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बोफोर्स के बाद अब भारतीय सेना इन तोपों से देगी दुश्मनों को करारा जवाब

News18Hindi
Updated: October 25, 2019, 3:00 PM IST
बोफोर्स के बाद अब भारतीय सेना इन तोपों से देगी दुश्मनों को करारा जवाब
बोफोर्स तोप ने कारगिल और सर्जिकल स्ट्राइक3 में जबरदस्त प्रदर्शन किया है.

सरकार ने 30 साल के लंबे इंतेजार के बाद भारतीय सेना ( indian army) में कई तोपों का शामिल करने का निर्णय किया है. इनमें एक अमेरिकन तोड़ आर्टलरी अल्ट्रा लाइट M-777 है.

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  • Last Updated: October 25, 2019, 3:00 PM IST
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ऑपरेशन विजय की नायक रही बोफोर्स तोप (Bofors Gun) ने एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक-3 (Surgical Strike-3) में अपनी काबलियत को साबित किया है. 20 अक्टूबर की सुबह भारतीय बोफोर्स तोपों ने न केवल पाकिस्तानी फायरिंग का मुहतोड़ जवाब दिया बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की नीलम घाटी में स्थित कई आतंकी शिवरों को नेस्तानाबूत कर दिया. हालांकि बोफोर्स का नाम विवादों में भी घिरा रहा है. जिसके चलते करीब 30 सालों तक भारतीय सेनाओं को कोई नई तोप नहीं मिल सकी है. लेकिन भारतीय सैन्य इतिहास में आर्टिलरी गन का महत्वपूर्ण स्थान रहा है. हाल के वर्षों में सरकार ने सेना के आर्टिलरी बेड़े में नयी गनों को शामिल करने का फैसला किया है. जिसके पश्चात कई प्रकार की ऑर्टिलरी को सेना में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है.

सरकार ने 30 साल के लंबे इंतेजार के बाद भारतीय सेना में कई तोपों का शामिल करने का निर्णय किया है. इनमें एक अमेरिकन तोड आर्टलरी अल्ट्रा लाइट M-777 है. इस गन के भारतीय सेना में शामिल होने से सेना की मारक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा. इस अमेरिका तोप ने आफगानिस्तान और इराक में अपनी मारक क्षमताओं का बेहतरीन प्रदर्शन कर चुकी है.

 145 M-777 आर्टिलरी गन सेना में शामिल होगी
केवल 4 टन वजनी अमेरिकी ऑटिलरी गन M-777 को वर्ष 2016 में भारत सरकार ने खरीद की मंजूरी दी. भारतीय सेना ने देश के विभिन्न इलाकों में इस गन का कई बार परीक्षण करने के बाद शामिल किया है. अमेरिका से भारत ने कुल 145 एम 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों को सौदा किया है. जिसमें से 45 अमेरिका से पूरी तरह तैयार हालत में भारत आएंगी, शेष भारत में तैयार होंगी. एम 777 की मारक क्षमता 31 किलोमीटर की है और महज 30 सेकेंड में ये तीन राउंड फायर कर सकता है.

आमेरिकी अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर गन एम-777 भारतीय सेना में शामिल हुई हैं.


बेहद हल्की होने के चलते इस गन को हेलीकॉपटर के जरिए बहुत कम समय में कसी भी तरह के क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है. ऐसा माना जा रहा है कि इस तोप को चीन और पाकिस्तान से लगती हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा.

दक्षिण कोरिया की 155 एमएम कैलिबर k-9 व्रज
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सेना में शामिल होने वाली दूसरी तोप दक्षिण कोरिया की 155 एमएम कैलिबर k-9 व्रज है. k-9 व्रज एक सेल्फ़ प्रोपेल्ड गन है, जिसको एक बख्तरबंद गाड़ी पर माउंट किया गया है. 60 से 70 किलोमीटर की स्पीड से चलते हुए यह तोप दुश्मनों पर गोलों की वर्षा करने के बाद तेजी से अपनी लोकेशन को चेंज करने की क्षमता रखती है.

दक्षिण कोरिया द्वारा निर्मित 155 मिलीमीटर सल्फ प्रोपेड आर्टिलरी गन सेना में शामिल किया गया है.


