सूंघ कर बता देगी AI संचालित Electronic Nose कि मांस सड़ा है या नहीं

यह ई नोज (E-Nose) मांस (Meat) के ताजे होने (Freshness) की सटीकता से पहचान कर सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
यह ई नोज (E-Nose) मांस (Meat) के ताजे होने (Freshness) की सटीकता से पहचान कर सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

ई-नोज (E-Nose) नाम का यह खास आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मांस (Meat) को सूंघकर पता लगा लेता है कि यह ताजा है या फिर सड़ा हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 12, 2020, 12:03 PM IST
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आजकल कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (Electronic Equipment) आ रहे हैं जो हमारे कई काम आसान कर रहे हैं. हाल ही में एक नए उपकरण ने सुर्खियां बटोरी हैं. इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की खासियत यह है कि यह हमारी नाक (Nose) की तरह सूंघ कर बता सकता है कि मांस (Meat) ताजा है या खराब हो चुका है. यह उपकरण आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) की मदद से यह काम संभव कर पाता है.

नाक की तरह काम करने वाला खास सिस्टम
सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की टीम ने यह खास उपकरण विकसित किया है जो एक आर्टिफीशियल ओल्फैक्ट्री सिस्टम बनाया है जो स्तनपायी जीवों की नाक की तरह काम करता है और वह सटीकता से मांस के ताजा होने या न होने के बारे में पता लगा लेता है.

कैसे करता है यह काम
यह इलेक्ट्रॉनिक नोज या ई-नोज एक बारकोड से बनी है जिसके रंगों में समय के साथ बदलाव आ जाता है जब वह मांस की सड़ने से पैदा होने वाली गैस से प्रतिक्रिया करता है. बारकोड रीडर वैसा ही होता है जैसा कि एक स्मार्टफोन में ऐप होता है और यह आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से संचालित होता है.  इस ई नोज को इस बात के लिए प्रशिक्षित किया गया है कि वह मांस के ताजेपन को पहचान सके.



रंगो की बड़ी लाइब्रेरी से पहचान
इस ई नोज में बारकोड के रंगों की विशाल लाइब्रेरी है जिससे वह मांस के ताजेपन के बारे में बता सकता है. जब इस उपकरण का परीक्षण लंबे समय तक छोड़े गए बाजार में उपलब्ध पैक किए हुए चिकन, फिश और बीफ मीट के नमूने पर किया गया, टीम ने पाया कि उनके न्यूरल नेटवर्क एल्गॉरिदम वाला उपकरण मांस के ताजेपन के बारे में 98.5 प्रतिशत की सटीकता से अनुमान लगा लेता है.

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यह ईनोज (E-Nose) इंसानी सूंघने की क्षमता से भी ज्यादा कारगर मानी जा रही है (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


यह तुलना भी
शोधकर्ताओं ने ईनोज में बारकोड के सेंसर्स की प्रतिक्रिया नापने के लिए आमतौर पर उपयोग में लाए जाने वाले एल्गॉरिदम के साथ इसकी सटीकता का आंकलन करते हुए तुलना की. उन्होनें इस विश्लेषण में 61.7 प्रतिशत सटीकता पाई. यह शोध पिछले महीने साइंटिफिक जर्नल एडवांस मेटरियल्स में प्रकाशित हुआ है.

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क्या फायदा होगा
ऑस्ट्रेलिया की मोनाएश यूनिवर्सिटी, चीन की जियांगनान यूनिवर्सिटी, और एनटीयू सिंगापुर के वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि इस ईनोज से खाने की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी क्योंकि इससे ग्रहाक मांस खरीदते समय इस बात की आसानी और सटीकता से पुष्टि कर सकेंगे कि मांस खाने योग्य है या नहीं. यह ‘बेस्ट बिफोर लेबल’ से ज्यादा कारगर है.

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फूड डिलिवरी सिस्टम को भी यह ईनोज (E-Nose) कारगर बनाने में मददगार होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


यह उपयोगिता भी
इस शोध के सहलेखक चेन जियाओडोंग ने बताय, “हमारे प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट आर्टिफीशियल ओल्फैक्ट्री सिस्टम जीवन का वास्तविक हालातों में परीक्षण किया गया था. इसे आसानी से पैकेजिंग पदार्थ में शामिल किया जा सकता है और यह कम समय में नतीजे दे सकता है. इसमें हाल ही में विकसित किए ईनोज की तरह ज्यादा तारों के उपयोग की भी जरूरत नहीं होती है.

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ये बारकोड ग्रहाकों को पैसा बचाने में मदद करेगा क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि मांस जो खाने योग्य हैं वे उसे खारिज न करें.  इसके साथ ही यह पर्यावरण के लिए सहायक होगा. बारकोड टॉक्सिक नहीं हैं और बायोडिग्रेडेबल हैं जिससे इन्हें फूड स्पलाय चेन के सभी हिस्सों में लागू किया जा सकता है.
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