बढ़ती उम्र से कमजोर हो जाती है नजर, खास रोशनी से घर पर ही हो सकता है इलाज- शोध

बढ़ती उम्र से कमजोर हो जाती है नजर, खास रोशनी से घर पर ही हो सकता है इलाज- शोध
उम्र के साथ रेटीना की कोशिकाएं कमजोर होने लगती है, लेकिन लाल रोशनी के इलाज से उन्हें ताकत मिलती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शोध से पता चला है कि उम्र के साथ रेटीना (Ratina) के कमजोर होने से लाल रोशनी (Red Light) के इलाज से फायदा हो सकता है.

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शरीर के बाकी हिस्सों की तरह उम्र के साथ-साथ हमारी आंख की रेटीना (Ratina) भी कमजोर होने लगती है. इसका नतीजा यह होता है कि बुढ़ापे (Aging) में लोगों की देखने की क्षमता कम होती जाती है और तब इसका बुरा असर भी दिखाई देने लगता है. शोध में पाया गया है कि लाल रोशनी( Red Light) से रेटीना को खराब होने से बचाया जा सकता है.

लाल रोशनी से होता है फायदा
आंख के रेटीना को कमजोरी से बचाने का यह तरीका घर पर ही अपनाया जा सकता है. इसमें केवल लाल रोशनी की जरूरत होती है. शोधकर्ताओं को मुताबिक लाल रोशनी को रोज केवल कुछ मिनटों तक ही देखने से आंख की रेटीना को फायदा मिलता है. अभी तक नजर और रोशनी से संबंधित जितने भी अध्ययन हुए हैं, वे सभी नीली रोशनी पर केंद्रित रहे हैं. इन शोधों में नीली रोशनी का रेटीना की कोशिकाओं पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों का अध्ययन किया गया है. इन अध्ययनों के मुताबिक नीली रोशनी का रेटीना पर बुरा असर होता है और लंबे समय में इसका नतीजा कमजोर नजर के रूप में सामने आता है.

बुजर्गों को हो सकता है फायदा
ताजा शोध में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में हुआ है और हाल ही में जर्नल्स ऑफ जेरोन्टोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. जेरोन्टोलॉजी बुजुर्गों के स्वास्थ्य संबंधी विषय है. इस अध्ययन में लाल रोशनी पर ध्यान दिया गया है और उसका बढ़ती उम्र के साथ कमजोर होने वाली नजर के इलाज पर काम किया गया है.



क्या होता उम्र का रेटीना पर असर
उम्र का हर व्यक्ति के रेटीना पर असर होता है. लेकिन बुढ़ापे में इसका असर ज्यादा दिखता है और नजर कमजोर होना आम बात होती है. शोधकर्ताओं  के मुताबिक इंसानों में 40 साल की उम्र के बाद रेटीना कमजोर होना शुरू होने लगती है. इस उम्र के बाद से रेटीना बाकी अंगों के मुकाबले तेजी से कमजोर होने लगती है. क्योंकि तब कोशिकाओं की ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है. इन कोशिकाओं की आवश्कता के लिए जरूरी ऊर्जा मिलना तो कम हो ही जाती है,  आंख की फोटोरिसेप्टर कार्यशीलता भी कम होने लगती है.

क्या किया गया शोध में
65 साल की उम्र आते-आते लोगों की नजर काफी कमजोर हो जाती है. लेकिन रोज लाल रोशनी की थेरैपी करने से यह समस्या कम या ठीक की जा सकती है. शोधकर्ताओं ने कई जानवरों पर प्रयोग करने के बाद इंसान की आंखों पर इस रोशनी के प्रभावों का अध्ययन किया. इस अध्ययन में 12 पुरुष और 12 महिलाओं को शामिल किया गया जिनकी उम्र 28 से 72 साल  बीच थी.  इन लोगों को अध्ययन के समय कोई आंख संबंधी बीमारी नहीं थी.

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शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की आंखों का खासतौर पर शुकंओं और छड़ों के प्रतिसंवेनशीलता का अध्ययन किया. टेस्ट लेने के बाद प्रतिभागियों को 670 नैनोमीटर वेवलेंथ वाली गहरे लाल रंग की एलईडी फ्लैशलाइट आंखों में डाली गई. उन्हें कहा गया कि वे इस रोशनी को दो सप्ताह तक तीन मिनट तक रोज देखें.

क्या नतीजा मिला अध्ययन का
जहां युवा प्रतिभागियों को कोई फर्क नहीं दिखाई दिया तो वहीं ज्यादा (40 साल) उम्र वाले प्रतिभागियों ने खुद की नजरों को काफी बेहतर पाया. कुछ प्रतिभागियों ने अपनी रंगों को अलग-अलग पहचानने की क्षमता में लगभग 20 प्रतिशत का सुधार पाया. वे अब नीले रंग को ज्यादा आसानी से पहचान सकते  थे जो आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुचाते हैं.

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शोधकर्ता इस रोशनी को रीचार्जिंग बता रहे हैं क्योंकि यह रेटीना के कोशिकाओं की ऊर्जा को बढ़ाती है जिससे नजर बेहतर होती है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उम्र के साथ नजर कमजोर होने का प्रभावी घरेलू इलाज हो सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस रोशनी  उन्होंने प्रयोग किया है वह लगभग 15 डॉलर की होती है.
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