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अहमद पटेल के बाद सोनिया के खास घेरे में हैं अब कौन से कांग्रेस नेता

अहमद पटेल की मृत्यु से कांग्रेस को झटका लगा है. अब उनके बाद राजनीतिक सलाहकार के तौर पर कौन सा नेता उनके करीब होगा.
अहमद पटेल की मृत्यु से कांग्रेस को झटका लगा है. अब उनके बाद राजनीतिक सलाहकार के तौर पर कौन सा नेता उनके करीब होगा.

अहमद पटेल (Ahmed Patel) का निधन कांग्रेस (Congress) के लिए बहुत बड़ा झटका है. वो सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के सबसे विश्वस्त नेताओं में थे. अब उनके बाद सोनिया की सलाहकार मंडली में कौन से नेता हैं, जो उनके बहुत करीबी हैं और कौन बन सकता है बेहद खास

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2020, 4:54 PM IST
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अहमद पटेल का निधन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है. खासकर गांधी परिवार के लिए. वो सोनिया गांधी के बहुत विश्वासपात्र और भरोसे के व्यक्ति थे. अब उनके जाने के बाद सोनिया के अंदरूनी सर्किल में कौन से नेता हैं, क्या कोई ऐसा है जो पटेल की जगह ले सके. हालाकि ये बहुत मुश्किल होगा. कांग्रेस में माना जाता है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों के अपने कुछ खास नेता हैं और कुछ अपना खास नेताओं का घेरा.

सोनिया गांधी के नजदीकी नेताओं को आमतौर पर तीन घेरों में माना जाता रहा है. उनका एकदम अंदरूनी घेरा, जिसमें मुश्किल से 04-05 नेता हैं. फिर बीच का घेरा, जिसमें भी इतने ही नेता हैं और तीसरा घेरा, जिसमें 04 के आसपास कांग्रेस के बड़े नेता हैं.

सोनिया इन्हीं नेताओं से मश्विरा करती हैं
पिछले दिनों इस घेरे में थोड़ी बहुत रद्दोबदल की खबरें भी आईं. लेकिन कमोवेश सोनिया आमतौर पर राजनीतिक तौर पर इन्हीं इन घेरे के नेताओं से विचार-विमर्श करती हैं. उनके फैसलों में ये नेता सबसे ज्यादा शामिल होते हैं.
सबसे अंदरूनी घेरा यानि इनर सर्किल 


हालांकि उनके सबसे ज्यादा भरोसे के नेता अंदरूनी घेरे वाले ही है, जिसे कांग्रेस हलकों में फर्स्ट सर्किल कहा जाता है. जाहिर सी बात है कि इस अंदरूनी घेरे में भी सबसे खास नेता और सलाहकार थे. अब उनकी जगह कौन ले सकता है, ये कहना मुश्किल है लेकिन ये जरूर तय है कि सोनिया तमाम सलाह के लिए अब इस अंदरूनी घेरे पर और आश्रित हो जाएंगी.

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फिलहाल सोनिया गांधी ही कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर काम कर रही हैं. जो लोग उनके खास सिपहसलार हैं, वो कांग्रेस के पुराने नेता हैं, इसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंथनी, अंबिका सोनी शामिल हैं. अहमद पटेल का कद इनमें भी सबसे बड़ा था. वो सोनिया के बड़े संकटमोचक माने जाते थे. पार्टी के कोषाध्यक्ष भी थे.

जब अहमद पटेल जीवित थे, तब तक इन तीन घेरे के नेता सोनिया गांधी के सबसे करीबी माने जाते थे लेकिन अब इसमें कुछ बदलाव हो सकता है.


इनर सर्किल का वो नाम जो सियासत में सक्रिय नहीं रहता
मनमोहन को सोनिया ने वर्ष 2005 में यूपीए सरकार का प्रधानमंत्री बनाया. वो दो कार्यकाल तक प्रधानमंत्री रहे. सोनिया का उन पर अगाध विश्वास है. वो उनसे सलाह लेती हैं. लेकिन टेढे-मेढ़े और जोड़-तोड़ के कामों से उन्हें परे रखा जाता है लेकिन वो उनकी सलाह वाकई कांग्रेस शीर्ष नेता के लिए मायने रखती है. वो उन पर आंख बंद कर भरोसा करती हैं.

इसी इनर सर्किल में एक और नाम हैं, जो सियासी जगत में कतई सक्रिय नहीं रहते लेकिन सोनिया के खास हैं और लंबे समय से करीब हैं. वो हैं सुमन दुबे. वो राजीव गांधी के दून स्कूल के सखा हैं. पहले राजीव के करीब रहे, उसके बाद सोनिया के विश्वस्त हैं.वो गांधी परिवार की कई चैरिटेबल संस्थाओं से जुड़े हैं. ऐसा लगता है कि अहमद पटेल की जगह इस घेरे में अशोक गहलौत आ सकते हैं.

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गहलौत अब खास बन सकते हैं
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत उन नेताओं में हैं, जिन पर गांधी परिवार बहुत भरोसा करता है और उनमें जोड़तोड़ के साथ जबरदस्त रणनीतिकार के साथ बेहतर संगठन क्षमता का भी अनुभव है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब सोनिया गांधी के सबसे विश्वस्त सलाहकार की जगह ले सकते हैं


भरोसेमंद नेताओं का दूसरा घेरा 
दूसरे घेरे में अब तक अशोक गहलौत, पूर्व गृह मंत्री सुशील शिंदे, नौ बार के लोकसभा सांसद मल्लिकार्जुन खर्गे जैसे नेता हैं. साथ ही रणदीप सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल. हालांकि ये दोनों राहुल गांधी के भी नजदीकी लोगों में हैं.

तीसरे घेरे के नेता
अब तीसरे घेरे की बात करते हैं. इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, अभिषेक मनु सिंघवी, पी चिदंबरम और पूर्व मंत्री जयराम रमेश जैसे नेता हैं. अमरिंदर लगातार पार्टी में गांधी परिवार से बाहर नेतृत्व देने का विरोध करते रहते हैं. वो चाहते हैं कि सोनिया ही पार्टी की अगुवाई करती रहें. अभिषेक सिंघवी ने भी हमेशा पार्टी के मंचों और बाहर गांधी परिवार के प्रति निष्ठा जाहिर की है.

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पिछले दिनों चिदंबरम के बयानों ने असहज किया
हालांकि पिछले दिनों पी. चिदंबरम ने जरूर कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर दिया था जब उन्होंने पार्टी की मौजूदा नीतियों से नाखुशी जाहिर करते हुए बयान दिया था कि पार्टी कमजोर हो रही है. लेकिन अब तक उन्हें सोनिया के नजदीकी नेताओं में गिना जाता रहा है.

पूर्व मंत्री जयराम रमेश सोनिया के भी करीब हैं और उन्हें राहुल के करीब भी माना जाता है. वो दोनों की ही सलाहकार मंडलियों में माने जाते हैं. आमतौर पर सोनिया के करीबी कांग्रेस के नेता वरिष्ठ हैं. लंबे समय से कांग्रेस की सेवा कर रहे हैं. पार्टी और खासकर गांधी परिवार के प्रति भरोसेमंद हैं. अगर कांग्रेस सूत्रों की मानें तो हाल के दिनों में गहलौत और विश्वसनीय बनकर उभरे हैं. वो सोनिया के खास सलाहकारों में तो हैं ही लेकिन अब उन पर कहीं ज्यादा भरोसा जताकर अन्य जिम्मेदारियां भी दी जा सकती हैं.
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