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क्या भारत में किसी के खिलाफ साजिश कर रहा है ट्विटर?

ट्विटर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ट्विटर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पार्लियामेंट की इंफोर्मेशन एंड टेक्नॉलजी स्टैंडिंग कमेटी ने ट्विटर को एक नोटिस भेजा है और 11 फरवरी को पेश होकर पक्ष रखन ...अधिक पढ़ें

    ट्विटर इंडिया लगातार ऐसे इलज़ाम झेल रही है जिसमें एक ख़ास राजनीतिक विचार से जुड़े लोग उस पर भेदभाव करने और एक एजेंडे के तहत काम करने के आरोप लगा रहे हैं. इसी संबंध में बीते रविवार को 'यूथ फॉर सोशल डेमोक्रेसी' नाम के एक संगठन ने ट्विटर इंडिया के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन भी किया था. इन आरोपों के बाद पार्लियामेंट की इंफोर्मेशन एंड टेक्नॉलजी स्टैंडिंग कमेटी ने ट्विटर को एक नोटिस भेजा है और पूरे मामले पर 11 फरवरी को पेश होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है.

    कौन लगा रहा है आरोप ?
    ट्विटर इंडिया और उसेक सीईओ लगातार भारत में आलोचना का शिकार हो रहे हैं. यूथ फॉर सोशल मीडिया ने 26 जनवरी को बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा था जिसमें आरोप लगाया गया था कि ट्विटर इंडिया लगातार दक्षिणपंथी विचारों से जुड़े लोगों के साथ भेदभाव कर रहा है. इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अंकित जैन का कहना है कि ट्विटर और फेसबुक लगातार एक तय तरीके से कुछ ख़ास लोगों की अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन कर रहे हैं. जो लोग गैर-वामपंथी विचारधारा से जुड़े हैं उनके ट्विटर हैंडल और फेसबुक प्रोफाइल्स को बार-बार सस्पेंड कर दिया जाता है या फिर उनके पोस्ट्स की पहुंच (रीच) को जानबूझकर घटा दिया जाता है. अंकित ने आरोप लगाया कि ट्विटर ट्रेंड में भी भेदभाव किया जा रहा है, हमारे मुद्दों को जानबूझकर ट्रेंड से बाहर कर दिया जाता है. जबकि ट्विटर लगातार वामपंथी और कांग्रेसी ट्रोल्स के अशोभनीय और असम्मानजनक भाषा वाले ट्वीट्स पर भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.




    क्या कह रहा है ट्विटर ?
    इस मुद्दे पर ट्विटर की अभी तक कोई सार्वजनकि प्रतिक्रिया नहीं ई है लेकिन एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए ट्विटर के प्रवक्ता ने इन आरोपों से साफ़-साफ़ इनकार कर दिया है. ट्विटर का कहना है कि हमारे पास हर व्यक्ति और हर एक पोस्ट के लिए एक जैसे नियम हैं. हमारे पास एक ग्लोबल टीम है जो इन नियमों को लागू कराने का काम करती है, ये टीम किसी भी विचारधारा या राजनीतिक विचार के आधार पर भेदभाव नहीं करती है. हम सभी के लिए ये नियम भेदभाव के बिना लागू करते हैं.

     



    अनुराग ठाकुर करेंगे सुनवाई
    बीजेपी एमपी अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता में इस मामले की सुनवाई की जानी है. अनुराग ने 5 फरवरी को एक ट्वीट के जरिए बताया कि सोशल मीडिया पर नागरिक अधिकारों से जुड़ी इस सुनवाई को 'सेफगार्ड सिटिजन' नाम दिया गया है. 11 फरवरी को इंफोर्मेशन एंड टेक्नॉलजी स्टैंडिंग कमेटी इस मामले की सुनवाई करेगी. ट्वीट के जरिए अनुराग ने इस मामले पर जनता से भी सुझाव मांगे हैं. कमेटी के सामने 11 फरवरी को मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नॉलजी और ट्विटर के प्रतिनिधियों को पेश होना होगा. 2014 में बीजेपी के सोशल मीडिया कैंपेन से जुड़े रहे विकास पांडे आरोप लगाते हैं कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जानबूझकर 2019 के चुनावों को प्रभावित करने के लिए ख़ास विचारधारा के लोगों की आवाज़ को दबाने का काम कर रहे हैं.

