क्यों Hitler ने अपनी आत्मकथा नए शादीशुदा जोड़ों में बंटवानी शुरू कर दी?

नाजी तानाशाह अडोल्फ हिटलर (file photo- news18 English)

नाजी तानाशाह अडोल्फ हिटलर (file photo- news18 English)

नस्लवाद और कत्लेआम के लिए कुख्यात नाजी तानाशाह अडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) ने जेल में रहते हुए आत्मकथा (Hitler autobiography) लिखी थी. वे चाहते थे कि माइन काम्फ (Mein Kampf) नाम की आत्मकथानक ये किताब घर-घर में पढ़ी जाए.

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  • Last Updated: April 10, 2021, 3:21 PM IST
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तानाशाह अडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) का जन्मदिन और मृत्यु अप्रैल के महीने में हुई थी. महीने की शुरुआत के साथ ही उनपर बात शुरू हो जाती है. दुनिया की सबसे क्रूर शख्सियतों में से एक हिटलर के बारे में तरह-तरह की बातें हैं, जो अब भी उनके आसपास रहस्यों का घेरा बनाए हुए हैं. नरसंहार करने वाले इस तानाशाह को उनकी सनक के लिए भी याद किया जाता है. जैसे 1925 में छपी अपनी आत्मकथानक किताब माइन काम्फ (Mein Kampf) को लेकर हिटलर सनक की हद तक परेशान रहते हैं. वे चाहते थे कि किताब खूब पढ़ी जाए.

हिटलर की आत्मकथा माइन काम्फ (मेरा संघर्ष) के बारे में एक बात ये है कि किताब जेल में लिखी गई थी. साल 1923 में हिटलर बीयर हॉल में तख्तापलट की नाकामयाब कोशिश के बाद कैद कर लिए गए और देशद्रोह के आरोप में उन्हें म्यूनिख की जेल में डाल दिया गया. यहीं उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी थी.

adolf hitler autobiography
म्यूनिख जेल में कैद रहते हुए हिटलर ने किताब लिखी थी


दशकभर बाद हिटलर सत्ता में आए, तब तक किताब को छपे कई साल हो चुके थे और कोई खास बिक्री नहीं थी. हालांकि हिटलर के शासन संभालते ही किताबों रातोंरात बिकने लगी और प्रमुख नाजी किताब हो गई, जिसकी एक प्रति हर जर्मन अफसर के घर पर होती. साथ ही साथ इसे यहूदियों से घृणा करने वाले लोग भी खूब पढ़ने लगे.
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इस सबके बीच सबसे अजीब था, किताब को लेकर तानाशाह की सनक. उन्होंने सत्ता संभालते ही इसकी 20 करोड़ प्रतियां छापने का हुक्म दिया. इससे एक साथ ही छापेखाने व्यस्त हो गए. किसी के पास कोई दूसरा काम ही नहीं था और लगातार किताबें ही प्रकाशित हो रही थीं. असल में हिटलर चाहते थे कि किताब देश के कोने-कोने में जाए और हर युवा हिटलर के विचारों को अपना ले.

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इसके लिए एकदम अनूठा तरीका निकाला गया. हिटलर ने सरकारी अधिकारियों को आदेश दिया कि वे चुन-चुनकर नए शादीशुदा जोड़ों के बारे में पता लगाएं और उनतक हिटलर की किताब की एक प्रति तोहफे की तरह पहुंचाएं. चांसलर बनने के बाद उसने आदेश किया था कि आत्मकथा की ज्यादा से ज्यादा कॉपीज खरीदी जाएं और घर में रखने की जगह न हो तो गिफ्ट में दे दी जाएं.

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सत्ता में आने के बाद हिटलर ने अपनी किताब की करोड़ों प्रतियां छापने का आदेश दिया था


इसी किताब के बारे में कुछ साल पहले ही बवेरिया स्टेट के एक पूर्व मंत्री लुटविच यंगर ने कहा था कि इसके कारण ही लाखों मारे गए, लाखों ने यातना झेली और हर कोई युद्ध की चपेट में आ गया. ये बात बीबीसी की एक रिपोर्ट में प्रकाशित हुई थी, जब किताब के कॉपीराइट की बात हो रही थी.

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नरसंहार में लाखों यहूदियों की जान लेने और लाखों को देश छोड़ भागने के लिए मजबूर करने वाले इस तानाशाह में नस्लवाद इतना ज्यादा था कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उसने यहूदियों को कमरों में ठूंसकर और जहरीली गैसें छोड़कर मारने का आदेश दे दिया. अपने इसी कत्लेआम की वजह से हिटलर की मूंछों को आज भी सबसे मनहूस या हिंसक मूंछ कहा जाता है.

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हिटलर के कारण आज भी जर्मन लोग खुद को शर्मिंदा महसूस करते हैं (Photo- flickr)


वैसे हिटलर की मूंछों का स्टाइल हमेशा से ही ऐसा नहीं था. वो ऐसी मूंछें रखना चाहता था, जो खूब लंबी और घनी हो. उसने मूछें बढ़ानी शुरू भी की थीं लेकिन फौज में भर्ती के बाद Bavarian Infantry Division ने उसे अपनी मूंछें छोटी रखने का आदेश दिया ताकि जहरीली गैसों से बचने के लिए गैस मास्क चेहरे पर ठीक से फिट हो सके. इससे गुस्साए हिटलर ने अपनी मूंछें एकदम छोटी-छोटी कतर लीं और अंत तक वैसा ही रखा. वैसे हिटलर की मूंछों की ये खास स्टाइल टूथब्रश स्टाइल कहलाती है.

30 अप्रैल 1945 को हिटलर की खुदकुशी के बाद ही कई बड़े नाजी नेताओं ने भी आत्महत्या कर ली. इसके बाद जर्मनी में एक अजीब स्थिति बनी. हजारों जर्मन पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने आत्महत्या की. इसे सामूहिक आत्महत्या लहर के नाम से जाना जाता रहा. इसपर बोलने-बताने से हरदम परहेज किया जाता रहा लेकिन साल 2015 में एक जर्मन लेखक Florian Huber ने इसी घटना पर एक किताब लिखी जो अंग्रेजी में Promise Me You'll Shoot Yourself: The Downfall of Ordinary Germans, 1945 के नाम से आ चुकी है. इसमें मास सुसाइड का खुलकर जिक्र है.
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