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Lock Down के बाद, बंद इमारतों का ‘Water System खड़ी कर सकता है मुसीबत

इसे पानी के वितरण के सिस्टम के बंद होने के कारणों के बारे में भी जानकारी हासिल हो सकेगी.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इसे पानी के वितरण के सिस्टम के बंद होने के कारणों के बारे में भी जानकारी हासिल हो सकेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना वायरस (Corona virus) के कारण लॉकडाउन (Lock down) के कारण कई इमारतों में पानी का सिस्टम निष्क्रिय पड़ा है. ऐसे में लॉकडाउन के बाद उनसे बीमारी पैदा होने का खतरा गंभीर हो सकता है.

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) के दुनिया में बहुत से देशों में इस समय लॉकडाउन (Lock Down) की स्थिति हैं. इसके कारण इन देशों में रेस्तरां, ऑफिस, स्कूल-कॉलेज, मॉल, जिम आदि सार्वजनिक स्थान बंद हैं. वैज्ञानिकों को अंदेशा है कि लॉक डाउन खत्म होने के बाद जब ये जगहें फिर से खुलेंगी तब एक नई तरह की स्वास्थ्य चुनौती सामने आएगी.

क्या है यह चुनौती
शोधकर्ताओं को लगता है कि लंबे समय से बंद रहे इन संस्थानों में पानी के पाइप में धातुओं की लीचींग हो सकती है. वहां जमे पानी में परजीवी और बैक्टीरिया पनप सकते हैं. शोधकर्ता लॉकडाउन के दौरान बंद पानी की सप्लाई की व्यवस्था का अध्ययन कर रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जब लोग उनका दोबारा उपयोग सुरक्षित तरीके से कर सकें.

कहां हुआ अध्ययन
अमेरिका में इंडियाना, वेस्ट लाफायेट स्थित परड्यू यूनिवर्सिटी के पर्यावरण इंजीनियर एंड्रयू वेलटन का मानना है कि बड़ी इमारतों को लेकर लोगों में ज्यादा जागरुकता नहीं हैं. इसका एक कारण यह है कि इसको लेकर कोई गाइडेंस नहीं हैं. वेल्टीन के और उनके साथ काम करने वाली इंजीनियर कैटलिन प्रौक्टर इस कमी को पूरा करने करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. दोनों ही पानी के इन निषक्रिय पानी के सिस्टम के चटिल रसायन विज्ञान को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

शुरू हो सकती हैं सूक्ष्मजीवों की गतिविधियां
जब परड्यू का कैम्पस मार्च में बंद हो रहा था तब वेल्टन की लैब में कैम्पस की कई इमारतों के पानी के नमूने लिए गए थे. एक महीने से बंद पड़ी एक इमारत में प्रौक्टर ने पाया कि उसके पानी के नमूने में कीटाणुनाशक नहीं है. यह इमारत लंबे समय तक और बंद रह सकती है. प्रोक्टर की दिलचस्पी यह जानने में है कि इन इमारतों के पानी के सिस्टम में सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों में अगले कुछ महीनों में कैसा बदलाव होता है.

लॉकडाउन में कई इमारतों के बंद होने से उनका वाटर सप्लाय सिस्टम भी बंद हैं. (प्रतीकात्कम फोटो)


जितनी देर उतना ज्यादा नुकसान
कोई इमारत जितने लंबे समय तक अनुपयोगी होगी, उतने ही लंबे समय तक नुकसान होने की संभावना है.. वाटर ट्रीटमेंट और उसके बाद पानी के उपयोग के बीच समय की लंबाई  बैक्टीरीया पनपने में भूमिका होगी. इसमें शोधकर्ताओं की प्रमुख चिंता एक खास बैक्टीरिया को लेकर है जिसे लीजोनेला (Legionella) कहते हैं. यह बैक्टीरिया लीजोनायर्स (Legionnaires) बीमारी फैलाता है.

क्या है यह बीमारी
लीजोनायर्स अमेरिका में पानी से फैलने वाली प्रमुख बीमारियों में से एक है. यह सीधे रोगी के श्वसन तंत्र पर हमला करती है. इसी लिए पानी की गुणवत्ता गिरने से पहले से ही दबाव में चल रहे लोक स्वास्थ्य व्यवास्था में तनाव आ सकता है.  प्रौक्टर का कहना है कि जो लोक कोविड-19 से संक्रमित हो सकते हैं. वही लोग इन बैक्टीरिया के विषाणुओं से भी संक्रमित हो सकते हैं.

तो क्या करना होगा
एक जटिल इमारत में पानी की गुणवत्ता मौसम के हिसाब से, दिन के समय और यहां तक कि कमरे से कमरे तक भी बदल सकती है. इसलिए इन सिस्टमों के रखरखाव और सफाई के लिए एक ही तरह के दिशा निर्देश मदद नहीं कर सकेंगे. सबसे व्यापक सलाह तो यही होगी कि निष्क्रिय पड़े नलों को कुछ देर के लिए खोल दिया जाए और उनमें से पानी बहने दिया जाए. यह 5 से 10 मिनट तक हो सकता है. इससे पाइपों में जमा हुआ पानी निकल जाएगा. लेकिन इनमें से एक इमारत में तो एक दिन तक पानी निकालते रहना पड़ सकता है.

आसान नहीं है यह
इस मामले में कई चुनौतियां हैं. एक तो यूनिवर्सिटी जैसे इतने बड़े कैम्पस की इमारतों के रखरखाव के लिए इतना स्टाफ नहीं होगा. दूसरे इससे पानी का बिल भी बढ़ सकता है तो पहले संघर्षरत मालिकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. इसके अलावा यह काम पर्याप्त सुरक्षा के बिना करना भी ठीक नहीं होगा जो फिर एक दिक्कत का काम है.

तो फिर क्या किया जाए
वेल्टन के मुताबिक ऐसे में एक तरीका यह है कि इमारतों के मालिक और मैनेजर अभी से नियमित तौर पर कुछ देर के लिए नलों से पानी निकालना शुरू करते रहें. इसे पूरे योजनाबद्ध तरीके से करना ज्यादा बेहतर होगा.

एक मौका भी है यह
वहीं कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह हमारे पानी के सिस्टम का अध्ययन करने का एक सुनहरा मौका भी है. इससे हमारे समाज आने वाले दिनों में किसी आपदा से निपटने के लिए तैयार भी हो सकते हैं. ये सच है कि फिलहाल आपदा इतनी गंभीर है कि इस पर से लोगों का ध्यान नहीं हट रहा है. लेकिन हमें निरपेक्ष रूप से ऐसी ही कई समस्याओं के बारे में सोचना होगा.

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