संघ-बीजेपी के बाद अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी क्यों हुई दारा शिकोह पर फिदा?

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Updated: September 12, 2019, 12:02 PM IST
संघ-बीजेपी के बाद अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी क्यों हुई दारा शिकोह पर फिदा?
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने दारा शिकोह की जीवनी पढ़ाए जाने का प्रपोजल दिया है

बीजेपी और संघ के बाद अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) भी शाहजहां के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह (Dara Shikoh) पर फिदा है. एमयू दारा शिकोह की जीवनी यूनिवर्सिटी में पढ़ाए जाने का पक्षधर है. इस बारे में यूनिवर्सिटी ने एक प्रस्ताव भी पारित किया है...

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इरम आगा

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) की अकादमिक परिषद ने दारा शिकोह (Dara Shikoh) की जीवनी को यूनिवर्सिटी में पढ़ाए जाने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है. अकादमिक परिषद अकबर (Akbar) और उसके बाद दार्शनिक दारा शिकोह के शांति प्रयासों के बारे में छात्रों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी देने के पक्ष में है.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने बुधवार को दारा शिकोह पर दिल्ली में हुई एक गोष्ठी में इस बात की जानकारी दी. सिम्पोजियम एकेडमिक्स फॉर नेशन ने आयोजित किया था. इस आयोजन में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और आरएसएस नेता कृष्ण गोपाल ने भी शिरकत की.

तारिक मंसूर ने कहा कि ‘ये अपनेआप में अनोखा और वक्त पर लिया फैसला है. दारा शिकोह की पढ़ाई देश की साझी संस्कृति के बार में जानकारी देगी. कृष्ण गोपाल के सहयोग से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है. दारा शिकोह के बारे में पढ़ाई को अकादमिक परिषद ने मंजूरी दे दी है.’

आरएसएस नेता कृष्ण गोपाल ने भी तारिक मंसूर की बात का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि दारा शिकोह असल मायने में असली मुसलमान था, जिसने एक अच्छा हिंदुस्तानी बनने की कोशिश की. कृष्ण गोपाल ने कहा कि ‘दारा शिकोह के पिता ने समझ लिया था कि उसके बेटे ने हिंदुस्तान को जान लिया है और वो शासन चलाने के लिए बेहतर साबित होगा लेकिन औरंगजेब ने बवाल खड़ा किया. औरंगजेब को लगा कि अगर दारा शिकोह सफल रहता है तो इस्लाम खतरे में आ जाएगा.’

दारा शिकोह ने बनारस जाकर सीखी थी संस्कृत
तारिक मंसूर ने शाहजहां के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह की कई खूबियों और उनके द्वारा किए गए समाज के लिए अच्छे कामों की चर्चा की. शाहजहां के बीमार होने के बाद दारा शिकोह को 1657 में औरंगजेब के हाथों हार मिली. उसे अपने ही छोटे भाई मुहिद्दीन ने शिकस्त दी, जो आगे चलकर औरंगजेब कहलाया. दिल्ली की सल्तनत औरंगजेब के हाथों में गई.
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी


दारा शिकोह के बारे में कई दिलचस्प जानकारी वक्त-वक्त पर मिलती रही है. कहा जाता है कि दारा शिकोह की सिखों के सातवें गुरु, गुरु हर राय से गहरी दोस्ती थी. दारा शिकोह बनारस गया और वहां जाकर उसने संस्कृत सीखी. दारा शिकोह ने उपनिषदों का पर्सियन में अनुवाद किया और उसे लेकर यूरोपिय देशों मे गया. उसने इस्लाम और हिंदुइज्म के बीच बेहतर तालमेल के लिए भाषा के स्तर पर भी बदलाव किए और एक कॉमन भाषा बनाने के प्रयास किए.

तारिक मंसूर ने कहा कि 1657 में दारा शिकोह ने करीब 50 उपनिषदों का पर्सियन भाषा में अनुवाद किया. यूरोप के लोग संस्कृत नहीं पर्सियन भाषा समझते थे. दारा शिकोह के अनुवाद की वजह से वो उन उपनिषदों को पढ़ पाए. वो सभी धर्मों में एकसमान विश्वास रखता था.

दारा शिकोह के अनुवाद को सिर्र-ए-अकबर (सबसे बड़ा रहस्य) कहा गया. उसकी सबसे ज्यादा सराही गई रचना मजमा-उल-बहरीन रही.

अकबर के बाद दारा शिकोह था गंगा जमुनी तहजीब का हिमायती
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के कॉर्डिनेटर नदीम रिजवी ने न्यूज18 को बताया कि दारा शिकोह की पढ़ाई का प्रपोजल उन्होंने तैयार किया है. इस बारे में काफी सोच विचार किया गया है कि आधुनिक या मध्यकालीन इतिहास की पढ़ाई को शामिल किया जाए या नहीं. काफी विचार विमर्श के बाद मध्यकालीन भारत के इतिहास की पढ़ाई शामिल करने पर सहमति बनी.

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औरंगजेब


नदीम रिजवी ने कहा कि दारा शिकोह की पढ़ाई के प्रपोजल को इतिहास विभाग ने कुछ महीने पहले दिया था. हमें लगा कि मध्यकालीन भारत के इतिहास में दारा के प्रयासों के बारे में छात्रों को जानकारी दी जानी चाहिए. अकबर के बाद दारा शिकोह ने भारत की गंगा जमुनी तहजीब पर बल दिया. दारा शिकोह धर्मों के बीच शांति स्थापित करने पर जोर देता था. उसकी समझ थी कि समुदायों के बीच संस्कृति की साझेदारी से बेहतर तालमेल पैदा होंगे.

औरंगजेब जहां धार्मिक विचारों को प्रधानता देता था, वहीं दारा शिकोह धर्मनिरपेक्ष रहकर शासन करने का हिमायती था. दारा शिकोह, अकबर के सुल कुल पॉलिसी को आगे बढ़ाने का पक्षधर था. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने दारा शिकोह की पढ़ाई को इतिहास में शामिल करने के प्रपोजल को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा है.

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First published: September 12, 2019, 11:41 AM IST
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