NASA के पुराने आंकड़ों से आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस ने की 50 नए ग्रहों की खोज

NASA के पुराने आंकड़ों से आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस ने की 50 नए ग्रहों की खोज
इस नई तकनीक से बहुत सारे बाह्यग्रहों के होने की पुष्टि सरलता से हो सकी है. (फोटो: @ESO)

खगोलविज्ञान Astronomy) में एक बहुत बड़ी खोज के रूप में शोधकर्ताओं ने आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के जरिए नासा (NASA) के पुराने आंकड़ों से 50 ग्रह (Planets) खोज निकाले.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 27, 2020, 8:32 AM IST
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इस समय दुनिया में बहुत से वेधशालाएं (Observatories) काम कर रही हैं. इनसे रोज बड़ी तादात में खगोलीय आंकड़े (Astronomical Data) जमा होते हैं. इन्हीं आंकड़ों का अध्ययन कर खगोलविद अंतरिक्ष में होने वाली नई घटनाएं और नए पिंडों की खोज करते हैं. खगोलविज्ञान (Astronomy) में एक नई अहम खोज हुई है जिसमें शोधकर्ताओं ने आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का उपयोग करते हुए पुराने आंकड़ों से 50 नए ग्रहों (New Planets) की खोज की है.

किसने किया यह शोध
ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने यह काम नासा के आकड़ों का अध्ययन कर किया है. वार्विक यूनिवर्सिटी के खगोलविदों और कम्प्यूटर साइंस के वैज्ञानिकों ने एक खास मशीन लर्निंग एल्गॉरिदम बनाया जिसने नासा के उस पुराने आंकड़ों का अध्ययन किया जिसमें संभावित ग्रह होने के हजारों उम्मीदवार थे.

खगोलविद कैसे पता लगाते हैं बाह्यग्रहों का
यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता कि इन हजारों उम्मीदवारों में कितने सही होते हैं.  जब वैज्ञानक बाह्यग्रहों की खोज करने का प्रयास करते हैं तो वे टेलीस्कोप की ओर आ रहे किसी तारे के प्रकाश के बीच में रोशनी के कम होने को देखते हैं. इससे उन्हें पता चलता है कि तारे और उनके टेलीस्कोप के बीच कोई ग्रह आ गया है. लेकिन इस रोशनी के कम होने के और भी कारण हो सकते हैं. जिसमें पृष्ठभाग की दखलंदाजी या कैमरे में कोई गड़बड़ी शामिल हैं.



किन आंकड़ों का किया अध्ययन
यहां आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस अंतर बता सकता है.शोधकर्ताओं की टीम को एल्गॉरिदम में प्रशिक्षित किया गया और उन्होंने नासा के रिटायर हो चुके केप्लर स्पेस टेलीस्कोप के आंकड़ों का अध्ययन किया. केप्लर टेलीस्कोप ने नौ साल तक अंतरिक्ष में रह कर अंतरिक्ष की गहराइयों का अध्ययन किया था.

Exoplanet
बाह्यग्रहों की खोज नासा के पुराने आंकड़ों के विश्लेषण से हुई है. . (तस्वीर- @NASAExoplanets )


50 ग्रह छंटे ऐसे
एक बार एल्गारिदम ने ग्रहों को गलत आंकड़ों से छांट लिया तो उसके बाद उसका प्रयोग उन आंकड़ों के विश्लेषण के लिए हुआ. इसी प्रक्रिया के बाद 5 बाह्यग्रहों के बारे में पता चल सका. शोधकर्ताओं की यह पड़ताल पिछले सप्ताह मंथल नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुई हैं.

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अलग अलग तरह के ग्रह हैं ये
यूनिवर्सिटी ने अपनी न्यूज रिलीज में कहा कि ये बाह्यग्रह अपने तारे का चक्कर लगाते हैं और इनके आकार नेप्च्यून से बड़ा होने से लेकर पृथ्वी से भी छोटा है. कुछ ग्रहों की कक्षा का समय 200 दिन है तो कुछ केवल एक ही दिन में अपने सूर्य का चक्कर पूरा कर लेते हैं. अब जबकि खगोलविद जानते हैं  यह ग्रह वास्तव में मौजूद हैं तो वे अब इनके विस्तार से अवलोकन के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकते हैं.

बाह्यग्रहों की अपनी कोई रोशनी नहीं होती इसी लिए उनकी खोज करना मुश्किल होता है. (फोटो: @NASA)


अब तक नहीं किया गया था इस तकनीक का यहां उपयोग
रिलीज में इस शोध के प्रमुख लेखक और वार्विक यूनिवर्सिटी के डेविड आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा, “ग्रहों की वैधता के संदर्भ में अभी तक किसी ने मशीन लर्निंग तकनीक का प्रयोग नहीं किया था. आर्मस्ट्रॉन्ग का कहना है कि अभी तक ज्ञात ग्रहों में से केवल 30 प्रतिशत ही वैध ठहराए जा सके हैं और उनमें भी केवल एक ही पद्धति का उपयोग हुआ था. इस तरीके में शुरुआती ट्रेनिंग की जरूरत होती है, लेकिन उसके बाद सब बहुत ही आसान हो जाता है.

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अब शोधकर्ताओं का उम्मीद है कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का उपयोग वर्तमान में चल रहे और भविष्य के टेलीस्कोप अभियानों के लिए हो सकता है. यह तकनीक वर्तमान तरीकों से न केवल प्रभावी है बल्कि तेज भी है. यह हजारों उम्मीदवारों की वैधता का पता कुछ ही सेकेंड्स में लगा सकता है.
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