के-9 व्रज 15 सेकेंड में तीन राउंड फायर करके 40 से 60 किलोमीटर दूर स्थित दुश्मनों को निस्तोनाबूत करने की क्षमता रखती है. यह तोप रेगिस्तान और सड़क दोनों जगह पर 70 किलोमीटर की स्पीड से चलने में माहिर है. सरकार के दक्षिण कोरिया से कुल 100 तोपों का सौदा किया है. जिनमें से 10 पूरी तरह से तैयार हालत में आएंगी और 90 को मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी LNT के साथ मिल कर तैयार किया जाएगा. k-9 व्रज को राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में पांच अलग अलग रेजिमेंट में तैनात किया जाएगा.

देसी बोफोर्स के नाम से प्रसिद्ध धनुष सेना में शामिल
अमेरिकी अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर M-777 और दक्षिण कोरिया की सेल्फ प्रोपेड K-9 ब्रज के बाद भारतीय सेना में शामिल होने वाली तीसरी तोप देसी बोफोर्स के नाम से प्रसिद्ध धनुष है. बोफोर्स के प्लेटफार्म पर बनी स्वदेशी तोप धनुष 155 कैलिबर की गन है, जिसकी मारक क्षमता 37 किलोमीटर की है. धनुष को बोर्फोस की ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है.

देशी हॉवित्जर गन धनुष बोफोर्स के प्लेटफार्म पर आधारित है.


सेना ने कई ट्रायलय के बाद करीब 150 धनुष तोपों का ऑर्डर दिया है. स्वदेशी तोप धनुष पूरी तरह से कम्प्यूटराइज और बोफोर्स से ज्यादा आधुनिक गन मनी जा रही है. बोफोर्स की रेंज यहां 27 किलोमीटर की है तो वहीं धनुष की रेंज 37 किलोमीटर है. इस तोप में 46.5 किलों ग्राम के गोलों का इस्तेमाल किया जाता है.

डीआरडीओ द्वारा विकसित ATAGS
हाल में डीआरडीओ द्वारा विकसित एडवांस तोड आर्टलरी गन (ATAGS)का अंतिम ट्रायल करने के बाद सेना में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है. डीआरडीओ ने 2013 से एटीएजीएस के विकास का प्रोजेक्ट कल्याणी ग्रुप के साथ मिलकर शुरू किया था. डीआरडीओ द्वारा विकसित 155 कैलिबर की आधुनिक एटीएजीएस तोप विश्व की पहली ऐसी तोप है जो 30 सेकंड में 6 राउंड फायर कर सकती है. इसके अलावा एटीएजीएस 60 मिनट में 60 राउंड फायर कर सकती है.

डीआरडीओ द्वारा विकसित एडवांस तोड आर्टिलरी गन का परीक्षण अंतिम चरण में चल रहा है.


इस एटीएजीएस गन को कुल मारक क्षमता 47 किलोमीटर की है. एटीएजीएस ने टेस्ट के दौरान नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. इस तोप ने हाई एक्सप्लोसिव गोले को सबसे लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता हासिल की है. गौरतलब है कि भारतीय सेना के राजस्थान में जोधपुर जिले के पोखरण में चल रहे देश में निर्मित 155 एमएम और 52 कैलिबर की एडवांस्ड टाऊड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) होवित्जर तोप का परीक्षण दो महीने में सफलतापूर्वक पूरा हुआ है.

परीक्षण में यह तोप की सफलता के बाद पूरी तरह से देश में विकसित पहली होवित्जर तोप के निर्माण का रास्ता खुल गया है. भारतीय सेना को परीक्षण के लिये दो अलग तरह की तोपें सौंपी गयी थीं, जिनका निर्माण संयुक्त रूप से भारतीय रक्षा एवं अनुसंधान संगठन और निजी क्षेत्र की कम्पनियां टाटा पावर एसईडी, भारत फोर्ज एवं कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स ने किया है. इन तोपों का पोखरण के रेगिस्तान में 24 मई से परीक्षण किया जा रहा था. टाटा पॉवर ने जी वन और भारत फोर्ज ने जी टू का प्रारूप परीक्षण के लिये सौंपा था.

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First published: October 25, 2019, 2:04 PM IST
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