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आरे कॉलोनी को लेकर क्यों मचा है पूरे मुंबई में बवाल

News18Hindi
Updated: October 5, 2019, 4:15 PM IST
आरे कॉलोनी को लेकर क्यों मचा है पूरे मुंबई में बवाल
आरे कॉलोनी में पेड़ों को काटे जाने का लोग विरोध कर रहे हैं

मुंबई (Mumbai) के आरे कॉलोनी (Aarey Colony) में मेट्रो ट्रेन (Metro Train) के लिए पार्किंग शेड तैयार होना है. इसके लिए यहां पेड़ काटे जाने हैं, जिसका जमकर विरोध हो रहा है...

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  • Last Updated: October 5, 2019, 4:15 PM IST
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मुंबई.  मुंबई (Mumbai) में आरे कॉलोनी (Aarey Colony) में 2500 पेड़ काटने का विवाद बढ़ता ही जा रहा है. मुंबई मेट्रो (Mumbai Metro) के शेड बनाने को लेकर 2500 पेड़ काटे जाने हैं. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने पेड़ काटे जाने को लेकर आदेश जारी कर दिए हैं. लेकिन मुंबई के फिल्मी सितारों से लेकर सेलीब्रिटीज़ और पर्यावरणविद इसका विरोध कर रहे हैं. पुलिस ने पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे 200 लोगों को हिरासत में लिया है.

आरे कॉलोनी के आसपास के इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है. इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. लेकिन पेड़ों को काटे जाने का विरोध कम नहीं हो रहा है. आखिर आरे कॉलोनी में पेडों के काटे जाने का मसला है क्या और मुंबईवासी इसका क्यों इतना विरोध कर रहे हैं?

आरे कॉलोनी में पेड़ों के काटे जाने का मसला है क्या?

मुंबई में मेट्रो के विस्तार का काम चल रहा है. 2014 में शुरू हुए मेट्रो प्रोजेक्ट का पहला फेज वर्सोवा से लेकर घाटकोपर तक पूरा हो चुका है. इसके विस्तार के बाद मेट्रो को पार्किंग शेड की जरूरत पड़ी. पूरी मुंबई खंगालने के बाद मेट्रो परियोजना से जुड़ी कंपनी को आरे कॉलोनी शेड निर्माण के लिए सही जगह लगी. आरे कॉलोनी को आरे जंगल भी कहते हैं. इस इलाके में पेड़-पौधों की भरमार है. आरे कॉलोनी की ग्रीनरी ही इसकी पहचान है.

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आरे कॉलोनी में मेट्रो परियोजना को लेकर पेड़ काटे जाने हैं


मेट्रो शेड निर्माण के लिए इस साल अगस्त में बीएमसी के सामने मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने एक प्रस्ताव रखा. प्रस्ताव में कहा गया कि मेट्रो शेड निर्माण के लिए आरे कॉलोनी के कुछ पेड़ों को काटे जाने की जरूरत है. एक हफ्ता पहले बीएमसी ने पेड़ों को काटे जाने की मंजूरी दे दी. मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रस्ताव के मुताबिक कुल 2702 पेड़ों में से 2,238 पेड़ों को काटा जाना था और बाकी को यहां से ट्रांसफर किया जाना था.

जैसे ही इस फैसले के बारे में मुंबई वासियों को पता चला उन्होंने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. मुंबई जैसे कंक्रीट के जंगल वाले शहर में आरे कॉलोनी राहत की सांस की तरह है. यहां के बड़े ग्रीन पैच की वजह से वातावरण शुद्ध बना रहता है.
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मुंबई की बड़ी शख्सियतें कर रही हैं विरोध

लता मंगेशकर जैसी बड़ी शख्सियतों ने इसका विरोध किया. रवीना टंडन ने इसके खिलाफ ट्वीट किए. लोग पेड़ों के काटने के विरोध में चिपको आंदोलन की तरह इकट्ठा होने लगे. बाद में पता चला कि पेड़ों का काटा जाना सिर्फ वातावरण के लिए ही खतरनाक नहीं होगा. बल्कि इसकी वजह से मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास बाढ़ जैसा खतरा पैदा होगा. पर्यावरणविदों ने बताया कि इन पेड़ों की वजह से बारिश का पानी रुकता है. अगर पेड़ नहीं होंगे तो बारिश का अतिरिक्त पानी मीठी नदी में जाएगा और इससे इलाके में बाढ़ का खतरा पैदा होगा.

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आरे के जंगल


विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब बीएमसी के पैनल (जिस पैनल ने पेड़ों के काटे जाने को मंजूरी दी है) की एक सदस्या ने कहा कि उनके वोट को गलत तरीके से काउंट किया गया. बीएमसी के ट्री अथॉरिटी की डॉ शशिरेखा सुरेश कुमार ने कहा कि ‘इस बारे में कंफ्यूजन बहुत ज्यादा था. कुछ लोग ज्यादा वक्त की मांग कर रहे थे. जब प्रपोजल पास हुआ तो मैं समझ रही थी कि ये बाद में फैसला लेने को लेकर है. मुझे लगा कि ये मेट्रो का प्रपोजल है.’

इसके बाद विवाद और बढ़ गया. मुंबई के कई सेलीब्रिटीज ने पेड़ों के काटे जाने के खिलाफ ट्वीट किए. इस मामले ने जनआंदोलन का रूप ले लिया. लता मंगेशकर, दिया मिर्जा, रवीना टंडन, रणदीप हुडा जैसे सितारे इसके खिलाफ सामने आ गए हैं. अभिनेत्री श्रद्धा कपूर को प्रदर्शनीस्थल पर देखा गया.

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बीएमसी ने पेड़ काटने शुरू कर दिए हैं


नेहरू ने रखी थी आरे कॉलोनी की नींव

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आरे कॉलोनी की नींव रखी थी. 1951 में मुंबई में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पंडित नेहरू ने आरे मिल्क कॉलोनी की नींव रखी थी. इस मौके पर उन्होंने पौधारोपण किया था. नेहरू के पौधारोपण के बाद यहां इतने लोगों ने पौधा रोपा कि कुछ ही वर्षों में ये इलाका जंगल में तब्दील हो गया. ये पूरा इलाका 3166 एकड़ में फैला है. जहां चारों तरफ सिर्फ पेड़ ही पेड़ नजर आते हैं.
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First published: October 5, 2019, 3:47 PM IST
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