सिंधिया, पायलट के बाद अब अपने बाकी युवा चेहरों को कैसे सहेजेगी कांग्रेस

सिंधिया, पायलट के बाद अब अपने बाकी युवा चेहरों को कैसे सहेजेगी कांग्रेस
अपने युवा चेहरों को संभालने में पीछे छूटती दीख रही है कांग्रेस

ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के साथ जा चुके हैं. सचिन पायलट का भी अब पार्टी से अलग होना तय लग रहा है. ऐसे में कांग्रेस के दूसरे युवा चेहरों की क्या स्थिति है. खासकर वो चेहरे जिन्हें कांग्रेस का सबसे उर्जावान चेहरा माना जाता था , क्या पार्टी उन्हें सहेज पाएगी

  • Share this:
ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ महीने पहले ही दलबल के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के पाले में जा चुके हैं. साथ ही मध्य प्रदेश में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को गिराने का दंश भी दे चुके हैं. उसके बाद अब सचिन पायलट के विद्रोही तेवर सामने हैं. हालात जहां तक पहुंच गए हैं. उससे लग नहीं रहा है कि वो अब कांग्रेस के साथ होंगे. आर-पार की लड़ाई के मूड में उन्होंने राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार और कांग्रेस नेतृत्व दोनों की चुनौती दी है. सवाल उठता है कि कांग्रेस अब अपने बाकी बचे तेजतर्रार युवा चेहरों को कैसे सहेजेगी.

कांग्रेस में आमतौर पर तेजतर्रार युवा चेहरे वो हैं, जिनकी पिछली पीढ़ी यानि पिता, दादा या मां कांग्रेस में रह चुके हैं और उन्हें कांग्रेस में काफी तवज्जो भी मिलती रही है. जिन युवा चेहरों को कांग्रेस का भविष्य माना जा रहा था, वो अब वहां से छिटकने लगे हैं और अपना भविष्य पार्टी के बाहर तलाश रहे हैं.

ये तो जाहिर है कि कांग्रेस में इस समय युवा और बुजुर्ग नेताओं के बीच संघर्ष चल रहा है. इस रस्साकसी में बुजुर्गों को अगर वरीयता मिल रही है तो ये युवा चेहरों को मंजूर नहीं. हालांकि ये इस समय कांग्रेस का अंतर्विरोध भी है कि वो पीढियों के बीच की महत्वाकांक्षाओं और संघर्षों को कैसे रोके या कैसे सभी को खुश करके रखे. जाहिर ये इतना आसान तो है नहीं, लिहाजा कांग्रेस के तेजतर्रार चेहरे नए ठौर तलाश रहे हैं.



तभी कहा जा रहा था कि सिंधिया के बाद पायलट
सवाल यही है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया केवल दलबल के साथ बीजेपी में गए ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को काफी चोट भी दे गए. कम से कम कांग्रेस के लिए जल्दी इस झटके से उबरना तो संभव नहीं दिखता. हालांकि जब सिंधिया कांग्रेस से बीजेपी की ओर रुख कर रहे थे तभी ये चर्चाएं भी जारी थीं कि अब ऐसा ही कुछ सचिन पायलट भी कर सकते हैं.
अब सचिन पायलट भी उसी राह पर हैं. वो ताल ठोक चुके हैं. उन्हें मनाने की कोशिशें हो रही हैं लेकिन अब तक के उनके मूड को भांपते हुए लगता नहीं कि उन्होंने अपना पैर पीछे हटाने के लिए बढ़ाया है.

युवा नेताओं की राहुल से निराशा
वैसे कांग्रेस इस समय खुद चौराहे पर खड़ी है. राहुल गांधी कांग्रेस नेतृत्व में अपनी पकड़ अब तक नहीं बना चुके लगते हैं. फिर वो कहीं ना कहीं राहुल की तमाम बातों पर असहमतियां भी जाहिर करते रहे हैं. ये राहुल पर था कि पार्टी के युवा चेहरों को बेहतर जगह दिलाएं लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

राहुल गांधी की कोर टीम के युवा चेहरे एक एक करके पार्टी से छिटक रहे हैं


क्या लगने लगा है युवा चेहरों को
पीछे भी कई इस तरह की रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिसमें कांग्रेस में युवा चेहरों को लगने लगा है कि पार्टी में ना तो उन्हें कोई खास जिम्मेदारी मिल रही है और ना ही ऐसा लग रहा है कि उनका कोई विकास होने जा रहा है. उनका सियासी करियर कहीं ठहर गया है. हालांकि कांग्रेस की खुद भी स्थिति इस समय कुछ ऐसी ही है.

