अचानक गायब हो गया बहुत बड़ा तारा, वैज्ञानिक हुए परेशान, कैसे हुआ ये

अचानक गायब हो गया बहुत बड़ा तारा, वैज्ञानिक हुए परेशान, कैसे हुआ ये
एक मरते तारे के बारे में माना जाता है कि खत्म होने के बाद उसमें सुपरनोवा विस्फोट होगा, लेकिन यह तारा उससे पहले ही गायब हो गया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खगोलविद लंबे समय से एक मरते हुए तारे (Star) के अंत का अध्ययन करना चाह रहे थे, लेकिन वह रहस्यमय तरीके से गायब (Vanish) हो गया.

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आजकल वैज्ञानिकों की अंतरिक्ष की हर घटना पर नजर होती है. वे आधुनिक वेधाशालाओं में स्थित विशाल टेलीस्कोपों की मदद से आंकड़े जमा कर रहे हैं और उन आंकड़ों से अंतरिक्ष की कई सुदूर घटनाओं का अवलोकन करते हैं. लेकिन कई बार उन्हें हैरान करने वाली बात भी नजर आती है. जैसे हाल ही में वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि एक तारा गायब हो गया है. जबकि वह उन्हें करीब 18 साल पहले से दिखाई दे रहा था.

कहां पता चली इसके गायब होने की बात
शोधकर्ताओं ने यूरोपियन साउदर्न ऑबजर्वेटरी (ESO) के वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) का उपयोग करते हुए इस बात का पता लगाया है. उन्होंने पाया कि एक ड्वार्फ गैलेक्सी का विशालकाय लेकिन अस्थिर तारा बिना किसी सुराग या संकेत छोड़कर गायब हो गया. यह तारा हमारी पृथ्वी से 7.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित था.

2001 से दिखाई दे रहा था तारा
खगोलविदों की बहुत सी टीमों ने इस विशालकाय तारे का अध्ययन साल 2001 से लेकर 2011 तक किया था. यह रहस्यमयी तारा किनमैन ड्वार्फ गैसेक्सी में स्थित था. खगोलविदों ने पाया था कि यह तारा अपने जीवन के अंतिम दौर में था.



यह अध्ययन करना चाह रहे थे वैज्ञानिक
वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन करना चाहते थे कि विशालकाय तारों के जीवन का अंत कैसे होता  है. किनमैन ड्वार्फ का यह तारा उनके अध्ययन के लिए सटीक और उपयुक्त पिंड था.  लेकिन जब 2019 में जब खगोलविदों ने ESO के VLT को जब इस गैलेक्सी के तारे की ओर केंद्रित किया, वे यह जानकर हैरान हो गए कि तारा वहां था ही नहीं.

Star
एक अनुमान है कि यह तारा सुपरनोवा के होने से पहले ही ब्लैकहोल में समा गया होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्यों गायब हो गया होगा यह तारा
डबलिन आयरलैंड के ट्रिनिटी कॉलेज के पीएचडी छात्र एंड्रयू ऐलन की अगुआई में यह अध्यन मंथली नोटिसिस ऑफ द रायल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है. शोधकर्ताओं के मुताबिक यह तारा अपनी चमक खोते हुए धूल की वजह से दिखाई नहीं दे रहा होगा. उनको यह भी लगता है कि हो सकता है कि यह तारा बिना सुपरनोवा बनाए ब्लैकहोल में चला गया होगा.

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ऐसा होता नहीं है आमतौर पर
एलन का कहना है कि यदि यह सच हुआ तो यह पहली बार होगा कि किसी विशालकाय तारे का अंत इस तरह से हुआ हो.किनमैन ड्वार्फ गैलेक्सी एक्वेरियस तारे समूह में स्थित है जो 7.5 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर स्थित है. यह इतनी ज्यादा दूर है कि इसके एक एक तारे को अलग से अवलोकित कर पाना बहुत मुश्किल है. लेकिन फिर भी वे उनमें से कुछ के संकेतों को पकड़ने में कामयाब रहे.

यह तारा 75 प्रकाशवर्ष दू्र स्थित था (प्रतीकात्मक तसवीर)


कैसा दिख रहा था पहले यह तारा
 साल 2001 और 2011 के बीच गैलेक्सी का अवलोकन करते हुए वैज्ञानिकों ने पाया कि इस गैलेक्सी से आ रहा प्रकाश ऐसे संकेत दे रहा है कि इसमें एक ‘ल्यूमिनयस ब्लू वेरियएबल’ तारा है जो हमारे सूर्य से 25 लाख गुना ज्यादा चमकदार है. अध्ययन में बताया गया कि इस तरह के तारे अस्थिर होते हैं और अपने स्पैक्ट्रम और चमक में असामान्य बदलाव दिखाते हैं. इसके बाद भी यह तारा कुछ खास संकेत छोड़ रहा था, लेकिन ये संकेत साल 2019 में एकत्र किए गए आंकड़ों में नहीं पाए गए.

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एलन का कहना है कि यह बहुत ही असामान्य बात होगी कि कोई विशालकाय तारा एक बहुत ही चमकीले सुपरनोवा विस्फोट को पैदा किए बिना ही गायब हो गया. शोधकर्ता अब इस तारे के बारे में ESO के एक्स्ट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ELT) से एक बार और अवलोकन करने की कोशिश करेंगे. ELT के बारे में कहा जा रहा है कि वह बहुत ही हाई रिजोल्यूशन की तस्वीरें ले सकता है. इससे किनमैन ड्वार्फ के तारे की तस्वीरें भी ली जा सकती है.
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