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    ट्विटर इंडिया पहले भी हुआ है ट्रोल
    कुछ ही महीने पहले भी ट्विटर के सीईओ जैक डोरसी उस वक़्त विवादों में आ गए थे जब उन्होंने 'Smash the Brahminical patriarchy' (ब्राह्मणवादी मर्दसत्ता को कुचल दो) लिखे एक पोस्टर को लेकर फोटो खिंचवाई थी. जैक भारत आए हुए थे और औरतों के एक समूह से मिले थे जो सोशल मीडिया पर भेदभाव का शिकार हुई थीं. जैक पर आरोप लगे थे कि वो ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं. हालांकि ट्विटर का कहना था कि वो पोस्टर सिर्फ जातिवादी सिस्टम और उसमें औरतों की दशा के खिलाफ था, इसका किसी भी व्यक्ति या समुदाय से कुछ लेना-देना नहीं है.

    सरकार बदल रही है आईटी एक्ट
    मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नॉलजी (MeitY) ने फिलहाल नए आईटी एक्ट से जुड़े ड्राफ्ट को 14 फरवरी तक सलाह मशविरा के लिए सार्वजनिक किया हुआ है. हालांकि इस नए ड्राफ्ट में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारियों को लेकर कई कड़े प्रावधान किये गए हैं जिस पर एशिया इंटरनेट कोलिशन (AIC) ने कड़ा एतराज भी जताया है. नए कानून का नाम इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2018 होगा और ऐसी सभी सोशल मीडिया कंपनी जिसके 50 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं, उन्हें कंपनीज एक्ट के तहत भारत में रजिस्ट्रेशन कराना होगा और एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी करनी होगी. इस नए नियम के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियों की भारत सरकार के प्रति जवाबदेही तय हो जाएगी. फिलहाल क़ानून में ऐसी सीधी जवाबदेही तय करने का कोई प्रावधान मौजूद नहीं है.

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    श्रेया सिंघल जजमेंट 2015 को आधार बनाकर इस बदलाव को शामिल किया गया है. इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया साइट्स को ये तय करना होगा के उनके जरिए किसी भी तरह की 'unlawful' (गैरकानूनी) एक्टिविटी को अंजाम नहीं दिया जा रहा हो. इसके लिए उन्हें उन्नत तकनीक का सहारा लेने की सलाह दी गई है. इसके अलावा सोशल मीडिया कंपनियों क तय करना होगा कि ऐसे इसी कंटेंट को 'ट्रेस' किया जा सके और इसके लिए एंड टू एंड एन्क्रिप्शन का बहाना नहीं बनाया जाएगा. इस बदलाव में सरकार ने सपष्ट कर दिया है कि सोशल प्लेटफॉर्म्स को ऐसे मैसेज के सोर्स ट्रेस करने में मदद करनी ही होगी जिनके जरिए हिंसा फैलाई गई है. नए नियम के मुताबिक लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसीज से शिकायत मिलने के 72 घंटे के अंदर कंपनियों को ट्रेस करना होगा कि वह आपत्तिजनक संदेश कहां से तैयार हुआ है. हालांकि ये माना गया है कि फेसबुक-गूगल जैसे बड़े प्लेयर्स के लिए ये काफी मुश्किल काम है लेकिन इसके जरिए 'विवादित कंटेंट' के फैलने की जिम्मेदारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही में शामिल की गई है.

    Tags: Anurag thakur, BJP, Facebook, Google, Ravishankar prasad, Social media, Twitter

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