कांग्रेस में सबसे संभावना वाले युवा चेहरे थे जो कम हो रहे हैं
हकीकत ये है कि कांग्रेस अब तक भी ऐसी पार्टी थी, जिसमें दूसरी पार्टियों की तुलना में कहीं ज्यादा संभावना और ऊर्जा वाले युवा नेता थे लेकिन अब वो तेजी से कम हो रहे हैं. कांग्रेस में बुजुर्ग नेताओं का बोलबाला और फिर से पार्टी में बढ़ती पकड़ उन्हें निराश भी करती है.

ये भी कहा जा रहा है कि जो युवा नेता तब राहुल के साथ थे, वो अब राहुल से भी क्षुब्ध हैं. जब सिंधिया ने पार्टी छोड़ी थी तो लग रहा था कि अब कांग्रेस सचिन पायलट की समस्याओं पर गौर करेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं. हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों की गलतियां रही हैं और हालात यहां तक पहुंच गए.

सचिन पायलट का विद्रोही हो जाना पार्टी के लिए बहुत झटका है और ये स्थिति भी कि पार्टी ये सोचे कि क्यों युवा चेहरों का उससे मोहभंग हो रहा है


दूसरे युवा चेहरों की क्या स्थिति है
अब आइए नजर डालते हैं कि पार्टी के अन्य युवा चेहरों पर. हरियाणा में कुलदीप विश्नोई पार्टी का चर्चित चेहरा हैं. हालांकि उनके बारे में भी खबरें थीं कि वो 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी के तौरतरीकों से नाराज हैं. बाद में हालांकि इस बात पर विराम लग गया.

जितिन प्रसाद  को लेकर क्या कहा जाता रहा है
उत्तर प्रदेश में युवा कांग्रेसी चेहरे जितिन प्रसाद ने पिछले दिनों यूपी में ब्राह्णणों के पक्ष में ब्राह्मण चेतना परिषद बनाई है. इसे लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं भी हैं. माना जा रहा है कि वो कांग्रेस के लिए राज्य में ब्राह्णणों को एकजुट करने में जुटे हैं. शाहजहांपुर से ताल्लुक रखने वाले और धौरहरा से सांसद जितिन भी कुछ समय पहले तक पार्टी से नाराज थे कि उन्हें हाशिए पर सरका दिया गया है. कुछ समय पहले तो उनके बीजेपी में भी शामिल होने की चर्चाएं शुरू हो गईं थीं. फिलहाल प्रियंका गांधी ने उन्हें मनाया है.

Maharashtra, Milind Deora, Congress, Rahul Gandhi, Galwan Valley, China, East Ladakh
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री मिलिंद देवड़ा चीन के मसले पर अपनी ही पार्टी को दे डाली नसीहत.


मिलिंद देवड़ा पार्टी पर ही हमलावर 
मिलिंद देवड़ा भी पार्टी पर हमलावर हैं. हाल में भारत-चीन तनाव के बीच राहुल गांधी के ट्वीट को लेकर उन्होंने आपत्ति भी जताई थी. देवरा भी पार्टी के वफादारों में से एक गिने जाते हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वह पहले कांग्रेसी नेता थे जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस कदम के लिए समर्थन किया था. समय समय पर वो प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का समर्थन जताते हुए नजर आए हैं.

ये भी हैं असंतुष्ट युवा चेहरे
असंतुष्ट युवा कांग्रेसियों में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा भी शामिल हैं. उन्होंने भी कहा था कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करना “राष्ट्रीय अखंडता” के हित में है. एक जमाने में संदीप दीक्षित को भी कांग्रेस में प्रतिभाशाली युवा नेताओं में गिना जाता था. लेकिन उन्हें भी कोई बड़ा रोल अब तक पार्टी में नहीं मिला है.

एक जमाना था जब ये कहा जाने लगा था कि कांग्रेस पार्टी बुजुर्ग पीढ़ी से कमान युवाओं को बखूबी सौंप रही है. इससे भविष्य में पार्टी ज्यादा जोश और उत्साह के साथ मैदान में होगी लेकिन लगता है कि इस बागडोर को सौंपने की प्रक्रिया के बीच ही कांग्रेस कहीं विचारों के मंझदार में फंस गई.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading