके लिए जानलेवा हो जाता है. लेकिन कर्नल यूनिवर्सीटी के वैज्ञानिकों ने नए पॉलीमर यानि प्लास्टिक का निर्माण किया है जो पानी के वातावरण में जल्दी से डिग्रेड हो सकता है.

यह थी चुनौती
इस शोध मे प्रमुख शोधकर्ता ब्रेस लिपिन्सकी ने कहा कि यह पर्यावरण में लगातर हो रहे प्लास्टिक का जमाव कम कर सकता है. हाल के सालों में डिग्रेडेबल प्लास्टिक (Degradable Plastic) ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. लेकिन ऐसे प्लास्टिक में आम प्लास्टिक की तुलना वाली ही मजबूती हो यह एक चुनौतीपूर्ण काम है.



Plastic
अलग अलग प्सास्टिक डिग्रेड होने में अलग लेकिन फिर लंबा समय लेते हैं.


क्या किया है शोध में वैज्ञानिकों ने
इस शोध में वैज्ञानिकों ने आइसोस्टैटिक पोलप्रोपाइलीन ऑक्साइड  (iPPO) नाम का प्लास्टिक विकसित किया है. iPPO  को 365 नैनोमीटर वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों से जल्दी डिग्रेड किया जा सकता है. आमतौर पर जैसा कि कहा गया, प्लास्टिक प्राकृतिक तरीके से विघटित (Degrade) बहुत ही ज्यादा देर तक होता. ये चार तरह से अपघटित या विघटित (Degradation) हो सकता है. ये तरीके हैं फोटो डिग्रेडेशन, थर्मोग्रेडेशन, हाइड्रोलिक डिग्रेडशन, और बायोडिग्रेडशन.

फोटो डिग्रेडेशन तकनीक से क्या हासिल किया गया
इनमें से फोटो डिग्रेशन तकनीक का ही शोधकर्ताओं ने उपयोग किया गया. अल्ट्रावॉयलेट किरणों से प्लास्टिक के ऑक्सीजन अणु पॉलीमर में मिल जाते हैं और प्लास्टिक कठोर हो जाता है और छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैं. ऐसा इतना पर्याप्त मात्रा में हो जाता है जिससे वे सक्ष्मजीवों के द्वारा अपचयन हो सके. आमतौर पर ये दोनों प्रक्रियाओं के पूरे होने में कम से कम 50 साल लग जाते हैं, लेकिन इस शोध में फोटो डिग्रेडशन में कुछ ही दिन में तीन-चौथाई तक डिग्रेडशन हो जाता है. जिससे वैज्ञानिकों की बहुत उम्मीद बढ़ी है.

वहीं गुण कायम हैं प्लास्टिक के
लिपिंस्की कहते हैं कि आईपीपीओ आम उपयोग के लिए एक स्थायी प्लास्टिक की तरह काम करता है. लेकिन जब उसका अल्ट्रवॉयलेट किरणों से सामना होता है तो उसका रासायनिक विघटन हो जाता है. यह बदलाव लैब में तो समझ में आ जादा है, लेकिन सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देता.

Plastic
क्या आप जानते हैं प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर पीने से आपकी हेल्थ को नुकसान पहुंच सकता है.


कितनी जल्दी हो जाता है डिग्रेडशन
अपने शोध किए गए प्रभाव के बारे में बताते हुए लिपिंस्की ने बताया, “विघटन की दर प्रकाश की तीव्रता (Intensity) पर निर्भर करती है, लेकिन लैब के हालातों में 30 दिन तक इस प्रकाश के सामने इसकी पॉलीमर चेन लेंथ 75 प्रतिशत तक विघटित हो जाती हैं टूट जाती है.”

एक शुरुआत के तौर पर इसे देख रहे हैं वैज्ञानिक
यह एक बड़ी उपलब्धि तो है लेकिन वैज्ञानिक चाहते हैं कि ऐसा कुछ हो  जिससे पॉलीमर का लेशमात्र भी पर्वायरण में शेष न हो. इस बारे में लिपिंस्की ने कहा यह शोध आईपीपीओ की छोटी कड़ियों के जैवविघटन की शुरुआत है, जिससे प्रभावी रूप से पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है. और आने वाले प्रयास यही साबित करने की कोशिश करेंगे.

गौरतलब है कि फिलहाल प्लास्टिक के लंबे समय तक अपरिवर्तनीय रहने से इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के अलावा कोई और विकल्प प्रभावी नहीं हैं. इसके अलावा प्लास्टिक का दोबारा उपयोग, जिसे रीयूज कहते हैं, और उससे दोबारा उपयोग यानि  रीसाइकिल पर भी जोर दिया जाता है जिससे प्लास्टिक बेकार होकर जमा न हो. लेकिन नई तकनीक बहुत समस्याएं एक साथ सुलझाने की उम्मीद जा रही है.

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