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अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं जेपी नड्डा, संगठन में रहा है शानदार काम

News18Hindi
Updated: January 20, 2020, 6:11 PM IST
अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं जेपी नड्डा, संगठन में रहा है शानदार काम
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष रहे जेपी नड्डा निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिये गए हैं

जेपी नड्डा (J.P. Nadda) को 6 महीने पहले कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. 2014 से 2019 तक मोदी सरकार में नड्डा को मंत्री पद मिला था.

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  • Last Updated: January 20, 2020, 6:11 PM IST
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सीनियर नेता जेपी नड्डा (JP Nadda) को आज (सोमवार) बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर चुन लिए गए. भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे जेपी नड्डा के इस पद पर निर्विरोध चुने गए हैं. नड्डा भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) की पसंद के तौर पर देखे जा रहे थे.

6 महीने पहले बने थे कार्यकारी अध्यक्ष
जेपी नड्डा को 6 महीने पहले कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. 2014 से 2019 तक मोदी सरकार में नड्डा को मंत्री पद मिला था, लेकिन इस बार 57 नेताओं वाली मंत्रिपरिषद की लिस्ट में उनका नाम नहीं था. ऐसे में चर्चाएं जोरों पर थीं कि बीजेपी नड्डा को लेकर कुछ बड़ा प्लान कर रही है.

नड्डा क्यों बनाए गए बीजेपी के अध्यक्ष?

हिमाचल प्रदेश के लो-प्रोफाइल नेता माने जाने वाले जेपी नड्डा को साल 2014 के चुनाव के बाद केंद्र की मोदी सरकार में पहली बार बड़ा पद मिला. 58 साल के नड्डा पीएम मोदी और अमित शाह दोनों के काफी करीबी हैं. नड्डा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का समर्थन भी हासिल है.

JP Nadda

राष्ट्रीय टीम में लाने का गडकरी को क्रेडिटबीजेपी की राष्ट्रीय टीम में नड्डा को लाने का श्रेय नितिन गडकरी को जाता है. 2010 में बतौर अध्यक्ष गडकरी ने नड्डा को राष्ट्रीय टीम में अहम जिम्मेदारी दी थी. उन्हें बीजेपी संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया गया, जो कि पार्टी में फैसले लेने वाला सबसे बड़ा संगठन है. 2019 के चुनाव के लिए नड्डा को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था. उनके प्रभारी रहते हुए बीजेपी ने राज्य में 62 सीटें जीतीं और प्रचंड बहुमत हासिल किया.

गजब की नेतृत्व क्षमता
आरएसएस मैन कहे जाने वाले जेपी नड्डा बेहतरीन तरीके से संगठन चलाना जानते हैं. 2014 में नड्डा तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को रिप्लेस करने वाले थे, राजनाथ सिंह की भी यही इच्छा थी. लेकिन बाद में बीजेपी संसदीय बोर्ड ने नड्डा की जगह अमित शाह को पार्टी की कमान सौंप दी. हालांकि, नड्डा को इसका कोई नुकसान नहीं हुआ. 2014 के मोदी कैबिनेट में उन्हें जगह मिली.

जेपी नड्डा को काफी हद तक अमित शाह की तरह ही चुनाव प्रबंधन की रणनीति में माहिर माना जाता है. अमित शाह ने 2019 में पार्टी के लिए हर सीट पर 50 फीसदी वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा था. नड्डा ने यूपी में पार्टी को 49.6 फीसदी वोट दिलाने का कारनामा कर दिखाया.

जेपी नड्डा के सामने ये चुनौतियां
अध्यक्ष बनने के साथ ही जेपी नड्डा के सामने कई चुनौतियां होंगी. अगले महीने दिल्ली के विधानसभा चुनाव हैं. इसके अलावा इस साल के आखिर में बिहार विधानसभा का भी चुनाव होना है. दिल्ली में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है. सामने लोकप्रिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं. राज्य में बेहतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी नड्डा के कंधों पर होगी. साथ ही बिहार भी एक बेहद महत्वपूर्ण राज्य है, जहां बीजेपी और जेडीयू की सरकार है.

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हिमाचल प्रदेश के एक ब्राह्मण परिवार से आने वाले जेपी नड्डा पार्टी के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. नड्डा भाजपा की पितृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विश्वसनीय चेहरा माने जाते हैं. नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रहे 58 साल के नड्डा लो-प्रोफाइल रहकर काम करने के लिए अपनी पहचान रखते हैं.

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First published: January 20, 2020, 11:26 AM IST
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