दशकों से अफगान में तैनात US आर्मी एकाएक क्यों वापस लौट रही है?

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने सैनिकों से 11 सितंबर तक अफगानिस्तान छोड़ने को कहा है

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने सैनिकों से 11 सितंबर तक अफगानिस्तान छोड़ने को कहा है

साल 2001 में आतंकियों को खोजते हुए अमेरिकी सेना अफगानिस्तान (American military in Afghanistan) पहुंची और अशांति को खत्म करते हुए वहीं रह गई. सैनिकों के फॉरेन बेस पर रहने का खर्च अमेरिकी जनता की जेब से जाता रहा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2021, 3:11 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने सैनिकों से 11 सितंबर तक अफगानिस्तान छोड़कर देश लौट आने को कहा है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैनिकों की वापसी के लिए मई की मियाद तय की थी, जिसे सुविधा के लिए बाइडन ने कुछ महीने बढ़ा दिया. वापसी की डेडलाइन तय करने के साथ ही बाइडन ने कहा कि अब अमेरिका की सबसे लंबी जंग को खत्म करने का समय आ चुका है. तो क्या थी ये जंग और किनके बीच, कब शुरू हुई?

कब और क्यों हुई शुरुआत

अमेरिका ने साल 2001 में तालिबान के खात्मे के लिए अफगानिस्तान में अपनी सेना भेजी. ये 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद की घटना है. तत्कालीन अमेरिका सरकार का मानना था कि अफगानिस्तान ही तालिबानियों की शरणस्थली है और यहीं पर अलकायदा से जुड़े लोग रहते हैं. 9/11 आतंकी हमले से सिहरे अमेरिका ने करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए ताकि अफगानिस्तान में सैन्य ठिकाने बना सके.

American army in Afghanistan
वहां तैनात अमेरिकी सैनिक अफगानी सेना को ट्रेनिंग देने लगे ताकि वो आतंक का मुकाबला खुद ही कर सकें- सांकेतिक फोटो

स्थानीय सैनिकों को देने लगा प्रशिक्षण

वो आक्रामक कार्रवाइयों का दौर था. बाद में अमेरिका ने इस मॉडल को पक्का बनाने के लिए नया काम शुरू किया. वहां तैनात अमेरिकी सैनिक अफगानी सेना को ट्रेनिंग देने लगे ताकि वो आतंक का मुकाबला खुद ही कर सकें. तब जाकर अमेरिका धीरे-धीरे सैनिकों की अपनी फौज को वापस बुलाने लगा.

हजारों सैनिक हैं तैनात



सैनिकों की वापसी के बाद भी वर्तमान में करीब 4 हजार अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में तैनात हैं. ये अफगान सैनिकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं और चरमपंथियों के हमलों पर जवाबी कार्रवाई भी कर रहे हैं. वहीं नाटो और दूसरे सहयोगियों के सैनिक भी अफगान सैनिकों की मदद कर रहे हैं.

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इस बीच अमेरिकी जनता में असंतोष फैलने लगा

इसकी सबसे बड़ी वजह तो सैनिकों के अपने परिवारों से दूरी के कारण आई अस्थिरता थी. जनता का मानना है कि अमेरिकी सैनिक बेवजह ही दशकों से युद्ध के हालात में रखे गए हैं. साथ ही इस असंतोष की एक और वजह ये भी है कि विदेशी जमीन पर सैनिकों की तैनाती का ज्यादातर खर्च अमेरिकी लोगों से टैक्स के तौर पर वसूला जाता है.

American army in Afghanistan
सैनिकों को कई मानवीय समस्याओं से भी जूझना पड़ता है- सांकेतिक फोटो (flickr)


कितना टैक्स सैनिक बेस के लिए देना होता है

शोध करने वाली संस्था RAND कॉर्पोरेशन के मुताबिक अमेरिकी टैक्सपेयर सालाना 10000 से 40000 डॉलर के लगभग टैक्स इसी मकसद से देते हैं. इनमें अमेरिका से विदेशी धरती, जहां सैनिक तैनात होंगे, वहां जाना, रहना, खाना, अस्पताल और अगर परिवार साथ हो, तो बच्चों के स्कूल का खर्च भी अमेरिकी टैक्सपेयर को देना होता है. जबकि इसका बहुत छोटा हिस्सा होस्ट देश देता है.

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मानवीय समस्याएं भी काफी ज्यादा

पैसों के अलावा सैनिकों को कई मानवीय समस्याओं से भी जूझना पड़ता है. जैसे चरमपंथी समूह कभी भी उनपर हमला कर देते हैं. अक्सर ये भी देखा गया है कि स्थानीय लोग चरमपंथियों के बहकावे में आकर अमेरिकी सैनिकों को दुश्मन की तरह देखते हैं. इस तरह से सैनिक विदेशी धरती पर एकदम अकेले पड़ जाते हैं. साथ में अगर परिवार हो तो उनपर भी खतरा रहता है और अगर अमेरिका में रहें तो भी अकेलापन झेलना पड़ता है.

American army in Afghanistan
अमेरिकी टैक्सपेयर सालाना 10000 से 40000 डॉलर के लगभग टैक्स इसी मकसद से देते हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


ट्रंप ने किया था आर्मी की घरवापसी का वादा

आम लोगों का ये असंतोष लगातार बढ़ता गया और नतीजा ये रहा कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले दौर में चुनावी घोषणाओं में एक बात ये भी रखी. उन्होंने वादा किया था कि सत्ता में आकर वे अफगानिस्तान समेत कई युद्ध-प्रभावित देशों से अपने सैनिकों को वापस बुला लेंगे. ट्रंप ने इस वादे को पूरा करने की कोशिश करते हुए ये एलान भी कर दिया था कि साल 2021 की मई तक सैनिक लौट आएंगे. अब इसी समयसीमा को बाइडन ने बढ़ाया है.

क्यों है पड़ोसी देश परेशान

अफगानिस्तान के अलावा सोमालिया और इराक से भी अमेरिकी सैनिकों धीरे-धीरे लौट आएंगे, ऐसी बात हो रही है. हालांकि इससे युद्ध में झुलस रहे इन देशों के पड़ोसी देश काफी परेशान हैं. उन्हें डर है कि अमेरिकी सैनिकों के हटते ही फिर से अशांति फैल जाएगी, जिसका असर उनपर भी होगा.
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