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अब नए कंपोस्ट तरीके से दुनियाभर में होगा अंतिम संस्कार

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Updated: February 19, 2020, 3:02 PM IST
अब नए कंपोस्ट तरीके से दुनियाभर में होगा अंतिम संस्कार
अमेरिका में अब शवों को कंपोस्ट तरीके के अंतिम संस्कार किए जाने की अनुमति मिल गई है

दुनियाभर में अंतिम संस्कार प्रचलित तौर तरीके समय के साथ कई समस्याएं पैदा कर रहे हैं. इसमें पर्यावरण से लेकर कम होती जमीनें और एकल परिवार शामिल हैं. ऐसे में अमेरिका में शवों के अंतिम संस्कार का नया कंपोस्ट तरीका प्रचलन में आ गया है. एक प्राइवेट कंपनी ये काम संभाल रही है

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  • Last Updated: February 19, 2020, 3:02 PM IST
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निया में आमतौर पर मौत के बाद अंतिम संस्कार तीन तरीको से होता है. दफन, दाह और पानी वाली अंतिम क्रिया. पारसी धर्म में मृत्यु के बाद शव चील, कौवों के लिए छत पर डाल दिया जाता है, ताकि वो उसे नोचकर खा सकें. लेकिन अब अंतिम क्रिया का एक नया इको फ्रेंडली तरीका सामने आया है. इसमें शव को कंपोस्ट किया जाएगा.

शव के अंतिम संस्कार के अब तक प्रचलित मुख्य तौर पर तीन तरीकों पर अक्सर पर्यावरण और दूसरी दिक्कतों को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं. लिहाजा अब उनके पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से दफनाने पर भी चर्चा होने लगी है. अमेरिका में लाश को कंपोस्ट करने का विकल्प सामने आया है. माना जा रहा है कि ये शव के अंतिम संस्कार का सबसे बेहतर तरीका है, हालांकि ये धार्मिक मान्यताओं से परे है.

सबसे अच्छा तरीका माना जा रहा है
जर्मन वेबसाइट डैश वैले के अनुसार, फोरेंसिक एक्सपर्ट इस नए अंतिम संस्कार के तरीके को जमीन की ऊर्वरता के लिहाज से सबसे अच्छा तरीका मान रहे हैं. उनका कहना है कि शव को जलाए जाने से उसके पोषक तत्त्व जल कर खत्म हो जाते हैं. सिर्फ कार्बन डायऑक्साइड वायुमंडल में जा मिलता है. लेकिन शरीर को कंपोस्ट कर देने से बाद में बचे अवशेष को जमीन में मिलाया जा सकता है.



30 दिनों में पूरी तरह मिट्टी में कंपोस्ट हो जाता है शव


इस तरीके से शव 30 दिनों के भीतर पूरी तरह कंपोस्ट होकर मिट्टी में मिल जाता है. रिकंपोस्ट नाम की जो कंपनी अमेरिका में ऐसा कर रही है, उसका कहना है कि ये शवों के अंतिम संस्कार की इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर लकड़ी, कॉर्बन, जमीन और परंपरागत अंतिम संस्कार में लगने वाले संसाधन की बचत होती है. इस तरीके को ईजाद करने में चार साल लगे. इस कंपनी के न्यूज लेटर पर अमेरिका में अब तक 15,000 लोग साइन कर चुके हैं.

कंपोस्ट तरीके में 30 दिनों के भीतर शव पूरी तरह मिट्टी में घुल जाता है


वाशिंगटन में मिली शवों को कंपोस्ट अंतिम संस्कार की अनुमति
अमेरिका में वाशिंगटन शहर ने वर्ष 2019 में शवों को कंपोस्ट करने या नैचुरल ऑर्गेनिक रिडक्शन की अनुमति दे दी थी. विज्ञान पत्रिका साइंस न्यूज के अनुसार, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ एडवांसमेंट और साइंस की एक बैठक में वो रिपोर्ट पेश की गई कि इस प्रयोग के क्या नतीजे निकले हैं.

इसके लिए बकायदा एक कंपनी भी सामने आई है जो कंपोस्ट करने के लिए शवों को अपनी सुपुर्दगी में लेगी.ये कंपनी अमेरिका के सिएटेल की है, जिसका नाम रिकंपोज है.

अब कई संस्थान कर रहे हैं अंतिम संस्कार का काम
यूरोप के देश ईसाई प्रभाव में रहते रहे हैं, जहां आमतौर पर मृत्यु के बाद शव को कब्रगाहों में दफन कर दिया जाता है. कई देशों और धर्मों में शव का दाह संस्कार किया जाता है और कई मान्यताओं में शव को पानी में बहा दिया जाता है.
कई देशों में अंतिम क्रिया कराने वाले संस्थान हैं. जो लाश को निजी घरों या अस्पतालों से लाकर मोर्ग में संभाल कर रखते हैं. फिर तय तारीख को उसे नहा धुलाकर तैयार करते हैं और फिर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर देते हैं. हालांकि ऐसे संस्थान ज्यादा शवों को ताबूत में रखकर कब्रगाह में दफनाने का काम ज्यादा करते हैं.

अमेरिका में अब कई लोग चाहते हैं कि उनके शव पारिवारिक गार्डन में ही कंपोस्ट कर दिया जाए ताकि वो मृत्यु के बाद भी परिवार के साथ रहें


कई देशों में कब्रगाह में शव दफन के लिए जमीन लेनी होती है, जो बहुत मंहगी होती है और अब लगातार जमीन की कमी होती जा रही है. तमाम देशों में एकल परिवारों के बढ़ने के कारण भी अंतिम यात्रा का स्वरूप बदल रहा है.

अब छोटी जगह में अस्थिकलश दफनाने लगे हैं लोग
जर्मनी में तो इस समस्या से निपटने के लिए परिजन लाश को जलाकर अस्थिकलश को छोटी जगह पर दफनाने का विकल्प चुनने लगे हैं. बिखरते और छोटे होते परिवारों के चलन के बीच बहुत से लोग यह भी सोचने लगे हैं कि उनके मरने पर उन्हें याद करने कौन उनकी कब्र पर आएगा. ऐसे कई लोग मौत के बाद लाश को जलाए जाने और राख को जंगल में बिखेरे जाने का विकल्प चुन रहे हैं.

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First published: February 19, 2020, 3:02 PM IST
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